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कोरोना संक्रमित सामान्य लक्षण वालों से रहें सावधान, एंटीबॉडी नहीं होने से कभी भी हो सकते हैं दोबारा संक्रमित
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रोहतक। कोरोना लक्षण वाले मरीजों से अधिक बगैर लक्षण वाले संक्रमितों की संख्या देश में अधिक है और इन्हीं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषज्ञों का दावा है कि देश की 30 से 40 करोड़ की आबादी को संक्रमण हो चुका है, लेकिन लक्षणों के अभाव में इनकी जांच ही नहीं हुई है। हालांकि देश में एक करोड़ के करीब कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हो चुकी है।
पीजीआईएमएस रोहतक में कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर एवं कोवैक्सीन अनुसंधान के सह जांचकर्ता डॉ. रमेश वर्मा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि जिन लोगों को कोरोना हुआ और लक्षण आए, उनके शरीर ने अपने आप रोग प्रतिरक्षी क्षमता विकसित कर ली। लेकिन जिन मरीजों को लक्षण नहीं आए और वह कुछ समय में अपने आप ठीक हो गए, उनमें रोग प्रतिरक्षी नहीं बन पाए। ऐसे में इन सामान्य लक्षण वालों को कभी भी संक्रमण हो सकता है। इसलिए लोगों को बार-बार सलाह दी जाती है कि वह बगैर मास्क बाहर ना निकलें, तय सामाजिक दूरी का पालन करें। हमारे यहां बहुत सारी आबादी ऐसी भी है जिनको पता ही नहीं है कि उन्हें कोरोना संक्रमण हो भी गया और ठीक हो गए। कोरोना संक्रमण के बाद शरीर में बनी प्रतिरक्षी कितना समय वायरस से बचा पाएगी इस पर जांच चल रही है। क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर में वायरस से लड़ने की अलग-अलग क्षमता होती है।
बीसीजी टीकाकारण, क्रास एंटी बॉडी, रोग प्रतिरोधक क्षमता बने हैं वरदान
डॉ. रमेश वर्मा बताते हैं कि देश में कोरोना वायरस अधिक भयंकर रूप नहीं ले पाया है, क्योंकि यहां बीसीजी टीकाकरण होता है। इसके अलावा हर छह माह में यहां मौसम परिवर्तन के चलते गला खराब, जुकाम, खांसी होने की समस्या होती रहती है। इसके चलते शरीर में क्रास एंटीबॉडी बनती है जोकि कोरोना वायरस से लड़ने में मदद करती है। सबसे अहम है कि हमारा खानपान सही है और हम लोगों की अन्य देश के लोगों की तुलना में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है।
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पीजीआईएमएस रोहतक में कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर एवं कोवैक्सीन अनुसंधान के सह जांचकर्ता डॉ. रमेश वर्मा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि जिन लोगों को कोरोना हुआ और लक्षण आए, उनके शरीर ने अपने आप रोग प्रतिरक्षी क्षमता विकसित कर ली। लेकिन जिन मरीजों को लक्षण नहीं आए और वह कुछ समय में अपने आप ठीक हो गए, उनमें रोग प्रतिरक्षी नहीं बन पाए। ऐसे में इन सामान्य लक्षण वालों को कभी भी संक्रमण हो सकता है। इसलिए लोगों को बार-बार सलाह दी जाती है कि वह बगैर मास्क बाहर ना निकलें, तय सामाजिक दूरी का पालन करें। हमारे यहां बहुत सारी आबादी ऐसी भी है जिनको पता ही नहीं है कि उन्हें कोरोना संक्रमण हो भी गया और ठीक हो गए। कोरोना संक्रमण के बाद शरीर में बनी प्रतिरक्षी कितना समय वायरस से बचा पाएगी इस पर जांच चल रही है। क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर में वायरस से लड़ने की अलग-अलग क्षमता होती है।
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बीसीजी टीकाकारण, क्रास एंटी बॉडी, रोग प्रतिरोधक क्षमता बने हैं वरदान
डॉ. रमेश वर्मा बताते हैं कि देश में कोरोना वायरस अधिक भयंकर रूप नहीं ले पाया है, क्योंकि यहां बीसीजी टीकाकरण होता है। इसके अलावा हर छह माह में यहां मौसम परिवर्तन के चलते गला खराब, जुकाम, खांसी होने की समस्या होती रहती है। इसके चलते शरीर में क्रास एंटीबॉडी बनती है जोकि कोरोना वायरस से लड़ने में मदद करती है। सबसे अहम है कि हमारा खानपान सही है और हम लोगों की अन्य देश के लोगों की तुलना में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है।
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