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रामपाल के खिलाफ हत्या के मामले में हुई अदालत में बहस
Updated Sat, 31 Mar 2018 02:59 AM IST
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हत्या के मामले में रामपाल के खिलाफ अदालत में बहस, जांच अधिकारी बोले
संत रामपाल से बरामद हुई थी डबल बैरल गन
- अभी साबित नहीं कर सकी है पुलिस, बंदूक से चली या नहीं : बचाव पक्ष
- रामपाल सहित 35 लोगों के खिलाफ दर्ज है मामला
- वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई एडीजे अश्वनी कुमार की अदालत में सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर 12 साल पहले हुई झज्जर जिले के युवक सोनू की हत्या के मामले में शुक्रवार को एडीजे अश्वनी कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत में गवाही देने पहुंचे तत्कालीन थाना प्रभारी एवं इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान संत रामपाल के पास से डबल बैरल गन बरामद हुई थी, जिसका लाइसेंस भी उनके नाम हैं। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि अभी यह साबित नहीं कर सकी है कि गन से गोली चली है या नहीं। ऐसे में अदालत के अंदर एफएसएल एक्सपर्ट की गवाही काफी अहम रहेगी।
बता दें कि संत रामपाल ने 2003 में करौंथा में सतलोक आश्रम खोला था, जहां हजारों की संख्या में अनुयायी आने लगे। साथ ही स्वामी दयानंद द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी के चलते आर्य समाजी नाराज हो गए। 2006 में हजारों की संख्या में ग्रामीण करौंथा आश्रम के नजदीक एकत्रित हुए, जिसमें आर्य समाजी भी रहे। तनाव के बच गोली लगने से झज्जर के युवक सोनू की मौत हो गई। हालात बेकाबू होता देखकर प्रदेश सरकार ने केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों की कंपनी रोहतक में तैनात कर दी। कंपनी ने रात को आसपास के ग्रामीणों को खदेड़ दिया और आश्रम में बंद अनुयायियों को बाहर निकाला। गवाह ने बताया कि वे आश्रम में पहुंचे और ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तलाशी ली। आश्रम से चार लाइसेंसी बंदूकों सहित कई हथियार व कारतूस बरामद हुए। डबन बैरल की एक बंदूक का लाइसेंस रामपाल के नाम भी है।
68 गवाहों के बयान दर्ज, एफएसएल एक्सपर्ट की गवाही अहम
तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह की गवाही के बाद दोनों पक्षों में बहस हुई। बचाव पक्ष के वकील वीरेंद्र देशवाल ने गवाह से सवाल किए। साफ किया कि संत रामपाल की बंदूक लाइसेंसी हैं। पुलिस अभी तक यह साबित नहीं कर सकी है कि बंदूक के अंदर से गोली चली या नहीं। यह तो एफएसएल एक्सपर्ट ही बता पाएगा। ऐसे में एक्सपर्ट की गवाही काफी अहम है। मामले में अब तक 68 लोगों की गवाही हो चुकी है। अब केस में 13 अप्रैल को सुनवाई होगी।
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संत रामपाल से बरामद हुई थी डबल बैरल गन
- अभी साबित नहीं कर सकी है पुलिस, बंदूक से चली या नहीं : बचाव पक्ष
- रामपाल सहित 35 लोगों के खिलाफ दर्ज है मामला
- वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई एडीजे अश्वनी कुमार की अदालत में सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर 12 साल पहले हुई झज्जर जिले के युवक सोनू की हत्या के मामले में शुक्रवार को एडीजे अश्वनी कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत में गवाही देने पहुंचे तत्कालीन थाना प्रभारी एवं इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान संत रामपाल के पास से डबल बैरल गन बरामद हुई थी, जिसका लाइसेंस भी उनके नाम हैं। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि अभी यह साबित नहीं कर सकी है कि गन से गोली चली है या नहीं। ऐसे में अदालत के अंदर एफएसएल एक्सपर्ट की गवाही काफी अहम रहेगी।
बता दें कि संत रामपाल ने 2003 में करौंथा में सतलोक आश्रम खोला था, जहां हजारों की संख्या में अनुयायी आने लगे। साथ ही स्वामी दयानंद द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी के चलते आर्य समाजी नाराज हो गए। 2006 में हजारों की संख्या में ग्रामीण करौंथा आश्रम के नजदीक एकत्रित हुए, जिसमें आर्य समाजी भी रहे। तनाव के बच गोली लगने से झज्जर के युवक सोनू की मौत हो गई। हालात बेकाबू होता देखकर प्रदेश सरकार ने केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों की कंपनी रोहतक में तैनात कर दी। कंपनी ने रात को आसपास के ग्रामीणों को खदेड़ दिया और आश्रम में बंद अनुयायियों को बाहर निकाला। गवाह ने बताया कि वे आश्रम में पहुंचे और ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तलाशी ली। आश्रम से चार लाइसेंसी बंदूकों सहित कई हथियार व कारतूस बरामद हुए। डबन बैरल की एक बंदूक का लाइसेंस रामपाल के नाम भी है।
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68 गवाहों के बयान दर्ज, एफएसएल एक्सपर्ट की गवाही अहम
तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह की गवाही के बाद दोनों पक्षों में बहस हुई। बचाव पक्ष के वकील वीरेंद्र देशवाल ने गवाह से सवाल किए। साफ किया कि संत रामपाल की बंदूक लाइसेंसी हैं। पुलिस अभी तक यह साबित नहीं कर सकी है कि बंदूक के अंदर से गोली चली या नहीं। यह तो एफएसएल एक्सपर्ट ही बता पाएगा। ऐसे में एक्सपर्ट की गवाही काफी अहम है। मामले में अब तक 68 लोगों की गवाही हो चुकी है। अब केस में 13 अप्रैल को सुनवाई होगी।
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