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गरनावठी ऑनर किलिंग मामला, बेटी पर नहीं की दया, अपने लिए मांगा रहम
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 11 Aug 2016 02:08 AM IST
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लड़की और उसके प्रेमी की हत्या करने वालों ने अदालत से सजा में मांगी रियायत
- फोटो : amar ujala
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अपनी बेटी पर रहम नहीं करने वाले मां-बाप और भाई कोर्ट से अपने लिए रहम की गुहार लगा रहे थे। सजा सुनाने से पहले कोर्ट से दोषियों ने कहा कि उनके घर में कोई भी कमाने वाला नहीं है। इसलिए पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सजा में रियायत बरती जाए। यही नहीं दोषियों ने यह दलील भी दी कि उन्होंने पहली बार कोई अपराध किया है। इससे पहले उनका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। कोर्ट ने दोषियों की अपील सुनने के बाद सजा सुनाई। सरकारी वकील ने इन बातों की पुष्टि की है।
सजा पर बहस में दोनों पक्षों की दलील
आरोपी पक्ष के वकील का तर्क
कोर्ट में सजा पर बहस के दौरान आरोपी पक्ष के वकील जेके गक्खड़ ने दलील दी कि दोषियों के परिवार में कोई भी कमाने वाला और जमीन की देखभाल करने वाला नहीं है। आरोपी का एक भाई अंधा है। उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। इसलिए इन्हें कम से कम सजा दी जाए।
सरकारी वकील का तर्क
सजा पर बहस के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि तीनों ने बहुत जघन्य अपराध किया है। अपराध करने के बाद दोषियों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए लड़की के शव को जलाने का प्रयास किया। साथ ही लड़के के सिर को धड़ से अलग कर दहशत फै लाने के लिए उसके घर के बाहर रख दिया था। इसलिए इन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
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लड़का पक्ष के परिजन रहे नदारद
तीनों दोषियों के परिजन सुबह ही कोर्ट पहुंच गये थे। जब तक तीनों को सजा सुनाई गई उनके परिजन वहीं रहे। लेकिन लड़का पक्ष के परिजनों ने दूरी बनाए रखी। लड़का पक्ष का एक भी परिजन सुनवाई के दौरान कोर्ट नहीं पहुंचा। सभी गांव में ही थे। पुलिस दोपहर करीब 12 बजे तीनों दोषियों को लेकर कोर्ट पहुंची थी। जब पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया तो उनके चेहरे पर कोई शिकन नजर नहीं आ रही थी।
पिता ने मीडिया पर उतारी खीज
कोर्ट में लाया गया दोषियों में शामिल लड़की का पिता काफी गुस्से में नजर आया। उसने अपनी खीज मीडिया कर्मियों पर उतारी। एक बार तो उसने एक टीवी पत्रकार को कस्टडी में लात मारने की कोशिश की। जब फोटो पत्रकारों ने उसकी फोटो ली तो उनके साथ भी बहस की। हालांकि पुलिस ने मामला संभाल लिया। परिजनों ने मीडिया की कवरेज का भी विरोध किया।
इन दलीलों पर हाईकोर्ट पहुंचेगा आरोपी पक्ष
सजा होने के बाद आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में कई बिंदुओं पर तैयारी की जा रही है। आरोपी पक्ष के वकील जेके गक्खड़ के अनुसार इन बिंदुओं पर मिलेगी चुनौती
- अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि चिता से मिली हड्डियां युवती निधि की थी या किसी अन्य की। क्योंकि पुलिस ने हड्डियों का डीएनए टेस्ट नहीं कराया था। ऐसे में युवती के मर्डर की बात पर सवाल उठते हैं।
- पुलिस ने किसी से भी लड़की की शिनाख्त नहीं कराई थी।
- अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि युवती पर किस हथियार से हमला किया गया। युवती को कौन कौन सी चोट मारी गई। इसका भी खुलासा नहीं हो सका है। इन्हीं सभी बिंदुओं को हाईकोर्ट के सामने रखा जाएगा।
इसलिए बरी हुए चाचा, चालक और पंच
चाचा रविन्द्र
- पुलिस ने वारदात के समय चाचा रविन्द्र को भी वारदात में शामिल बताया था। पुलिस का कहना था कि रविन्द्र ने भी युवती पर हमला किया था। पुलिस ने रविन्द्र से एक हथियार की बरामदगी भी दिखाई थी।
- कोर्ट में रविन्द्र के बारे में 100 प्रतिशत दृष्टिहीन होने का प्रमाण पत्र पेश किया गया। इस पर सीएमओ की अनुमति है। वकील जेके गक्खड़ ने कहा कि जो आदमी देख नहीं सकता वह किसी का मर्डर कैसे कर सकता है। रविन्द्र प्रदेश सरकार से दृष्टिहीन होने के कारण पेंशन भी लेता है। दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने रविन्द्र को बरी कर दिया।
चालक महेश
- पुलिस ने दावा किया था कि चालक महेश प्रेमी युगल को बहादुरगढ़ से गाड़ी में बैठाकर लाया था। इस गाड़ी में लड़के के साथ मारपीट की गई थी। महेश को साजिश में शामिल बताया गया था।
- कोर्ट में संबंधित गाड़ी के मालिक ने दलील दी थी कि उसने कभी भी महेश को अपनी गाड़ी दी ही नहीं। कोर्ट ने दलील सुनने के बाद महेश को केस से बरी किया।
पंच राजेश
- पुलिस ने चालान रिपोर्ट में शामिल किया था कि राजेश लड़की का शव खुर्द-बुर्द करने में शामिल था। हत्या के बाद वह लड़की के शव को जलाने पहुंचा था।
- लेकिन कोर्ट में पुलिस राजेश के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी। इस कारण कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
26 लोगों की हुई गवाही
मामले की सुनवाई के दौरान कुल 26 लोगों की गवाही हुई। इनमें अधिकतर पुलिस वाले शामिल थे। इस मामले में न तो लड़की पक्ष और न ही लड़के पक्ष की ओर से पुलिस में कोई शिकायत की गई थी। एएसआई सुरेश कुमार की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सुरेश कुमार की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है।
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सजा पर बहस में दोनों पक्षों की दलील
आरोपी पक्ष के वकील का तर्क
कोर्ट में सजा पर बहस के दौरान आरोपी पक्ष के वकील जेके गक्खड़ ने दलील दी कि दोषियों के परिवार में कोई भी कमाने वाला और जमीन की देखभाल करने वाला नहीं है। आरोपी का एक भाई अंधा है। उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। इसलिए इन्हें कम से कम सजा दी जाए।
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सरकारी वकील का तर्क
सजा पर बहस के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि तीनों ने बहुत जघन्य अपराध किया है। अपराध करने के बाद दोषियों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए लड़की के शव को जलाने का प्रयास किया। साथ ही लड़के के सिर को धड़ से अलग कर दहशत फै लाने के लिए उसके घर के बाहर रख दिया था। इसलिए इन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
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लड़का पक्ष के परिजन रहे नदारद
तीनों दोषियों के परिजन सुबह ही कोर्ट पहुंच गये थे। जब तक तीनों को सजा सुनाई गई उनके परिजन वहीं रहे। लेकिन लड़का पक्ष के परिजनों ने दूरी बनाए रखी। लड़का पक्ष का एक भी परिजन सुनवाई के दौरान कोर्ट नहीं पहुंचा। सभी गांव में ही थे। पुलिस दोपहर करीब 12 बजे तीनों दोषियों को लेकर कोर्ट पहुंची थी। जब पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया तो उनके चेहरे पर कोई शिकन नजर नहीं आ रही थी।
पिता ने मीडिया पर उतारी खीज
कोर्ट में लाया गया दोषियों में शामिल लड़की का पिता काफी गुस्से में नजर आया। उसने अपनी खीज मीडिया कर्मियों पर उतारी। एक बार तो उसने एक टीवी पत्रकार को कस्टडी में लात मारने की कोशिश की। जब फोटो पत्रकारों ने उसकी फोटो ली तो उनके साथ भी बहस की। हालांकि पुलिस ने मामला संभाल लिया। परिजनों ने मीडिया की कवरेज का भी विरोध किया।
इन दलीलों पर हाईकोर्ट पहुंचेगा आरोपी पक्ष
सजा होने के बाद आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में कई बिंदुओं पर तैयारी की जा रही है। आरोपी पक्ष के वकील जेके गक्खड़ के अनुसार इन बिंदुओं पर मिलेगी चुनौती
- अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि चिता से मिली हड्डियां युवती निधि की थी या किसी अन्य की। क्योंकि पुलिस ने हड्डियों का डीएनए टेस्ट नहीं कराया था। ऐसे में युवती के मर्डर की बात पर सवाल उठते हैं।
- पुलिस ने किसी से भी लड़की की शिनाख्त नहीं कराई थी।
- अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि युवती पर किस हथियार से हमला किया गया। युवती को कौन कौन सी चोट मारी गई। इसका भी खुलासा नहीं हो सका है। इन्हीं सभी बिंदुओं को हाईकोर्ट के सामने रखा जाएगा।
इसलिए बरी हुए चाचा, चालक और पंच
चाचा रविन्द्र
- पुलिस ने वारदात के समय चाचा रविन्द्र को भी वारदात में शामिल बताया था। पुलिस का कहना था कि रविन्द्र ने भी युवती पर हमला किया था। पुलिस ने रविन्द्र से एक हथियार की बरामदगी भी दिखाई थी।
- कोर्ट में रविन्द्र के बारे में 100 प्रतिशत दृष्टिहीन होने का प्रमाण पत्र पेश किया गया। इस पर सीएमओ की अनुमति है। वकील जेके गक्खड़ ने कहा कि जो आदमी देख नहीं सकता वह किसी का मर्डर कैसे कर सकता है। रविन्द्र प्रदेश सरकार से दृष्टिहीन होने के कारण पेंशन भी लेता है। दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने रविन्द्र को बरी कर दिया।
चालक महेश
- पुलिस ने दावा किया था कि चालक महेश प्रेमी युगल को बहादुरगढ़ से गाड़ी में बैठाकर लाया था। इस गाड़ी में लड़के के साथ मारपीट की गई थी। महेश को साजिश में शामिल बताया गया था।
- कोर्ट में संबंधित गाड़ी के मालिक ने दलील दी थी कि उसने कभी भी महेश को अपनी गाड़ी दी ही नहीं। कोर्ट ने दलील सुनने के बाद महेश को केस से बरी किया।
पंच राजेश
- पुलिस ने चालान रिपोर्ट में शामिल किया था कि राजेश लड़की का शव खुर्द-बुर्द करने में शामिल था। हत्या के बाद वह लड़की के शव को जलाने पहुंचा था।
- लेकिन कोर्ट में पुलिस राजेश के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी। इस कारण कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
26 लोगों की हुई गवाही
मामले की सुनवाई के दौरान कुल 26 लोगों की गवाही हुई। इनमें अधिकतर पुलिस वाले शामिल थे। इस मामले में न तो लड़की पक्ष और न ही लड़के पक्ष की ओर से पुलिस में कोई शिकायत की गई थी। एएसआई सुरेश कुमार की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सुरेश कुमार की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है।