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पिछड़ा वर्ग के पूर्व चेयरमैन सहित पांच को कोर्ट का नोटिस

Sat, 11 Mar 2017 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 11 Mar 2017 02:02 AM IST
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backward class exchairmen & five court notice
कोर्ट - फोटो : demo pic
जाट आरक्षण लागू करने के लिए एमडीयू के सर्वे में फर्जीवाड़े संबंधी मामले में शुक्रवार को अदालत में सुनवाई हुई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार गोयल की अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन सहित पांच लोगों को नोटिस जारी किया है। अब मामले में 30 मार्च को सुनवाई होगी।
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 चरखी दादरी के निमली निवासी शिकायतकर्ता वेदप्रकाश के वकील भारत जैन ने बताया कि अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग के तत्कालीन चेयरमैन पूर्व जज केसी गुप्ता, आयोग के सदस्य जयसिंह, राव रणपाल, सोमदत्त रोड़ और लीलाराम को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया हैं कि ‘क्यों न आपके खिलाफ केस दर्ज किया जाए’। मामले में अगली सुनवाई को बहस होगी।
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यह है मामला
वेदप्रकाश जांगड़ा ने अपनी याचिका में कहा है कि जाटों को आरक्षण देने के लिए तीन वर्ष पहले करवाया गया सर्वे फर्जी था। उन्होंने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन केसी गुप्ता, एमडीयू के पूर्व वीसी रामफल हुड्डा और एमडीयू के पूर्व प्रोफेसर खजान सिंह सांगवान पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। पिछड़ा वर्ग आयोग ने वर्ष 2012 में सेंटर फॉर रिसर्च इन रुरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एजेंसी को सर्वे का काम दिया था।
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एजेंसी को पता करना था कि आरक्षण के लिए जाट सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर हैं या नहीं? सर्वे में 40 लाख रुपये खर्च होने के बाद 31 मार्च 2012 को एजेंसी ने रिपोर्ट दी। वेदप्रकाश का कहना है कि सर्वे के इसी काम को 30 अप्रैल 2012 को एमडीयू को दिया गया, जिसने 60 लाख रुपये खर्च कर जुलाई 2012 में पूरा किया। एमडीयू की रिपोर्ट में जाटों को पिछड़ा बताया गया।


इस सर्वे के प्रोजेक्ट निदेशक एमडीयू के प्रोफेसर खजान सिंह सांगवान थे। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा में 24 जनवरी 2013 को जाट समेत सभी पांच जातियों को आरक्षण दिया गया। बाद में आरक्षण पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।
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