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पुलिस को बलियाणा से मिला सुराग, नजफगढ़ की महिला के पास मिला संदिग्ध बच्चा
Updated Thu, 05 Oct 2017 02:55 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पीजीआई के लेबर रूम से चोरी हुए बच्चे की तलाश कर रही पुलिस टीम को बलियाणा से एक बच्चे का सुराग मिला है। बलियाणा से सूचना मिलने पर एसआईटी को दिल्ली के नजफगढ़ से एक संदिग्ध बच्चे को महिला से बरामद किया। महिला रोहतक की जनता कॉलोनी निवासी है और उसकी शादी नजफगढ़ में हुई थी। दंपति का दावा है कि उन्होंने बच्चा पानीपत की एक महिला से गोद लिया था। अब पुलिस पानीपत की महिला और बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाएगी। वहीं बुधवार को भी 13 गांवों में पुलिस की विशेष टीम ने तलाश की। इस दौरान उनके हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं।
जिले के 13 गांवों में जांच के लिए विशेष ऑफिसर को टीम में शामिल किया गया था। टीम के एक अधिकारी को गांव बलियाणा से सूचना मिली कि रोहतक की जनता कॉलोनी निवासी महिला की शादी दिल्ली स्थित नजफगढ़ में हुई है। उसने एक बच्चे को गोद लिया है। महिला से पूछताछ के बाद पुलिस पानीपत में उस महिला के पास पहुंची जिसने बच्चे को गोद दिया था। अब पुलिस बच्चे को जन्म देने वाली महिला और बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाएगी। यदि दोनों का डीएनए मैच नहीं हुआ तो पीजीआई में बच्चा खोने वाली रंजू और पति सन्नी का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।
10 को पैदा हुआ बच्चा 28 सितंबर को दिया गोद
पुलिस जांच में सामने आया है कि पानीपत की महिला ने 10 सितंबर को बच्चे को जन्म दिया था। इसी दिन अंजू ने भी पीजीआई में बच्चे को जन्म दिया था। मूलरूप से बिहार की रहने वाली महिला ने बताया कि उसकी डिलीवरी एक दाई के माध्यम से की गई थी। दावा है कि करीब 18 दिन तक बच्चे को अपने पास रखने के बाद पानीपत के एक डॉक्टर और दाई के सहयोग से महिला ने नजफगढ़ की महिला को उसे गोद दे दिया था।
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कानूनी तौर पर नहीं लिया गोद, केस दर्ज
जब मामले में रोहतक पुलिस ने जांच पड़ताल की तो पता चला कि दंपति ने कानूनी तौर पर बच्चे को गोद नहीं लिया। अब मामले में पुलिस ने डॉक्टर, दाई और दंपति के खिलाफ पीजीआई थाने में बच्चों की तस्करी का केस दर्ज किया है। मामला पानीपत का होने के कारण पीजीआई थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच के लिए पानीपत भेजी गई है।
5 साल से पैदा नहीं हुआ था बच्चा, इसलिए गोद लिया
पुलिस ने दंपति को हिरासत में लेकर बयान दर्ज किये हैं। महिला का कहना है कि उसकी शादी करीब पांच साल पहले हुई थी। लेकिन कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। इस कारण काफी समय से एक बच्चे को गोद लेना चाहते थे। इसी के चलते पानीपत में एक डॉक्टर से मुलाकात हुई थी। डॉक्टर और दाई के माध्यम से बच्चे को गोद लिया था।
कहीं बेच तो नहीं दिया था बच्चा
जब मामले में पुलिस ने बच्चे को जन्म देने वाली महिला से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह बच्चे को पालन पोषण नहीं कर सकती थी। इस कारण उसने बच्चे को गोद दे दिया। करीब दो साल पहले महिला के इकलौते बच्चे की मौत हो गई थी। वह और उसका पति मेहनत मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते है। पुलिस को शक है कि महिला ने शायद बच्चे को बेचा है। इसी बिंदु पर पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है।
वर्जन
संदिग्ध बच्चे और उसकी मां का डीएनए टेस्ट करवाया जाएगा। इसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी। साथ ही बच्चे को गोद लेने, देने और दिलवाने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
डीएसपी डॉ रविंद्र, एसआईटी के इंचार्ज
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रोहतक।
पीजीआई के लेबर रूम से चोरी हुए बच्चे की तलाश कर रही पुलिस टीम को बलियाणा से एक बच्चे का सुराग मिला है। बलियाणा से सूचना मिलने पर एसआईटी को दिल्ली के नजफगढ़ से एक संदिग्ध बच्चे को महिला से बरामद किया। महिला रोहतक की जनता कॉलोनी निवासी है और उसकी शादी नजफगढ़ में हुई थी। दंपति का दावा है कि उन्होंने बच्चा पानीपत की एक महिला से गोद लिया था। अब पुलिस पानीपत की महिला और बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाएगी। वहीं बुधवार को भी 13 गांवों में पुलिस की विशेष टीम ने तलाश की। इस दौरान उनके हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं।
जिले के 13 गांवों में जांच के लिए विशेष ऑफिसर को टीम में शामिल किया गया था। टीम के एक अधिकारी को गांव बलियाणा से सूचना मिली कि रोहतक की जनता कॉलोनी निवासी महिला की शादी दिल्ली स्थित नजफगढ़ में हुई है। उसने एक बच्चे को गोद लिया है। महिला से पूछताछ के बाद पुलिस पानीपत में उस महिला के पास पहुंची जिसने बच्चे को गोद दिया था। अब पुलिस बच्चे को जन्म देने वाली महिला और बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाएगी। यदि दोनों का डीएनए मैच नहीं हुआ तो पीजीआई में बच्चा खोने वाली रंजू और पति सन्नी का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।
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10 को पैदा हुआ बच्चा 28 सितंबर को दिया गोद
पुलिस जांच में सामने आया है कि पानीपत की महिला ने 10 सितंबर को बच्चे को जन्म दिया था। इसी दिन अंजू ने भी पीजीआई में बच्चे को जन्म दिया था। मूलरूप से बिहार की रहने वाली महिला ने बताया कि उसकी डिलीवरी एक दाई के माध्यम से की गई थी। दावा है कि करीब 18 दिन तक बच्चे को अपने पास रखने के बाद पानीपत के एक डॉक्टर और दाई के सहयोग से महिला ने नजफगढ़ की महिला को उसे गोद दे दिया था।
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कानूनी तौर पर नहीं लिया गोद, केस दर्ज
जब मामले में रोहतक पुलिस ने जांच पड़ताल की तो पता चला कि दंपति ने कानूनी तौर पर बच्चे को गोद नहीं लिया। अब मामले में पुलिस ने डॉक्टर, दाई और दंपति के खिलाफ पीजीआई थाने में बच्चों की तस्करी का केस दर्ज किया है। मामला पानीपत का होने के कारण पीजीआई थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच के लिए पानीपत भेजी गई है।
5 साल से पैदा नहीं हुआ था बच्चा, इसलिए गोद लिया
पुलिस ने दंपति को हिरासत में लेकर बयान दर्ज किये हैं। महिला का कहना है कि उसकी शादी करीब पांच साल पहले हुई थी। लेकिन कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। इस कारण काफी समय से एक बच्चे को गोद लेना चाहते थे। इसी के चलते पानीपत में एक डॉक्टर से मुलाकात हुई थी। डॉक्टर और दाई के माध्यम से बच्चे को गोद लिया था।
कहीं बेच तो नहीं दिया था बच्चा
जब मामले में पुलिस ने बच्चे को जन्म देने वाली महिला से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह बच्चे को पालन पोषण नहीं कर सकती थी। इस कारण उसने बच्चे को गोद दे दिया। करीब दो साल पहले महिला के इकलौते बच्चे की मौत हो गई थी। वह और उसका पति मेहनत मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते है। पुलिस को शक है कि महिला ने शायद बच्चे को बेचा है। इसी बिंदु पर पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है।
वर्जन
संदिग्ध बच्चे और उसकी मां का डीएनए टेस्ट करवाया जाएगा। इसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी। साथ ही बच्चे को गोद लेने, देने और दिलवाने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
डीएसपी डॉ रविंद्र, एसआईटी के इंचार्ज