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चपरासी ने प्रमाण पत्र में नाम बदलने के बदले मांगे एक हजार, रंगे हाथ धरा गया
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 04 Jan 2017 02:38 AM IST
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शिकायत के बाद विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने किया गिरफ्तार
- फोटो : amar ujala
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विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने मंगलवार सुबह एक चपरासी को हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। चपरासी ने जन्म प्रमाण पत्र में महिला का नाम ठीक करने के एवज में रिश्वत मांगी थी। वह लघु सचिवालय स्थित जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा में डीसी रेट पर कार्यरत है।
एक निजी कंपनी में कार्यरत गढ़ी मोहल्ला निवासी सुमित कुमार ने विजिलेंस में शिकायत की थी। अपनी शिकायत में सुमित ने विजिलेंस को बताया था कि उन्हें बेटे आदित्य के जन्म प्रमाण पत्र में उसकी मां का नाम सही करवाना था। सुमित प्रमाण पत्र की फाइल लेकर लघु सचिवालय स्थित जन्म-मृत्यु प्रमाण शाखा में गये। यहां पर नगर निगम के माध्यम से डीसी रेट पर कार्यरत घिलोड़कलां निवासी चपरासी सतेंद्र कुमार मिला। सतेंद्र ने सुमित से फाइल लेकर कहा कि नाम ठीक करवाने में काफी दिक्कत है। यदि काम करवाना चाहते हैं तो एक हजार रुपये का इंतजाम कर लो। सुमित ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया तो सतेंद्र ने फाइल ही रख ली। इसके बाद कई दिनों तक सुमित को चक्कर कटवाए। परेशान होकर सुमित ने विजिलेंस में शिकायत कर दी। इसके बाद विजिलेंस ने इंस्पेक्टर रमेश कुमार के नेतृत्व में ड्यूटी मजिस्ट्रेट महावीर प्रसाद गोदाना के साथ छापामार टीम का गठन किया। सुमित को एक हजार रुपये देकर सतेंद्र के पास भेजा गया। जैसे ही सतेंद्र ने सुमित से एक हजार रुपये लिए विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
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एक निजी कंपनी में कार्यरत गढ़ी मोहल्ला निवासी सुमित कुमार ने विजिलेंस में शिकायत की थी। अपनी शिकायत में सुमित ने विजिलेंस को बताया था कि उन्हें बेटे आदित्य के जन्म प्रमाण पत्र में उसकी मां का नाम सही करवाना था। सुमित प्रमाण पत्र की फाइल लेकर लघु सचिवालय स्थित जन्म-मृत्यु प्रमाण शाखा में गये। यहां पर नगर निगम के माध्यम से डीसी रेट पर कार्यरत घिलोड़कलां निवासी चपरासी सतेंद्र कुमार मिला। सतेंद्र ने सुमित से फाइल लेकर कहा कि नाम ठीक करवाने में काफी दिक्कत है। यदि काम करवाना चाहते हैं तो एक हजार रुपये का इंतजाम कर लो। सुमित ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया तो सतेंद्र ने फाइल ही रख ली। इसके बाद कई दिनों तक सुमित को चक्कर कटवाए। परेशान होकर सुमित ने विजिलेंस में शिकायत कर दी। इसके बाद विजिलेंस ने इंस्पेक्टर रमेश कुमार के नेतृत्व में ड्यूटी मजिस्ट्रेट महावीर प्रसाद गोदाना के साथ छापामार टीम का गठन किया। सुमित को एक हजार रुपये देकर सतेंद्र के पास भेजा गया। जैसे ही सतेंद्र ने सुमित से एक हजार रुपये लिए विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
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