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Rohtak PGI: सीएमओ की मुहर का गलत इस्तेमाल कर पत्र जारी करने का आरोप, एसएमओ के खिलाफ केस दर्ज
Wed, 24 Jul 2024 10:28 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Wed, 24 Jul 2024 10:28 PM IST
सार
पीजीआईएमएस के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग के रजिस्ट्रार को कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद संस्थान से बाहर किया गया है। जांच कमेटी बनाने वाले पीजीआई निदेशक समेत तीन चिकित्सकों पर शिकायतकर्ता ने षड्यंत्र रचने के आरोप लगाए हैं।
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डॉक्टर संदीप।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हरियाणा के रोहतक में पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) रोहतक के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के पूर्व रजिस्ट्रार कम डीएमएस डॉ. संदीप को संस्थान से बाहर करने के मामले में बुधवार को नया पेच सामने आया। पूर्व डीएमएस ने खुद पर हुई कार्रवाई के लिए आधार बनाए गए पत्र को फर्जी बताया है।
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पीजीआईएमएस थाना पुलिस ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के एसएमओ डॉ. दिनेश मलिक के खिलाफ सीएमओ की मुहर का गलत प्रयोग करने का केस दर्ज कराया है, साथ ही पूर्व डीएमएस ने फर्जी पत्र पर जांच कराने वाले पीजीआई निदेशक समेत तीन अन्य चिकित्सकों पर भी षड्यंत्र चरने का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोप है कि यह पत्र सीएमओ की मुहर का गलत इस्तेमाल करके जारी किया गया।
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डॉ. संदीप करीब डेढ़ साल पहले पीजीआईएमएस में बतौर डीएमएस जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग के रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी संभालते थे। इस पद से पीजीआईएमएस प्रशासन ने उन्हें मुक्त करते हुए उनके मूल स्वास्थ्य विभाग में वापस भेज दिया था।
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इसके लिए उन पर विभाग का डाटा समय पर सरकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की गई। मामले में डॉ. संदीप ने स्वास्थ्य महानिदेशक, अतिरिक्त महासचिव, लोकपाल व पुलिस विभाग के अधिकारियों को शिकायत देकर जांच की गुहार लगाई थी। इसमें उन पर हुई कार्रवाई के लिए बनाए गए आधार पत्र को फर्जी होने का दावा किया। पुलिस को प्रारंभिक जांच में यह पत्र फर्जी मिला।
पीजीआई निदेशक ने पत्र के आधार पर बैठाई थी जांच
डॉ. संदीप ने बुधवार शाम को पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया है कि सीएमओ की मुहर का गलत इस्तेमाल कर तैयार किया पत्र एसएमओ ने पीजीआई को भेजा। इसके आधार पर पीजीआई निदेशक ने जांच कमेटी गठित की। इस कमेटी ने पूर्व डीएमएस को इनके मूल विभाग में भेजने की सिफारिश की। इसके आधार पर उन्हें पीजीआई से बाहर कर दिया गया। इसके चलते पूर्व डीएमएस ने इस मामले में पीजीआई निदेशक समेत तीन अन्य चिकित्सकों पर भी इस षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया है। पुलिस व अन्य अधिकारियों को दी अपनी शिकायत में उनके नाम भी दिए हैं। यही नहीं, निदेशक पर अन्य कई आरोप भी लगाए गए हैं।
एक्सपर्ट व्यू...
पुलिस की प्रारंभिक जांच में फर्जी मिला पत्र
आईपीसी की धारा 167 के तहत किसी भी लोक सेवक की ओर से किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने की नीयत से झूठा व फर्जी दस्तावेज बनाना गैरकानूनी है। पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता डॉ. संदीप द्वारा दी गई शिकायत की प्रारंभिक जांच में डॉ. दिनेश की ओर से दिया गया पत्र फर्जी होने की बात सामने आई है। इसके चलते ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। - डॉ. दीपक भारद्वाज, अधिवक्ता व पूर्व सचिव, जिला बार एसाेसिएशन
डॉ. संदीप की शिकायत पर एसएमओ के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मामले में मिली शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - रवि खुुंडिया, डीएसपी हेडक्वार्टर
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मामले में पत्राचार पहले की तरह चल रहा है। एफआईआर दर्ज होने की कोई जानकारी नहीं है। हमारी तरफ से कोई गलत कदम नहीं उठाया गया है। जिस तरह का कागज आया था, उसी आधार पर कार्रवाई की गई। - डॉ. एसएस लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मामले में जारी पत्र सही है। आरोप गलत हैं। हमने अनावश्यक या षड्यंत्र की भावना से कार्य नहीं किया है। - डॉ. दिनेश मलिक, एसएमओ