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फर्स्ट एड और न एंबुलेंस, चोटिल खिलाड़ियों को लेकर दौड़े निजी अस्पताल

Fri, 04 Nov 2016 01:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 04 Nov 2016 01:43 AM IST
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राजीव गांधी खेल परिसर में 51वीं राज्यस्तरीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पहले दिन दिखी अव्यवस्था - फोटो : amar ujala
शिक्षा विभाग ने पिछली गलतियों से कोई सबक नहीं लिया। राजीव गांधी खेल परिसर में राज्यस्तरीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप शुरू हुई तो फिर वही खामियां दिखीं जो सितंबर में हुई प्रतियोगिता के दौरान सामने आईं थीं। मैदान में न तो फर्स्ट एड की व्यवस्था थी और न एंबुलेंस की। जब लंबी कूद के खिलाड़ियों को चोट लगी तो उन्हें निजी अस्पताल में लेकर भागना पड़ा। टीम इंचार्ज ने भी मैदान में फर्स्ट एड की सुविधा नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। वहीं, कई खिलाड़ियों को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र की आशंका के चलते उन्हें खेलने से रोक दिया गया।
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राजीव गांधी खेल परिसर में बृहस्पतिवार को 51वीं राज्यस्तरीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पहले दिन की शुरुआत अव्यवस्थाओं के साथ हुई। पहले दिन 1:15 बजे लंबी कूद, 1:30 बजे गोला फेंक तो दो बजे दौड़ प्रतियोगिता शुरू हुई। खेल अधिकारियों को समय पर उपकरण नहीं मिलने से पहले दिन ही प्रतियोगिता ढाई घंटे की देरी से हुई। लंबी कूद और गोला फेंक के दौरान चोटिल खिलाड़ियों को संभालने के लिए मैदान में चिकित्सकों की कोई टीम नहीं थी। जबकि, मैदान में प्रदेशभर से आए करीब दो हजार खिलाड़ी दौड़, लंबी कूद, गोला फेंक, शॉट पुट आदि खेलों में अपना दमखम दिखा रहे थे। रोहतक के खिलाड़ी सोहित का कूदते समय पैर मुड़ गया और मोच आ गई। गुड़गांव के अकबर अली के दाहिने हाथ से काफी खून बह रहा था। आयोजक बिना देरी किए खिलाड़ी को तुरंत निजी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के लिए लेकर गए। हालांकि इस संबंध में आयोजकों ने सफाई दी कि प्रशासन को खेल चलने तक मैदान में एंबुलेंस के लिए लिखा गया था। रेडक्रास की एंबुलेंस खेल के उद्घाटन समारोह के दौरान तो थी लेकिन बाद में चली गई। वहीं, रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजों की जांच के दौरान कई जिलों के खिलाड़ियों के जन्म प्रमाणपत्र झूठे मिले। उन्हें असली जन्म प्रमाण पत्र लाने के लिए कहा गया, तब तक वे खेल में भाग नहीं ले पाएंगे।
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शौचालय के लिए भटके खिलाड़ी और प्रभारी

खेल परिसर में बड़े पैमाने हो रही चैंपियनशिप के लिए पानी और शौचालय के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। एथलेटिक मैदान के बाहर बने दोनों शौचालयों पर ताले लटके थे। इस कारण खिलाड़ियों और टीम प्रभारियों को भटकना पड़ा। मैदान पर हर पौने घंटे में पानी के कैंपर खत्म हो रहे थे। टीम इंचार्ज और खेल अधिकारियों को पानी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि आयोजकों ने पानी के टैंकर और 20 कैंपर का इंतजाम किया गया। एक टैंकर मैदान के पास तो दूसरा एक किलोमीटर की दूरी पर था।
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बजट भी नहीं आया पूरा, साढ़े तीन लाख के देंगे ईनाम

सूत्रों का कहना है कि राज्यस्तरीय प्रतियोगिता के लिए अभी पूरा बजट नहीं आया है। निदेशालय की ओर से करीब साढ़े चार लाख का बजट आया है। इसमें से करीब साढ़े तीन लाख रुपये के तो खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि और प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। प्रथम विजेता को 1000, द्वितीय विजेता को 750 तो तृतीय विजेता को 500 रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।

दरी नहीं मिलीं, सूखी घास पर बैठे खिलाड़ी

मैदान में खिलाड़ियों के बैठने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। आलम यह रहा कि मजबूरन खिलाड़ियों को सूखी घास पर बैठना पड़ा तो कुछ खेल शुरू होने के इंतजार में सो गए। कुछ खिलाड़ी छांव की तलाश में मैदान के किनारों पर बैठ गए।

डेढ़ घंटे बाद मिली एयर गन, तब शुरू हुई दौड़

शेड्यूल के मुताबिक पहले दिन सुबह 11 बजे ही 100 मीटर की दौड़ के साथ खेल शुरू होने थे। लेकिन खेल शुरू कराने वाले अधिकारियों को दोपहर डेढ़ बजे तक स्टार्टर, एयर गन, स्टॉप वॉच जैसे उपकरण नहीं मिले। दोपहर बाद दो स्टार्टर और एयर गन मंगवाई गई, तब जाकर खेल शुरू हुए।

खिलाड़ी न जाएं बाहर, भटूरे और पकौड़े का किया प्रबंध

खिलाड़ियों के खाने-पीने की सभी डाइट टीम इंचार्ज को पहले ही दी जाती है। फिर भी खिलाड़ी अपनी भूख मिटाने के लिए बाहर न जाएं, इसलिए स्टेडियम में ही चाय, आइसक्रीम, जूस, छोले-भटूरे, ब्रेड पकौड़े और आलू-पूरी के स्टॉल भी लगे। यहां तय दाम पर ही खाने की चीजें दी गईं।


पहले एंबुलेंस आई थी, बाद में चली गई

रेडक्रास और स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा गया था कि वे खेल प्रतियोगिता के दिन पूरे समय के लिए एंबुलेंस भेजें। स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है। सुबह समारोह के उद्घाटन के समय तो एंबुलेंस थी, पर बाद में वह चली गई। इस बीच कुछ खिलाड़ियों को चोटें आई तो उन्हें तुरंत निजी अस्पताल भेजा गया। खिलाड़ियों को कोई दिक्कत नहीं आने दी गई। पानी के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
- यशवीर सिंह, एईओ, रोहतक।
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