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चिकित्सक मामला: करंट से नही निमोनिया से हुई थी मोर की मौत

Fri, 10 Aug 2018 01:21 AM IST
Updated Fri, 10 Aug 2018 01:21 AM IST
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चिकित्सक मामला: करंट से नही निमोनिया से हुई थी मोर की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी। मोर की मौत और गोसेवक की ओर से ट्वीटर से मेनका गांधी और सीएम कार्यालय में दी शिकायत के बाद विवाद खड़ा हो गया है। गोसेवक ने अपनी शिकायत में एक चिकित्सा अधिकारी पर अभद्र व्यवहार और मोर की मौत का आरोप लगाया था। अब मोर के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ गई है और मोर की मौत करंट से नहीं बल्कि निमोनिया से हुई थी। गोसेवक ने रिपोर्ट को गलत बताया है। वहीं वीरवार को पशुपालन विभाग के चिकित्सक एकत्रित होकर एसपी कार्यालय पहुंचे और गोसेवक पर धक्का-मुक्की करने, अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की।
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार रात को हालुवास गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से एक मोर गंभीर रूप से घायल हो गया था। गोसेवकों ने डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग को फोन कर चिकित्सक की व्यवस्था करने की मांग की तो एक चिकित्सक को चिड़ियाघर भेजा गया। यहां गलत फहमी के कारण चिकित्सक चिड़ियाघर के दूसरे गेट पर रहा और गोसेवक मुख्य गेट पर खडे़ रहे। इसी दौरान मोर की मौत हो गई। चिकित्सक पर मोर की मौत का आरोप लगाते हुए गोसेवक संजय परमार ने मेनका गांधी और सीएम कार्यालय में ट्वीटर से शिकायत की।
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इसी मामले में बृहस्पतिवार को चिकित्सक पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचे। चिकित्सकों ने पुलिस अधीक्षक को बताया कि उपनिदेशक के फोन पर आदेश मिलने के बाद पशु चिकित्सक की ड्यूटी लगा दी गई थी। चिकित्सक गोसेवकों से पहले ही चिड़ियाघर पहुंच गया था। चिकित्सक के बारे में बताने के बावजूद गोसेवक कौन सा पशु चिकित्सक ड्यूटी देगा इसी बात पर जिद करने लगा। जब चिकित्सक वहां पहुंचा तो उक्त गोसेवक वहां पहले से ही खाली खड़ा था। करीब 10-15 मिनट बाद कुछ युवक मृत मोर को लेकर आए। इसी दौरान उक्त गोसेवक बेवजह एसडीओ से झगड़ा करने लगा और मोर की मौत के लिए जिम्मेवार ठहराने लगा। धक्का-मुक्की की और गाली-गलौच की गई। चिकित्सकों ने वहां से भाग कर अपनी जान बचाई। इसके अलावा भी उक्त गोसेवक अन्य पशुपालन विभाग के अधिकारियों से झगड़ा कर चुका है। उक्त गोसेवक के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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इस मौके पर संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. सुरेश सांगवान डॉ. तुलसीराम, डॉ. जयपाल, डॉ. संदीप, डॉ. विजय, डॉ. प्रदीप, डॉ. प्रवीण, डॉ. राजेश, डॉ. सोहनलाल, डॉ. जगबीर, डॉ. राजेश आदि उपस्थित रहे।

बिना डिग्री कर रहा शेड्यूल एच की दवाओं का प्रयोग
चिकित्सकों ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि शेड्यूल एच की दवाइयों का प्रयोग डिग्री धारक पशु चिकित्सक ही कर सकता है। बावजूद इसके उक्त व्यक्ति दवाइयों का प्रयोग कर रहा है। गोरक्षक के नाम पर पशुओं को अवैध तरीके से गायों को अपने घर रखे हुए है। अवैध तरीके से क्रूरता के साथ बांधे हुए हैं।

रिकॉर्डिंग में सब कुछ है, किसने कैसा व्यवहार किया
गोसेवक संजय परमार ने बताया कि फोन पर मेरे साथ चिकित्सक ने अभद्र व्यवहार किया है। फोन में रिकॉर्डिंग भी है जिसमें सब साफ है कि किसने अभद्र व्यवहार किया। चिड़ियाघर के सामने की भी रिकॉर्डिंग है। इसके अलावा मोर की करंट लगने से मौत हुई थी मगर अब बताया जा रहा है कि निमोनिया से हुई। वे दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं तो पता लगा कि मोर को जलाकर दफनाया गया है।


वर्जन:::
उनके व अन्य चिकित्सक के साथ गोसेवक संजय परमार ने अभद्र व्यवहार किया। मोर पहले से मरा हुआ था, फिर भी उनके ऊपर झूठे आरोप लगाए गए। हम पहले ही चिड़ियाघर पहुंच गए थे ताकि मोर को तुरंत उपचार दिया जा सके। इससे पहले भी उक्त गोसेवक पशु चिकित्सकों व अधिकारियों से अभद्र व्यवहार करता रहा है। इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
आरके वत्स, एसडीओ, पशुपालन विभाग






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