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शमसान घाट में अंतिम संस्कार को लेकर भिड़े एक ही परिवार के दो पक्ष, पुलिस से भी हुई नोकझोंक

Wed, 21 Feb 2018 02:52 AM IST
Updated Wed, 21 Feb 2018 02:52 AM IST
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शमसान घाट में अंतिम संस्कार को लेकर भिड़े एक ही परिवार के दो पक्ष, पुलिस से भी हुई नोकझोंक
फोटो सहित
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पुश्तैनी श्मशान घाट को लेकर जैन बंधुओं में ठनी, परिवार के बुजुर्ग के संस्कार को लेकर चाचा-भतीजे भिड़े
- बाद में पुलिस सुरक्षा में हुआ परिवार के बुजुर्ग का अंतिम संस्कार, दोनों पक्ष एक परदादा की संतान
- जनता कालोनी में सोमवार रात को हो गई थी वृद्ध की मौत, सुरक्षा की दृष्टि से शमशान घाट के आसपास पुलिस फोर्स तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति राजेश जैन के परिवार में पुश्तैनी बगीची श्मशान घाट के हक के लिए मंगलवार सुबह तनातनी हो गई। दो घंटे तक प्रॉपर्टी डीलर रहे राजेश के चाचा और कपड़ा व्यापारी दीपक जैन के बड़े भाई अशोक जैन का अंतिम संस्कार विवाद के चलते रुका रहा। विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। इसके बाद बुजुर्ग का अंतिम संस्कार हो सका।
जनता कॉलोनी निवासी दीपक जैन ने बताया कि उसके परदादा जोरावर सिंह ने साल 1902 में वैश्य संस्था के पास बगीची बनाई थी। बगीची के अंदर श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर और खानदानी श्मशान घाट है। परदादा की मौत के बाद बगीची पर उनके बाबा शिवदयाल, उनके भाई नंदलाल, और कपूरचंद का अधिकार हो गया था। बगीची के अंदर बने खानदानी शमशान घाट में ही तीनों परिवार मरने वालों का अंतिम संस्कार करते चले आ रहे हैं। सोमवार रात में उनके बड़े भाई अशोक जैन की बीमारी के कारण मौत हो गई थी। मंगलवार की सुबह करीब साढे़ नौ बजे परिवार के सदस्य शव का अंतिम संस्कार करने के लिये अपने खानदानी श्मशान घाट पर पहुंचे। आरोप है कि जहां पर नंदलाल पक्ष के जयचंद जैन और राजेश जैन सहित अन्य लोगों ने शव का अंतिम संस्कार कराने से साफ इंकार कर दिया। जयचंद पक्ष का कहना था कि श्मशान घाट पर सिर्फ उन्हीं का अधिकार है। जबकि मृतक पक्ष का कहना था कि श्मशान घाट खानदानी है। तीनों परिवारों का उस पर अधिकार है। मामले की सूचना पाते ही डीएसपी ताहिर हुसैन समेत पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस से भी मृतक पक्ष की काफी देर तक नोकझोंक हुई। बाद में करीब दो घंटे बाद समाज के लोगों के समझाने पर किसी तरह शव का अंतिम संस्कार कराया गया।
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एक ही परिवार के लोगों में वृद्घ के शव के अंतिम संस्कार को लेकर खानदानी शमशान घाट के मालिकाना हक को लेकर विवाद हो गया था। बाद मे ंसमाज के लोगों ने समझाकर किसी तरह शमशान घाट में ही शव का अंतिम संस्कार करा दिया। किसी भी पक्ष की ओर से लिखित में शिकायत नहीं मिली है।
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- ताहिर हुसैन, डीएसपी

जबरदस्ती कब्जे का प्रयास करना चाह रहे हैं नंदलाल पक्ष के लोग
मृतक अशोक जैन के भाई दीपक जैन का आरोप है कि नंदलाल पक्ष के जयचंद जैन व अन्य श्मशान घाट पर अपना कब्जा करना चाहते हैं। इसलिये उसके भाई अशोक जैन की मौत के बाद भी शव का काफी देर तक अंतिम संस्कार नहीं होने दिया गया। इस मामले में यदि कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाना पड़ा तो खटखटाएंगे।

शिव दयाल पक्ष को कर दिया था जायदाद से बेदखल
एलपीएस बोसार्ड के मालिक व उद्योगपति राजेश जैन का कहना है कि उनके बाबा जोरावर सिंह ने कई साल पूर्व ही उसके रिश्ते के दादा शिवदयाल पक्ष को बगीची के अंदर जमीन जायदाद से बेदखल कर दिया था। श्मशान घाट के अंदर पिछले कई साल से उनके पूर्वजों का ही अंतिम संस्कार किया जा रहा है। उनके कई पूर्वजों की समाधि भी है। मगर अब श्मशान घाट पर शिवदयाल पक्ष का दीपक जैन अपना मालिकाना हक जता रहा है। जबकि बगीची से अब उनका कोई लेना देना नहीं है। उनके ताऊ जयचंद ही पिछले कई साल से बगीची की देखरेख कर रहे है।


18 हजार गज में है बगीची
जिस बगीची को लेकर विवाद चल रहा है वह 18 हजार गज में है। बगीची के अंदर ही जहां श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर बनाया गया है। वहीं श्मशान घाट भी इसी के अंदर है।
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