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रोहतक: बर्खास्त पीजीआई कर्मी ने 10 लाख में ली थी बीएससी की फर्जी डिग्री, अब खुद करवाई एफआईआर दर्ज
Fri, 27 May 2022 10:48 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 27 May 2022 10:48 PM IST
सार
बर्खास्त पीजीआई कर्मी ने बोला कि पैसे लेकर डिग्री देने वाले खुद पीजीआई में नौकरी कर रहे हैं। मंत्रियों से नजदीकी दिखाकर धमकी दे रहे हैं। पुलिस ने बहादुरगढ़ के स्कूल संचालक व पीजीआई के कथित कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी कागजात तैयार करने, जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज किया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : getty
विस्तार
हरियाणा के रोहतक में पीजीआईएमएस के ट्रॉमा सेंटर के ऑपरेशन थियेटर में दो साल तक तकनीशियन रहे कर्मचारी की डिग्री फर्जी मिली है। उसने मेघालय की यूनिवर्सिटी के नाम से यह डिग्री मंगवाई थी। नौकरी से बर्खास्त होने के बाद कर्मचारी ने खुलासा किया है कि उसने यह डिग्री 10 लाख रुपये देकर पीजीआई के ही कर्मचारी महिपाल व बहादुरगढ़ के एक निजी स्कूल के संचालक मुकेश से मंगवाई थी।
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पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी कागजात तैयार करने व जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज किया है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि मंत्रियों के नजदीकी के चलते आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।
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पुलिस के मुताबिक कैथल जिले के गांव कोटड़ा निवासी मक्खनलाल ने दी शिकायत में आरोप लगाया है कि वह सितंबर 2019 में पीजीआई के अंदर ओटी तकनीशियन के तौर पर भर्ती हुआ था। साथ ही अपने मूल दस्तावेज पीजीआई में जमा करवा दिए थे। सितंबर 2021 में विभाग की तरफ से उसे नोटिस दिया गया कि आपकी बीएससी ओटी तकनीशियन की डिग्री फर्जी है। 15 दिन के अंदर अपना पक्ष रखें। उसने 16 सितंबर को पत्र देकर मांग की कि उसकी डिग्री की दोबारा जांच करवाई जाए। इसके बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसका पत्र डाक से अक्तूबर 2021 में मिला।
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डिग्री के नाम पर वसूल लिए 10 लाख
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसका संपर्क कैथल निवासी महिपाल से हुआ, जो पीजीआई में ही कार्यरत है। इससे पहले महिपाल जाट कॉलेज कैथल के पास कलेक्शन सेंटर नाम से लैब चलाता था। वहीं पर उसकी मुलाकात हुई थी। आरोपी ने उसे अपने जाल में फंसा लिया, बताया कि उसने खुद बीएससी मेघालय की यूनिवर्सिटी से कर रखी है। उसे भी डिग्री दिलवा देगा, बाहर भी जाना नहीं पड़ेगा।
डिग्री के नाम पर आरोपी व बहादुरगढ़ के एक स्कूल संचालक मुकेश ने उससे 10 लाख के करीब रुपये ले लिए। 2015-16 में उसे माता दरवाजा के नजदीक किराये के मकान में बुलाया गया, जहां पेपर लिखने के लिए दिए गए। 2017 में बीएससी ओटी तकनीशियन की डिग्री लाकर दे दी। आरोप है कि जब उससे पूछा कि डिग्री असली है या नकली। आरोपी बोला, मेरे पास भी यही डिग्री है, खुद पीजीआई में नौकरी कर रहा हूं। इसके अलावा आरोपी ने कई और नजदीकी लोगों के नाम बताए, जिनके पास भी यही डिग्री है।
2012 से नौकरी कर रहा आरोपी
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी महिपाल पीजीआई में 2012 से नौकरी कर रहा है। साथ ही पदोन्नति भी ले चुका है। उसके दस्तावेज की जांच पहले हुई थी, लेकिन जांच बीच में रुक गई थी। फिर दोबारा जांच शुरू हुई। मामले में गहराई से जांच की जाए, ताकि पूरे प्रकरण से पर्दा उठ सके। आरोप है कि दो मंत्रियों से नजदीकी बताकर आरोपी उसे जान से मारने की धमकी दे रहा है। इसके अलावा कैथल जिले के पुलिस से भी मिलीभगत है। ऐसे में मामले की जांच दूसरे जिले की पुलिस से करवाई जाए।
फर्जी डिग्री व अनुभव प्रमाण पत्र का मामला नया नहीं
पीजीआईएमएस में फर्जी डिग्री व अनुभव प्रमाण पत्र का मामला नया नहीं है। यहां कई कर्मचारियों के कागजात पर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व जांच अधिकारी डॉ. आरबी सिंह ने कई कर्मचारियों की नियुक्ति पर सवाल भी उठाए थे। हालांकि जांच अधिकारी के जांच करने पर ही सवाल उठा दिया गया था और ये सभी मामले दब गए थे।
शिकायतकर्ता मक्खनलाल ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनके आधार पर मामला दर्ज कर जांच पड़ताल कर रहे हैं। इसके लिए पीजीआई प्रशासन से रिकॉर्ड लिया जाएगा। - प्रमोद गौतम, थाना प्रभारी पीजीआईएमएस