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पीजीआईएमएस आर्थों विभाग पर नहीं लगा पा रहा लगाम
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रोहतक। पीजीआईएमएस का ऑर्थो विभाग हमेशा से विवादों में रहा है। यहां अधिकांश जूनियर व सीनियर डॉक्टर मरीजों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। कैंपस में सरकार की ओर से मान्य अमृत स्टोर खुलने के बाद भी चहेते इम्प्लांट सप्लायरों से ही सामान मंगाने के लिए मरीजों को बाध्य कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार आर्थो विभाग में आने वाले मरीज के लिए जरूरी होता है कि वह अपने डॉक्टर की सभी बातों को मानें। तभी मरीज का डॉक्टर आपरेशन करते हैं, ऐसा न करने पर मरीज को आपरेशन की डेट ही नहीं दी जाती। शिकायतों पर सरकार ने संज्ञान लिया तो स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अमित झा ने कैंपस में सस्ते इम्प्लांट के लिए अमृत स्टोर तो खुलवा दिया, लेकिन यहां से इम्प्लांट मंगवाने के लिए डॉक्टरों को बाध्य कौन करे। डॉक्टर आज भी अपने सप्लायरों से सामान मंगाते हैं। मरीज यदि बाजार में इम्प्लांट की कीमत पता करता है तो समझ आता है कि उससे चार गुणा अधिक कीमत वसूल ली गई है। ऐसी ही शिकायत जनता कॉलोनी के विद्यानंद ने सीएम व स्वास्थ्य मंत्री को की है। इस शिकायत पर क्या होता है, अभी पता नहीं है। हां मरीज पर शिकायत वापस लेने का जरूर दबाव बनाया जा रहा है।
निजी केमिस्ट शॉप संचालक बना रहे मजाक
संस्थान के कैंपस में निजी केमिस्ट शॉप संचालक लंबे समय से नियमों का मजाक बना रहे थे। यहां प्रधानमंत्री की फोटो के साथ एक बैनर लगाया था, इसमें निजी दुकान को सरकारी बता कर 10 से 70 फीसदी सस्ती दवा देने का दावा किया जा रहा था। जबकि साथ ही सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त अमृत स्टोर है। इस मामले को अमर उजाला ने उठाया तो ड्रग कंट्रोलर ने संज्ञान लिया और इस बैनर को चेतावनी के साथ हटवाया।
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मरीज की जो शिकायत आई है, उसकी जांच करवाई जा रही है। दवाओं के लिए रेट कांट्रेक्ट हो चुका है, अब समस्या नहीं होगी। आर्थो विभाग मरीज को बाहर से इम्प्लांट लाने व लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
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सूत्रों के अनुसार आर्थो विभाग में आने वाले मरीज के लिए जरूरी होता है कि वह अपने डॉक्टर की सभी बातों को मानें। तभी मरीज का डॉक्टर आपरेशन करते हैं, ऐसा न करने पर मरीज को आपरेशन की डेट ही नहीं दी जाती। शिकायतों पर सरकार ने संज्ञान लिया तो स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अमित झा ने कैंपस में सस्ते इम्प्लांट के लिए अमृत स्टोर तो खुलवा दिया, लेकिन यहां से इम्प्लांट मंगवाने के लिए डॉक्टरों को बाध्य कौन करे। डॉक्टर आज भी अपने सप्लायरों से सामान मंगाते हैं। मरीज यदि बाजार में इम्प्लांट की कीमत पता करता है तो समझ आता है कि उससे चार गुणा अधिक कीमत वसूल ली गई है। ऐसी ही शिकायत जनता कॉलोनी के विद्यानंद ने सीएम व स्वास्थ्य मंत्री को की है। इस शिकायत पर क्या होता है, अभी पता नहीं है। हां मरीज पर शिकायत वापस लेने का जरूर दबाव बनाया जा रहा है।
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निजी केमिस्ट शॉप संचालक बना रहे मजाक
संस्थान के कैंपस में निजी केमिस्ट शॉप संचालक लंबे समय से नियमों का मजाक बना रहे थे। यहां प्रधानमंत्री की फोटो के साथ एक बैनर लगाया था, इसमें निजी दुकान को सरकारी बता कर 10 से 70 फीसदी सस्ती दवा देने का दावा किया जा रहा था। जबकि साथ ही सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त अमृत स्टोर है। इस मामले को अमर उजाला ने उठाया तो ड्रग कंट्रोलर ने संज्ञान लिया और इस बैनर को चेतावनी के साथ हटवाया।
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मरीज की जो शिकायत आई है, उसकी जांच करवाई जा रही है। दवाओं के लिए रेट कांट्रेक्ट हो चुका है, अब समस्या नहीं होगी। आर्थो विभाग मरीज को बाहर से इम्प्लांट लाने व लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस