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बचत
Updated Wed, 18 Jul 2018 02:52 AM IST
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गांव वासी बोले, सोनम को उसके किए सजा मिलनी ही चाहिए
- जाति गोत्र एक होने पर शादी कराने मना करने पर सोनम ने 2009 में परिवार के सात सदस्यों की कर दी थी हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
कबूलपुर गांव के लोग आज भी 14 सितंबर 2009 का दिन याद कर सिहर उठते हैं। एक जाति और एक गोत्र होने पर जब प्रेमी के साथ विवाह कराने से इंकार किया गया तो सोनम ने अपने ही परिवार सात लोगों की जहर खिलाकर हत्या कर दी थी। बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जब सोनम और उसके प्रेमी की मौत की सजा को बरकरार रखने का फैसला दिया तो गांव वासियों की आंखों के सामने सात वर्ष पुराना मंजर फिर से आ गया। गांव वासियों ने कहा कि सोनम को उसके किए की सजा मिलनी ही चाहिए।
गांव वासियों को उस दिन की एक-एक बात याद है। एक ही परिवार के सात लोगों की हत्या से पूरा गांव सकते में आ गया था। अपनों ने अपनों की जान ले ली। छोटे भाई बहन तक को नहीं बख्शा। अमर उजाला ने मंगलवार को ग्रामीणों से बात की तो उनका दर्द बाहर आया। ग्रामीणों ने कहा कि प्यार किसी की जान लेना नहीं सिखाता। प्यार के लिए जान से ज्यादा प्यार करने वाली दादी, छोटे भाई बहन को नहीं मार दिया। सोनम ने गलत किया, इसी लिए रिश्तेदारों ने भी उससे मुंह फेर लिया। उसके केस में साथ नहीं आया कोई, वह अपने कर्मों की सजा भुगतेगी।
- जीवन जीने के अधिकार की दलील भी मंजूर नहीं
मामला जब ट्रायल कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए पहुंचा था तो दोनों की ओर से जीने के अधिकार की दलील देते हुए रहम की मांग की गई थी। वहीं, पुलिस की ओर से 2001 से रेलू राम पूनिया हत्याकांड और साल 2010 में उत्तराखंड में हुए सुंदर केस का हवाला देते हुए कहा गया था कि दोनों मामलों में परिवार की हत्या की गई थी। ऐसे में यह मामला भी रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है और दोनों को मौत की सजा होनी चाहिए। सेशन जज एसके गुप्ता ने दोनों को मौत की सजा सुनाते हुए सुनारिया जेल भेज दिया था।
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- जाति गोत्र एक होने पर शादी कराने मना करने पर सोनम ने 2009 में परिवार के सात सदस्यों की कर दी थी हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
कबूलपुर गांव के लोग आज भी 14 सितंबर 2009 का दिन याद कर सिहर उठते हैं। एक जाति और एक गोत्र होने पर जब प्रेमी के साथ विवाह कराने से इंकार किया गया तो सोनम ने अपने ही परिवार सात लोगों की जहर खिलाकर हत्या कर दी थी। बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जब सोनम और उसके प्रेमी की मौत की सजा को बरकरार रखने का फैसला दिया तो गांव वासियों की आंखों के सामने सात वर्ष पुराना मंजर फिर से आ गया। गांव वासियों ने कहा कि सोनम को उसके किए की सजा मिलनी ही चाहिए।
गांव वासियों को उस दिन की एक-एक बात याद है। एक ही परिवार के सात लोगों की हत्या से पूरा गांव सकते में आ गया था। अपनों ने अपनों की जान ले ली। छोटे भाई बहन तक को नहीं बख्शा। अमर उजाला ने मंगलवार को ग्रामीणों से बात की तो उनका दर्द बाहर आया। ग्रामीणों ने कहा कि प्यार किसी की जान लेना नहीं सिखाता। प्यार के लिए जान से ज्यादा प्यार करने वाली दादी, छोटे भाई बहन को नहीं मार दिया। सोनम ने गलत किया, इसी लिए रिश्तेदारों ने भी उससे मुंह फेर लिया। उसके केस में साथ नहीं आया कोई, वह अपने कर्मों की सजा भुगतेगी।
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- जीवन जीने के अधिकार की दलील भी मंजूर नहीं
मामला जब ट्रायल कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए पहुंचा था तो दोनों की ओर से जीने के अधिकार की दलील देते हुए रहम की मांग की गई थी। वहीं, पुलिस की ओर से 2001 से रेलू राम पूनिया हत्याकांड और साल 2010 में उत्तराखंड में हुए सुंदर केस का हवाला देते हुए कहा गया था कि दोनों मामलों में परिवार की हत्या की गई थी। ऐसे में यह मामला भी रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है और दोनों को मौत की सजा होनी चाहिए। सेशन जज एसके गुप्ता ने दोनों को मौत की सजा सुनाते हुए सुनारिया जेल भेज दिया था।
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