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रोहतक में उपद्रव के दौरान आईजी जाधव और डीसी बेहेरा रहे फेल
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 01 Jun 2016 01:45 AM IST
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दंगाई
- फोटो : file photo
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जिस तरह के आरोप पुलिस से लेकर प्रशासनिक अफसरों और कर्मियों पर लग रहे थे, वह प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद साफ हो गए। ऐसे 119 पुलिस वालों के नाम सामने आये हैं, जिन्होंने दंगों के दौरान अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं निभाई। मंगलवार को सार्वजनिक की गई प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में दंगे के समय डीसी रहे डीके बेहेरा और आईजी श्रीकांत जाधव को पूरी तरह से फेल बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय नहीं होने के कारण भी दंगा बढ़ता चला गया।
प्रकाश सिंह कमेटी के सामने तत्कालीन डीआईजी सौरभ सिंह ने लिखित रिपोर्ट पेश करके कहा है कि दंगे के समय स्थानीय पुलिस कास्टलाइन पर काम कर रही थी। कुछ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी कानून व्यवस्था की ड्यूटी नहीं निभा रहे थे। ऐसे 119 पुलिस अधिकारी व कर्मी चिह्नित करके लिस्ट बनाई गई, जिन्होंने उस समय कानून व्यवस्था की ड्यूटी को नहीं निभाया। रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है कि ऐसे लोग पुलिस में रहने लायक नहीं हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस व प्रशासन के बीच किसी तरह का को-आर्डिनेशन (समन्वय) नहीं था, जबकि ऐसे हालात में समन्वय सबसे अहम होता है।
डीसी डीके बेहेरा पर टिप्पणी की गई है कि उनका प्रशासनिक कंट्रोल खराब था। वह दंगे में पूरी तरह से नाकाम रहे। उनकी ओर से कोई आदेश जारी किया जाता था तो वह माना नहीं जाता था। उनका कंट्रोल खराब होने के साथ ही पुलिस व प्रशासन में समन्वय खराब होता गया। पुलिस और प्रशासन में को-आर्डिनेशन होता तो डीसी की ओर से लागू की गई धारा-144 पर अमल किया जाता। रिपोर्ट में आईजी श्रीकांत जाधव पर भी अंगुली उठाई गई है। जाधव को लापरवाह के साथ ही दंगे को रोकने में नाकाम बताया गया है।
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दंगों के दौरान जिम्मेदारी नहीं निभाने वाले 83 पर कार्रवाई
डीआईजी सौरभ सिंह ने दंगों के समय सही तरीके से कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं निभाने वाले 119 पुलिस अफसरों और कर्मियों की जो लिस्ट तैयार की थी, उसके बारे में एसपी शशांक आनंद ने बताया कि वह लिस्ट मिलने पर 14 मार्च को 83 पुलिस वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चुके हैं। लेकिन प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ऐसे अफसरों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
डीआईजी सौरभ सिंह ने दीवार कूदकर बचाई जान
आरक्षण आंदोलन के दौरान दंगाइयों ने पुलिस अधिकारियों तक को मारने का प्रयास किया और जहां वह ठहरे थे, वहां आग लगा दी। मंगलवार को सार्वजनिक की गई प्रकाश सिंह कमेटी की जांच रिपोर्ट में आईजी और डीआईजी के बयानों से यह साफ हुआ है। दोनों ही आला अधिकारियों ने किसी तरह भाग कर दंगाइयों से अपनी जान बचाई। प्रकाश सिंह कमेटी के सामने तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव और डीआईजी सौरभ सिंह ने बयान दर्ज कराया है, जिसमें दंगाइयों के आतंक को बयां किया गया है। आईजी श्रीकांत जाधव ने अपने बयान में कहा है कि 19 फरवरी को डीआईजी सौरभ सिंह दिल्ली बाईपास पर सर्किट हाउस में मौजूद थे। उसी समय सैकड़ों दंगाई वहां घुस गए और डीआईजी पर हमला करना चाहा। लेकिन आईजी आवास व कार्यालय की दीवार सर्किट हाउस से मिली होने के कारण डीआईजी सौरभ सिंह को दीवार पार कराकर बचाया गया। जिसके बाद दंगाइयों ने सर्किट हाउस में आग लगा दी। डीआईजी सौरभ सिंह ने भी अपने बयान में यही कहा है कि दंगाई सर्किट हाउस में हमला करने के लिए घुस गए तो वह दीवार कूदकर आईजी आवास पहुंचे।
आईजी ने अपने घर तैनात कर दी पुलिस, लुटता रहा शहर
प्रकाश सिंह कमेटी के सामने दिए बयान में डीसी डीके बेहेरा ने आईजी श्रीकांत जाधव पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 19 फरवरी को आईजी ने अधिकतर पुलिस वालों को अपने आवास पर तैनात कर दिया और शहर में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ काफी कम पुलिस रह गई। ऐसे हालात में दंगाई शहर में लूटपाट और आगजनी करते रहे और कम पुलिस के साथ उनको काबू कर पाना मुश्किल था। वहीं, डीआईजी सौरभ सिंह ने डीसी डीके बेहेरा को घेरा है। सौरभ ने कहा है कि डीसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी मजिस्ट्रेट को उनकी जिम्मेदारी तक नहीं बताई। ना ड्यूटी मजिस्ट्रेट किसी भी जगह आये और डीसी भी खुद कहीं दिखाई नहीं दिये। प्रकाश सिंह कमेटी के सामने अधिकारियों ने इस तरह एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए हैं और दंगे में आपसी कार्यप्रणाली की कलई खोली है।
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प्रकाश सिंह कमेटी के सामने तत्कालीन डीआईजी सौरभ सिंह ने लिखित रिपोर्ट पेश करके कहा है कि दंगे के समय स्थानीय पुलिस कास्टलाइन पर काम कर रही थी। कुछ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी कानून व्यवस्था की ड्यूटी नहीं निभा रहे थे। ऐसे 119 पुलिस अधिकारी व कर्मी चिह्नित करके लिस्ट बनाई गई, जिन्होंने उस समय कानून व्यवस्था की ड्यूटी को नहीं निभाया। रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है कि ऐसे लोग पुलिस में रहने लायक नहीं हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस व प्रशासन के बीच किसी तरह का को-आर्डिनेशन (समन्वय) नहीं था, जबकि ऐसे हालात में समन्वय सबसे अहम होता है।
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डीसी डीके बेहेरा पर टिप्पणी की गई है कि उनका प्रशासनिक कंट्रोल खराब था। वह दंगे में पूरी तरह से नाकाम रहे। उनकी ओर से कोई आदेश जारी किया जाता था तो वह माना नहीं जाता था। उनका कंट्रोल खराब होने के साथ ही पुलिस व प्रशासन में समन्वय खराब होता गया। पुलिस और प्रशासन में को-आर्डिनेशन होता तो डीसी की ओर से लागू की गई धारा-144 पर अमल किया जाता। रिपोर्ट में आईजी श्रीकांत जाधव पर भी अंगुली उठाई गई है। जाधव को लापरवाह के साथ ही दंगे को रोकने में नाकाम बताया गया है।
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दंगों के दौरान जिम्मेदारी नहीं निभाने वाले 83 पर कार्रवाई
डीआईजी सौरभ सिंह ने दंगों के समय सही तरीके से कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं निभाने वाले 119 पुलिस अफसरों और कर्मियों की जो लिस्ट तैयार की थी, उसके बारे में एसपी शशांक आनंद ने बताया कि वह लिस्ट मिलने पर 14 मार्च को 83 पुलिस वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चुके हैं। लेकिन प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ऐसे अफसरों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
डीआईजी सौरभ सिंह ने दीवार कूदकर बचाई जान
आरक्षण आंदोलन के दौरान दंगाइयों ने पुलिस अधिकारियों तक को मारने का प्रयास किया और जहां वह ठहरे थे, वहां आग लगा दी। मंगलवार को सार्वजनिक की गई प्रकाश सिंह कमेटी की जांच रिपोर्ट में आईजी और डीआईजी के बयानों से यह साफ हुआ है। दोनों ही आला अधिकारियों ने किसी तरह भाग कर दंगाइयों से अपनी जान बचाई। प्रकाश सिंह कमेटी के सामने तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव और डीआईजी सौरभ सिंह ने बयान दर्ज कराया है, जिसमें दंगाइयों के आतंक को बयां किया गया है। आईजी श्रीकांत जाधव ने अपने बयान में कहा है कि 19 फरवरी को डीआईजी सौरभ सिंह दिल्ली बाईपास पर सर्किट हाउस में मौजूद थे। उसी समय सैकड़ों दंगाई वहां घुस गए और डीआईजी पर हमला करना चाहा। लेकिन आईजी आवास व कार्यालय की दीवार सर्किट हाउस से मिली होने के कारण डीआईजी सौरभ सिंह को दीवार पार कराकर बचाया गया। जिसके बाद दंगाइयों ने सर्किट हाउस में आग लगा दी। डीआईजी सौरभ सिंह ने भी अपने बयान में यही कहा है कि दंगाई सर्किट हाउस में हमला करने के लिए घुस गए तो वह दीवार कूदकर आईजी आवास पहुंचे।
आईजी ने अपने घर तैनात कर दी पुलिस, लुटता रहा शहर
प्रकाश सिंह कमेटी के सामने दिए बयान में डीसी डीके बेहेरा ने आईजी श्रीकांत जाधव पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 19 फरवरी को आईजी ने अधिकतर पुलिस वालों को अपने आवास पर तैनात कर दिया और शहर में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ काफी कम पुलिस रह गई। ऐसे हालात में दंगाई शहर में लूटपाट और आगजनी करते रहे और कम पुलिस के साथ उनको काबू कर पाना मुश्किल था। वहीं, डीआईजी सौरभ सिंह ने डीसी डीके बेहेरा को घेरा है। सौरभ ने कहा है कि डीसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी मजिस्ट्रेट को उनकी जिम्मेदारी तक नहीं बताई। ना ड्यूटी मजिस्ट्रेट किसी भी जगह आये और डीसी भी खुद कहीं दिखाई नहीं दिये। प्रकाश सिंह कमेटी के सामने अधिकारियों ने इस तरह एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए हैं और दंगे में आपसी कार्यप्रणाली की कलई खोली है।