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मैं अपने जीवन से ऊब चुका हूं, इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 22 Aug 2016 02:21 AM IST
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आत्महत्या
- फोटो : Getty
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राजेश पूनिया ने मेरा जीवन बर्बाद कर दिया। वह मेरे और मेरी भांजी दर्शना के प्लाट दिलवाने के नाम पर लाखों रुपये खा गया। अब मैं अपनी भांजी को भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहा। मैं अपने जीवन से ऊब चुका हूं। अपनी बर्बादी और ऊपर से भांजी के प्लॉट की बदनामी पचा नहीं पा रहा हूं। मेरी जीने की इच्छा खत्म हो गई है। मैं कानून और आपसे अपनी भांजी का प्लाट दिलाने के लिए सुसाइड नोट लिख रहा हूं। परिवार को संभालने की सारी जिम्मेदारी आपके ऊपर छोड़ रहा हूं। आप सब से हाथ जोड़कर माफी मांग रहा हूं। विजेंद्र को मैं कैसे मुंह दिखाऊं। मेरा प्यार आप सब को। दुख बर्दाश्त करने की भगवान से प्रर्थाना करता हूं। इस सुसाइड नोट के साथ मकड़ौली कलां निवासी 50 वर्षीय भूपसिंह ने जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली।
मकड़ौली कलां निवासी अमित कुमार ने बताया कि उनके पिता भूपसिंह डीटीसी में चालक के पद से सेवानिवृत्त हैं। यहां से रिटायर होने के बाद उन्होंने प्रॉपर्टी का काम शुरू किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात जींद के बुड्ढा खेड़ा निवासी राजेश पूनिया से हुई। पूनिया राजेंद्र नगर में मकान बनाकर रहता था। अमित ने बताया कि राजेश पूनिया ने उनके पिता से सुखपुरा चौक से जींद बाईपास स्थित पेट्रोल पंप के सामने 400 गज के प्लाट का जिक्र किया। राजेश ने भूपसिंह से कहा कि यह प्लाट उसका है और 51 लाख रुपये में बेचना चाहता है। भूपसिंह ने रुपयों का इंतजाम करने के लिए पहले तो राजेंद्र नगर वाला प्लाट बेच दिया।
इसके बाद अपनी रिटायरमेंट और रिश्तेदारों से मदद मांगकर 51 लाख रुपये का इंतजाम किया। रुपये देने के बाद भी काफी दिनों तक पूनिया ने न तो प्लाट की रजिस्ट्री करवाई और न ही कब्जा दिया। बाद में पता चला कि यह प्लाट भी राजेश का नहीं है। अब भूपसिंह ने उससे रुपये वापस मांगने शुरू कर दिए। पहले तो वह रुपये देने में टालमटोल करता रहा और बाद में इनकार कर दिया। रुपये नहीं मिलने के कारण तनाव में आने से भूपसिंह ने 18 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन जहरीला पदार्थ निगल लिया। तबियत खराब होने पर उन्हें पीजीआई लाया गया। 19 अगस्त को उपचार के दौरान भूपसिंह ने दम तोड़ दिया। भूपसिंह के दो बेटे और एक बेटी हैं। उनका बेटा अमित गुड़गांव के मानेसर स्थित सरकारी पालिटेक्निक कॉलेज में क्लर्क है।
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रुपये मांगने घर पहुंचा तो धक्के मारकर बाहर निकाला
अमित का कहना है कि उनके पिता रक्षाबंधन के दिन राजेश पूनिया के राजेंद्र नगर स्थित घर पर गये थे। लेकिन राजेश ने इनकार कर दिया। आरोप है कि भूपसिंह ने दोबारा रुपये मांगे तो उसे घर से धक्के देकर बाहर निकाल दिया। इस अपमान को भूपसिंह सहन नहीं कर सके। उन्होंने घर आते ही जहरीला पदार्थ निगल लिया। शहर थाना पुलिस ने बेटे अमित की शिकायत पर राजेश पूनिया के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया है। जांच अधिकारी अशोक का कहना है कि आरोपी की तलाश की जा रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार किया जाएगा।
एएसआई से भी हड़पी रकम
मृतक के परिवार ने राजेश पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अमित कुमार का कहना है कि उनके जीजा विजेंद्र सिंह दिल्ली पुलिस में एएसआई हैं। उन्होंने भी राजेश को प्लॉट खरीदने के लिए छह लाख 40 हजार रुपये दिए थे। लेकिन उनको भी आज तक कोई प्लाट नहीं दिलवाया। जब विजेंद्र ने रुपये मांगे तो उसे भी रुपये देने से इनकार कर दिया। फिलहाल आरोपी घर से फरार है।
3 साल किराये पर रहे फिर लौटे गांव
करीब 8 साल तक प्लाट मिलने का इंतजार करने के दौरान भूपसिंह का परिवार तीन साल तक शहर में किराये के मकान में रहा। परिवार ने सोचा था कि प्लाट मिलने के बाद घर बनाएंगे। लेकिन जब किराये पर रहते हुए और प्लाट खरीदने के चक्कर में सारे रुपये खर्च हो गये तो परिवार को वापस गांव आना पड़ा।
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मकड़ौली कलां निवासी अमित कुमार ने बताया कि उनके पिता भूपसिंह डीटीसी में चालक के पद से सेवानिवृत्त हैं। यहां से रिटायर होने के बाद उन्होंने प्रॉपर्टी का काम शुरू किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात जींद के बुड्ढा खेड़ा निवासी राजेश पूनिया से हुई। पूनिया राजेंद्र नगर में मकान बनाकर रहता था। अमित ने बताया कि राजेश पूनिया ने उनके पिता से सुखपुरा चौक से जींद बाईपास स्थित पेट्रोल पंप के सामने 400 गज के प्लाट का जिक्र किया। राजेश ने भूपसिंह से कहा कि यह प्लाट उसका है और 51 लाख रुपये में बेचना चाहता है। भूपसिंह ने रुपयों का इंतजाम करने के लिए पहले तो राजेंद्र नगर वाला प्लाट बेच दिया।
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इसके बाद अपनी रिटायरमेंट और रिश्तेदारों से मदद मांगकर 51 लाख रुपये का इंतजाम किया। रुपये देने के बाद भी काफी दिनों तक पूनिया ने न तो प्लाट की रजिस्ट्री करवाई और न ही कब्जा दिया। बाद में पता चला कि यह प्लाट भी राजेश का नहीं है। अब भूपसिंह ने उससे रुपये वापस मांगने शुरू कर दिए। पहले तो वह रुपये देने में टालमटोल करता रहा और बाद में इनकार कर दिया। रुपये नहीं मिलने के कारण तनाव में आने से भूपसिंह ने 18 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन जहरीला पदार्थ निगल लिया। तबियत खराब होने पर उन्हें पीजीआई लाया गया। 19 अगस्त को उपचार के दौरान भूपसिंह ने दम तोड़ दिया। भूपसिंह के दो बेटे और एक बेटी हैं। उनका बेटा अमित गुड़गांव के मानेसर स्थित सरकारी पालिटेक्निक कॉलेज में क्लर्क है।
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रुपये मांगने घर पहुंचा तो धक्के मारकर बाहर निकाला
अमित का कहना है कि उनके पिता रक्षाबंधन के दिन राजेश पूनिया के राजेंद्र नगर स्थित घर पर गये थे। लेकिन राजेश ने इनकार कर दिया। आरोप है कि भूपसिंह ने दोबारा रुपये मांगे तो उसे घर से धक्के देकर बाहर निकाल दिया। इस अपमान को भूपसिंह सहन नहीं कर सके। उन्होंने घर आते ही जहरीला पदार्थ निगल लिया। शहर थाना पुलिस ने बेटे अमित की शिकायत पर राजेश पूनिया के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया है। जांच अधिकारी अशोक का कहना है कि आरोपी की तलाश की जा रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार किया जाएगा।
एएसआई से भी हड़पी रकम
मृतक के परिवार ने राजेश पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अमित कुमार का कहना है कि उनके जीजा विजेंद्र सिंह दिल्ली पुलिस में एएसआई हैं। उन्होंने भी राजेश को प्लॉट खरीदने के लिए छह लाख 40 हजार रुपये दिए थे। लेकिन उनको भी आज तक कोई प्लाट नहीं दिलवाया। जब विजेंद्र ने रुपये मांगे तो उसे भी रुपये देने से इनकार कर दिया। फिलहाल आरोपी घर से फरार है।
3 साल किराये पर रहे फिर लौटे गांव
करीब 8 साल तक प्लाट मिलने का इंतजार करने के दौरान भूपसिंह का परिवार तीन साल तक शहर में किराये के मकान में रहा। परिवार ने सोचा था कि प्लाट मिलने के बाद घर बनाएंगे। लेकिन जब किराये पर रहते हुए और प्लाट खरीदने के चक्कर में सारे रुपये खर्च हो गये तो परिवार को वापस गांव आना पड़ा।