{"_id":"5744c5904f1c1ba22c691201","slug":"rohtak-health-health-department-madical-store-rad-haryana-rohtak","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिविल सर्जन की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मेडिकल स्टोरों पर मार छापा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सिविल सर्जन की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मेडिकल स्टोरों पर मार छापा
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 25 May 2016 02:50 AM IST
विज्ञापन
भ्रूणहत्या की दवा बेचते धरे गए चार मेडिकल स्टोर वाले
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में बिना अनुमति धड़ल्ले से बेची जा रही मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) किट की शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिविल सर्जन डॉ. दीप जाखड़ की अगुवाई में कई मेडिकल स्टोरों पर छापामारी की। इस दौरान चार मेडिकल स्टोरों से भारी मात्रा में एमटीपी किट्स मिली हैं। एक मेडिकल स्टोर के गोदाम से भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं भी मिली हैं। चारों मेडिकल स्टोरों को सील कर करके आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है। इनके खिलाफ नारकोटिक्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि कन्याभ्रूण हत्या रोकने के लिए जिला औषधि नियंत्रक की ओर से दवा विक्रेताओं को चेतावनी दी गई है कि वह बिना इजाजत एमटीपी किट नहीं बेचेंगे। यह भी तय किया गया है कि केवल अस्पतालों में ही एमटीपी किट मिलेंगी। लेकिन मुनाफे के लालच में दवा विक्रेता अवैध तरीके से किट को बेचने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसका इस्तेमाल गर्भपात के लिए किया जाता है। गुपचुप तरीके से अधिकतर लोग कन्याभ्रूण हत्या के लिए इसका प्रयोग करते हैं। सिविल सर्जन का कहना है कि उनका छापेमारी अभियान आगे भी जारी रहेगा। वहीं, जिले की चार केमिस्ट शॉप पर छापामारी से मेडिकल स्टोर संचालकों में हड़कंप मच गया। कई केमिस्ट शॉपों के मालिकों को जब इसकी सूचना मिली तो वे समय से पहले ही दुकान बंद कर चले गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम में सिविल सर्जन के अलावा डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. केएल मलिक, डॉ. रणबीर सिंह, जिला ड्रग कंट्रोलर विजय राजे, दीपक, विकास और राजबीर शामिल थे।
रतन मेडिकल हॉल : बीस मिनट में उपलब्ध करा दी एमटीपी
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने पहली रेड शीला बाईपास स्थित रतन मेडिकल हॉल पर की। छापेमारी से पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक युवक को ग्राहक बनाकर मेडिकल हॉल पर भेजा तो दुकानदार ने करीब 20 मिनट में एमटीपी किट सौंप दी। दुकान पर जब स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो वहां दीपेंद्र नामक युवक मौजूद था। युवक द्वारा दिए गए किट के पैसे भी टीम ने बरामद कर लिए। कागजी कार्रवाई के बाद दुकान को सील कर दिया गया।
विज्ञापन
केवीएम मेडिकोज : सोडा शॉप से मिली 22 किट
स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा बाजार स्थित अतुल मेडिकोज के पास अपने एक युवक को भेजा और फोन पर एमटीपी किट के लिए संपर्क किया। यहां भीम नामक युवक ने बताया कि एमटीपी किट सोडा शॉप पर मिलेगी। जब सोडा शॉप पर संपर्क किया गया तो यहां से किट मिली गई। टीम ने फिर भीम को मौके पर बुलवाया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब भीम से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह केवीएम मेडिकोज से एमटीपी किट लाता है। जब केवीएम मेडिकोज पर छापा मारा गया तो वहां 22 किट मिली। टीम ने केवीएम दुकान के संचालक कीर्ति मलिक की शॉप सील कर मामला दर्ज करते हुए पुलिस को सौंप दिया है। अतुल मेडिकोज जांच के दौरान बंद थी, पता चला कि भीम वहां कार्य करता है।
कलानौर : बाइक से कर दी सप्लाई
कलानौर में एमटीपी किट की होम डिलीवरी होने का खुलासा हुआ है। सिविल सर्जन ने बताया कि विभाग के कर्मचारी योगेश ने एक युवक को फोन कर एमटीपी किट मांगी तो वह मोटरसाइकिल पर जिंदराण मोड़ पर देने आ गया। जब टीम ने उसे धरा तो वह हाथ छुड़ाकर भाग गया। हमारे पास उसकी बगैर नंबर की बाइक है और फोन पर बातचीत की रिकार्डिंग है। जल्द ही पुलिस उसे हिरासत में लेगी। गौरतलब है कि तीनों स्थानों पर देर रात तक छापामारी जारी रही। स्वास्थ्य विभाग की टीम में डॉ. संजीव मलिक, डॉ. शैलेंद्र डोगरा, सुरेश कक्कड़, एएसआई राम निवास, एएसआई गुलाब सिंह, योगेश हुड्डा शामिल थे।
गांधी कैंप : एमटीपी किट के साथ प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा मिला
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने देर रात जवाहर नगर स्थित एक मेडिकल स्टोर के गोदाम पर छापामारी की। यहां रमेश के घर से करीब 22 एमटीपी किट और भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं मिली हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी दवाओं को जब्त कर लिया है। यहां देर रात तक कार्रवाई जारी रही।
बोली सिविल सर्जन
हमारे पास सूचना थी कि शहर में धड़ल्ले से एमटीपी किट बिक रही है। महिलाओं के स्वास्थ्य को देखते हुए छापामारी की गई। इस किट को बगैर डॉक्टर की अनुमति के प्रयोग नहीं किया जा सकता है। इसके लिए महिला को अस्पताल में दाखिल होना जरूरी होता है। इससे गर्भ गिराने के दौरान महिला की जान को खतरा रहता है। विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसे दिया जा सकता है। इसके लिए तीन से सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
- डॉ. दीपा जाखड़, सिविल सर्जन
एमटीपी किट बेचने में मोटी कमाई
एमटीपी किट की बाजार में करीब पांच सौ रुपये बताई जाती है। रिटेलर को होलसेलर इसे करीब पौने चार सौ में देता है लेकिन इसके साथ कंपनी पांच किट मुफ्त देने का आफर देती हैं। जिसकी वजह से बेचने वालों को भारी मुनाफा हो जाता है। प्रतिबंधित होने की वजह से बेचने वाले ग्राहक से इसकी मनमानी कीमत भी वसूलते हैं।
नाबालिग को देना अपराध
एमटीपी में लिखा है कि 18 साल या उससे कम उम्र की किशोरी का उसके अभिभावक की सहमति के बिना गर्भपात नहीं किया जा सकता।
क्या है एमटीपी एक्ट
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट साल 1971 में बना था। इसके तहत 20 हफ्ते तक के गर्भपात की इजाजत दी गई है। चार वजहों में एमटीपी को मान्य किया गया है।
- जब महिला को कोई गंभीर रोग हो जाए और और गर्भ रखने से उसकी जान को खतरा हो
- जब गर्भधारण करने की वजह से गर्भस्थ शिशु को जान या अपंगता का खतरा हो जाए
- जब बलात्कार के के कारण महिला गर्भवती हो गई हो
- गर्भ निरोधक की असफलता के कारण यदि गर्भधारण हो गया हो
यहां से मिल सकती है एमटीपी किट
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 34 अस्पतालों को एमटीपी किट की बिक्री के लिए अधिकृत किया है। इनमें पीजीआई सिविल अस्पताल सहित कलानौर, महम, सांपला, चिड़ी, किलोई के सीएचसी के अलावा 27 निजी अस्पताल और नर्सिंग क्लिनिक शामिल हैं। नियमों के मुताबिक एमडी गायनी डॉक्टर की देखरेख में ही एमटीपी किट का प्रयोग किया जा सकता है।
विज्ञापन
बता दें कि कन्याभ्रूण हत्या रोकने के लिए जिला औषधि नियंत्रक की ओर से दवा विक्रेताओं को चेतावनी दी गई है कि वह बिना इजाजत एमटीपी किट नहीं बेचेंगे। यह भी तय किया गया है कि केवल अस्पतालों में ही एमटीपी किट मिलेंगी। लेकिन मुनाफे के लालच में दवा विक्रेता अवैध तरीके से किट को बेचने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसका इस्तेमाल गर्भपात के लिए किया जाता है। गुपचुप तरीके से अधिकतर लोग कन्याभ्रूण हत्या के लिए इसका प्रयोग करते हैं। सिविल सर्जन का कहना है कि उनका छापेमारी अभियान आगे भी जारी रहेगा। वहीं, जिले की चार केमिस्ट शॉप पर छापामारी से मेडिकल स्टोर संचालकों में हड़कंप मच गया। कई केमिस्ट शॉपों के मालिकों को जब इसकी सूचना मिली तो वे समय से पहले ही दुकान बंद कर चले गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम में सिविल सर्जन के अलावा डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. केएल मलिक, डॉ. रणबीर सिंह, जिला ड्रग कंट्रोलर विजय राजे, दीपक, विकास और राजबीर शामिल थे।
विज्ञापन
रतन मेडिकल हॉल : बीस मिनट में उपलब्ध करा दी एमटीपी
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने पहली रेड शीला बाईपास स्थित रतन मेडिकल हॉल पर की। छापेमारी से पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक युवक को ग्राहक बनाकर मेडिकल हॉल पर भेजा तो दुकानदार ने करीब 20 मिनट में एमटीपी किट सौंप दी। दुकान पर जब स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो वहां दीपेंद्र नामक युवक मौजूद था। युवक द्वारा दिए गए किट के पैसे भी टीम ने बरामद कर लिए। कागजी कार्रवाई के बाद दुकान को सील कर दिया गया।
विज्ञापन
केवीएम मेडिकोज : सोडा शॉप से मिली 22 किट
स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा बाजार स्थित अतुल मेडिकोज के पास अपने एक युवक को भेजा और फोन पर एमटीपी किट के लिए संपर्क किया। यहां भीम नामक युवक ने बताया कि एमटीपी किट सोडा शॉप पर मिलेगी। जब सोडा शॉप पर संपर्क किया गया तो यहां से किट मिली गई। टीम ने फिर भीम को मौके पर बुलवाया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब भीम से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह केवीएम मेडिकोज से एमटीपी किट लाता है। जब केवीएम मेडिकोज पर छापा मारा गया तो वहां 22 किट मिली। टीम ने केवीएम दुकान के संचालक कीर्ति मलिक की शॉप सील कर मामला दर्ज करते हुए पुलिस को सौंप दिया है। अतुल मेडिकोज जांच के दौरान बंद थी, पता चला कि भीम वहां कार्य करता है।
कलानौर : बाइक से कर दी सप्लाई
कलानौर में एमटीपी किट की होम डिलीवरी होने का खुलासा हुआ है। सिविल सर्जन ने बताया कि विभाग के कर्मचारी योगेश ने एक युवक को फोन कर एमटीपी किट मांगी तो वह मोटरसाइकिल पर जिंदराण मोड़ पर देने आ गया। जब टीम ने उसे धरा तो वह हाथ छुड़ाकर भाग गया। हमारे पास उसकी बगैर नंबर की बाइक है और फोन पर बातचीत की रिकार्डिंग है। जल्द ही पुलिस उसे हिरासत में लेगी। गौरतलब है कि तीनों स्थानों पर देर रात तक छापामारी जारी रही। स्वास्थ्य विभाग की टीम में डॉ. संजीव मलिक, डॉ. शैलेंद्र डोगरा, सुरेश कक्कड़, एएसआई राम निवास, एएसआई गुलाब सिंह, योगेश हुड्डा शामिल थे।
गांधी कैंप : एमटीपी किट के साथ प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा मिला
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने देर रात जवाहर नगर स्थित एक मेडिकल स्टोर के गोदाम पर छापामारी की। यहां रमेश के घर से करीब 22 एमटीपी किट और भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं मिली हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी दवाओं को जब्त कर लिया है। यहां देर रात तक कार्रवाई जारी रही।
बोली सिविल सर्जन
हमारे पास सूचना थी कि शहर में धड़ल्ले से एमटीपी किट बिक रही है। महिलाओं के स्वास्थ्य को देखते हुए छापामारी की गई। इस किट को बगैर डॉक्टर की अनुमति के प्रयोग नहीं किया जा सकता है। इसके लिए महिला को अस्पताल में दाखिल होना जरूरी होता है। इससे गर्भ गिराने के दौरान महिला की जान को खतरा रहता है। विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसे दिया जा सकता है। इसके लिए तीन से सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
- डॉ. दीपा जाखड़, सिविल सर्जन
एमटीपी किट बेचने में मोटी कमाई
एमटीपी किट की बाजार में करीब पांच सौ रुपये बताई जाती है। रिटेलर को होलसेलर इसे करीब पौने चार सौ में देता है लेकिन इसके साथ कंपनी पांच किट मुफ्त देने का आफर देती हैं। जिसकी वजह से बेचने वालों को भारी मुनाफा हो जाता है। प्रतिबंधित होने की वजह से बेचने वाले ग्राहक से इसकी मनमानी कीमत भी वसूलते हैं।
नाबालिग को देना अपराध
एमटीपी में लिखा है कि 18 साल या उससे कम उम्र की किशोरी का उसके अभिभावक की सहमति के बिना गर्भपात नहीं किया जा सकता।
क्या है एमटीपी एक्ट
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट साल 1971 में बना था। इसके तहत 20 हफ्ते तक के गर्भपात की इजाजत दी गई है। चार वजहों में एमटीपी को मान्य किया गया है।
- जब महिला को कोई गंभीर रोग हो जाए और और गर्भ रखने से उसकी जान को खतरा हो
- जब गर्भधारण करने की वजह से गर्भस्थ शिशु को जान या अपंगता का खतरा हो जाए
- जब बलात्कार के के कारण महिला गर्भवती हो गई हो
- गर्भ निरोधक की असफलता के कारण यदि गर्भधारण हो गया हो
यहां से मिल सकती है एमटीपी किट
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 34 अस्पतालों को एमटीपी किट की बिक्री के लिए अधिकृत किया है। इनमें पीजीआई सिविल अस्पताल सहित कलानौर, महम, सांपला, चिड़ी, किलोई के सीएचसी के अलावा 27 निजी अस्पताल और नर्सिंग क्लिनिक शामिल हैं। नियमों के मुताबिक एमडी गायनी डॉक्टर की देखरेख में ही एमटीपी किट का प्रयोग किया जा सकता है।