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बंदी ने जेल अस्पताल के बाथरूम में फंदा लगा की आत्महत्या
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 26 Nov 2016 02:20 AM IST
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लकवाग्रस्त बंदी दो महीने पहले इलाज के लिए नारनौल जेल से सुनारिया जेल भेजा गया था
- फोटो : demo pic
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सुनारिया जेल के अस्पताल में बृहस्पतिवार शाम एक बंदी ने बाथरूम में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बंदी लकवा से पीड़ित था। दो महीने पहले उसे कोर्ट के आदेश के बाद इलाज के लिए नारनौल जेल से सुनारिया जेल में शिफ्ट किया गया था। पुलिस ने इत्तफाकिया कार्रवाई की है।
जेल प्रशासन के अनुसार नारनौल के दशमेश नगर मोहल्ला निवासी प्रवीण (35) हत्या के आरोप में पहले नारनौल जेल में बंद था। पेट से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त होने के कारण कोर्ट के आदेश पर प्रवीण को 19 सितंबर 2016 को उपचार के लिए सुनारिया जेल भेजा गया था। बृहस्पतिवार शाम को प्रवीण नहाने के लिए बाल्टी लेकर बाथरूम गया। बंदी ने परने से बाथरूम के हुक में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। काफी देर तक बंदी के बाहर न आने और कोई प्रतिक्रिया न देने पर अन्य बंदियों ने किसी तरह से दरवाजा खोला। प्रवीण का शव फंदे से लटक रहा था। मौके पर जेल प्रशासन पहुंचा। बाद में मजिस्ट्रेट और एफएसएल को मोके पर बुलाया गया। पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया।
हत्या के बाद भागने पर हुआ था हादसा
फरवरी 2016 में प्रवीण ने परिवार के किसी सदस्य की हत्या की थी। यह मामला अभी तक कोर्ट में विचाराधीन है। बताया जा रहा है कि वारदात के बाद प्रवीण भागते वक्त किसी वाहन की चपेट में आ गया था। इसके बाद से पेट के नीचे लकवाग्रस्त होने से चलने में दिक्कत थी।
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परिवार ने बना ली थी दूरी
वारदात के बाद प्रवीण के परिवार ने भी उससे दूरी बना ली थी। उसकी करतूत के चलते परिवार का कोई भी सदस्य जेल में उससे मिलने नहीं आता था। कभी-कभी परिवार के एक दो लोग ही मुलाकात करने आते थे। बीमारी और परिवार की दूरी की वजह से बंदी तनाव में था।
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जेल प्रशासन के अनुसार नारनौल के दशमेश नगर मोहल्ला निवासी प्रवीण (35) हत्या के आरोप में पहले नारनौल जेल में बंद था। पेट से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त होने के कारण कोर्ट के आदेश पर प्रवीण को 19 सितंबर 2016 को उपचार के लिए सुनारिया जेल भेजा गया था। बृहस्पतिवार शाम को प्रवीण नहाने के लिए बाल्टी लेकर बाथरूम गया। बंदी ने परने से बाथरूम के हुक में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। काफी देर तक बंदी के बाहर न आने और कोई प्रतिक्रिया न देने पर अन्य बंदियों ने किसी तरह से दरवाजा खोला। प्रवीण का शव फंदे से लटक रहा था। मौके पर जेल प्रशासन पहुंचा। बाद में मजिस्ट्रेट और एफएसएल को मोके पर बुलाया गया। पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया।
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हत्या के बाद भागने पर हुआ था हादसा
फरवरी 2016 में प्रवीण ने परिवार के किसी सदस्य की हत्या की थी। यह मामला अभी तक कोर्ट में विचाराधीन है। बताया जा रहा है कि वारदात के बाद प्रवीण भागते वक्त किसी वाहन की चपेट में आ गया था। इसके बाद से पेट के नीचे लकवाग्रस्त होने से चलने में दिक्कत थी।
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परिवार ने बना ली थी दूरी
वारदात के बाद प्रवीण के परिवार ने भी उससे दूरी बना ली थी। उसकी करतूत के चलते परिवार का कोई भी सदस्य जेल में उससे मिलने नहीं आता था। कभी-कभी परिवार के एक दो लोग ही मुलाकात करने आते थे। बीमारी और परिवार की दूरी की वजह से बंदी तनाव में था।