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फर्जी दस्तावेज से 3 साल तक की लाइनमैन की नौकरी, अब केस दर्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 15 Jan 2016 02:32 AM IST
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बिजली निगम में फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने वाले चार सहायक लाइनमैन
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पर केस दर्ज कर लिया गया है। नौकरी करने के बाद विभाग ने जब दस्तावेजों की
जांच कराई तो मामले का खुलासा हुआ। निगम ने चारों लाइनमैन के खिलाफ पीजीआई
थाने में शिकायत दी।
पीजीआई थाना पुलिस ने बिजली निगम के एक्सईएन धर्मबीर चिकारा के बयान पर महम के मोखरा निवासी सुधीर, भिवानी के बडेसरा निवासी कुलदीप सिंह, निगाणा के प्रवीन और भैणी महाराजपुर निवासी राजेश के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया।
जांच अधिकारी एएसआई रोहताश ने बताया कि आरोपी सुधीर ने वर्ष 2009 में वाराणसी स्थित करौंदी आईटीआई संस्थान के नाम से इलेक्ट्रिशियन ग्रेड में आईटीआई का फर्जी तरीके से डिप्लोमा तैयार करवाया था। इसी दस्तावेज से सुधीर ने 28 अक्तूबर 2012 में बिजली निगम में सहायक लाइनमैन के पद पर नौकरी ज्वॉइन कर ली।
जब सुधीर के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराया गया तो पता चला कि वाराणसी संस्थान में सुधीर के दस्तोवजों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। साथ ही विभाग की तरफ से तीन अन्य आरोपियोें के दस्तावेज भी फर्जी निकले। विभाग ने पहले ही चारों आरोपियों को नौकरी से निकालकर विभागीय जांच शुरू कर दी थी।
अब जांच में दोषी पाए जाने के बाद चारों के खिलाफ पीजीआई थाने में शिकायत दी गई। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अभी दोषियों की गिरफ्तारी नहीं की गई।
दस्तावेज तैयार करने वाले पर भी होगी कार्रवाई
पुलिस की मानें तो आरोपियों ने दस्तावेज कहां से बनवाएं हैं, इसकी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। करीब दो महीने पहले भी बिजली निगम की तरफ से फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी करने वाले दो आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी गई थी। फिर उन दोनों पर केस दर्ज किया गया था।
पीजीआई थाना पुलिस ने बिजली निगम के एक्सईएन धर्मबीर चिकारा के बयान पर महम के मोखरा निवासी सुधीर, भिवानी के बडेसरा निवासी कुलदीप सिंह, निगाणा के प्रवीन और भैणी महाराजपुर निवासी राजेश के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया।
जांच अधिकारी एएसआई रोहताश ने बताया कि आरोपी सुधीर ने वर्ष 2009 में वाराणसी स्थित करौंदी आईटीआई संस्थान के नाम से इलेक्ट्रिशियन ग्रेड में आईटीआई का फर्जी तरीके से डिप्लोमा तैयार करवाया था। इसी दस्तावेज से सुधीर ने 28 अक्तूबर 2012 में बिजली निगम में सहायक लाइनमैन के पद पर नौकरी ज्वॉइन कर ली।
जब सुधीर के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराया गया तो पता चला कि वाराणसी संस्थान में सुधीर के दस्तोवजों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। साथ ही विभाग की तरफ से तीन अन्य आरोपियोें के दस्तावेज भी फर्जी निकले। विभाग ने पहले ही चारों आरोपियों को नौकरी से निकालकर विभागीय जांच शुरू कर दी थी।
अब जांच में दोषी पाए जाने के बाद चारों के खिलाफ पीजीआई थाने में शिकायत दी गई। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अभी दोषियों की गिरफ्तारी नहीं की गई।
दस्तावेज तैयार करने वाले पर भी होगी कार्रवाई
पुलिस की मानें तो आरोपियों ने दस्तावेज कहां से बनवाएं हैं, इसकी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। करीब दो महीने पहले भी बिजली निगम की तरफ से फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी करने वाले दो आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी गई थी। फिर उन दोनों पर केस दर्ज किया गया था।