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सरसों की फसल तैयार, कोरोना वायरस के चलते नहीं मिल रही लेबर
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सांपला। क्षेत्र में रबी सरसों की अगेती फसल पककर तैयार हो गई है। इसकी कटाई के लिए तैयारियों शुरू हो गई है। लेकिन करोना वायरस के चलते फसल कटाई के लिए लेबर नहीं मिल रही है। जिसके चलते उन्हें खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फसल कटाई के लिए जो लेबर दूसरी प्रदेशों से आती थी, वह अब ट्रेनें और परिवहन के अन्य साधन बंद होने से नहीं आ पा रही है।
जिले भर में करीब 14 हजार हेक्टेयर में सरसों और तीन हजार हेक्टेयर में जौ की फसल लगी है। सरसों की अगेती फसल पककर तैयार खड़ी है। ऐसे में अब उन्हें चिंता सताए जा रही है कि अगर लेबर नहीं मिली तो कहीं बारिश और ओलावृष्टि से जो फसल बची है वो और खराब न हो जाए। कुछ किसानों ने सरसों की कटाई शुरू भी कर दी है। किसानों का कहना है कि अबकी बार मौसम की आंखमिचौली ने उनकी अगेती फसल को भी पकने में देरी कर दी। बदलते मौसम के चलते उनकी फसल पकने में कम से कम 10 दिन की देरी हुई है।
तापमान गिरने से हुई देरी
फरवरी में तापमान में ज्यादा बढोतरी नहीं रही। मार्च महीने में भी बार बार तापमान बदल रहा है। अब तापमान में बढोतरी होनी शुरू हुई है। अगर फरवरी में तापमान बढोतरी हो जाती तो अब तक फसल पक कर तैयार हो जाती । इस बार सरसों की फसल पकने में दस दिन की देरी हुई है।
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वहीं कोरोना वायरस के चलते अबकी बार मंडी में सरकारी खरीद की भी तैयारियां नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में किसानों को और ज्यादा चिंता हो रही है की कहीं उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों में न बेचनी पड़ी। कृषि विभाग की तरफ से सरकारी खरीद संबंधी अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है। जबकि पिछले साल एक अप्रैल से गेहूं और सरसों की खरीद शुरू हो गई थी।
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जिले भर में करीब 14 हजार हेक्टेयर में सरसों और तीन हजार हेक्टेयर में जौ की फसल लगी है। सरसों की अगेती फसल पककर तैयार खड़ी है। ऐसे में अब उन्हें चिंता सताए जा रही है कि अगर लेबर नहीं मिली तो कहीं बारिश और ओलावृष्टि से जो फसल बची है वो और खराब न हो जाए। कुछ किसानों ने सरसों की कटाई शुरू भी कर दी है। किसानों का कहना है कि अबकी बार मौसम की आंखमिचौली ने उनकी अगेती फसल को भी पकने में देरी कर दी। बदलते मौसम के चलते उनकी फसल पकने में कम से कम 10 दिन की देरी हुई है।
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तापमान गिरने से हुई देरी
फरवरी में तापमान में ज्यादा बढोतरी नहीं रही। मार्च महीने में भी बार बार तापमान बदल रहा है। अब तापमान में बढोतरी होनी शुरू हुई है। अगर फरवरी में तापमान बढोतरी हो जाती तो अब तक फसल पक कर तैयार हो जाती । इस बार सरसों की फसल पकने में दस दिन की देरी हुई है।
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वहीं कोरोना वायरस के चलते अबकी बार मंडी में सरकारी खरीद की भी तैयारियां नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में किसानों को और ज्यादा चिंता हो रही है की कहीं उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों में न बेचनी पड़ी। कृषि विभाग की तरफ से सरकारी खरीद संबंधी अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है। जबकि पिछले साल एक अप्रैल से गेहूं और सरसों की खरीद शुरू हो गई थी।