फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Ability of corona virus to stick to ACE present in young children is negligible 

नौ साल तक के बच्चों पर कोरोना का असर नहीं, एसीई से मिल रहा सुरक्षा कवच

Wed, 06 Jan 2021 01:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संजय कुमार, रोहतक
संजय कुमार, रोहतक Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Wed, 06 Jan 2021 01:20 AM IST
विज्ञापन
Ability of corona virus to stick to ACE present in young children is negligible 
बच्चा - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

छोटे बच्चों और किशोरों के शरीर में मौजूद एंजियोटेंसिन परिवर्तित एंजाइम (एसीई) ही उन्हें कोरोना से बचा रहा है। कम आयु के बच्चों में मौजूद एसीई पर कोरोना वायरस के चिपकने की क्षमता ना के बराबर होती है, इसलिए संक्रमण इस आयु वर्ग पर अपना प्रभाव नहीं दिखा पा रहा है। 

विज्ञापन


उम्र बढ़ने के साथ-साथ किशोरों में मौजूद एसीई पर वायरस के चिपकने की क्षमता धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन इस वर्ग की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण वायरस अपना अधिक प्रभाव नहीं डाल पाता। इन दोनों वर्ग में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें वायरस का असर तो नहीं आता, लेकिन यह वर्ग संक्रमण के दौरान दूसरों को संक्रमित जरूर कर सकते हैं। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - अध्ययन में बड़ा दावा- हवा में दो घंटे से ज्यादा रहता है कोरोना वायरस, संक्रमित भी करने की क्षमता 
विज्ञापन
विज्ञापन


पीजीआईएमएस के प्रोफेसर एवं कोवैक्सीन के सह-अनुसंधानकर्ता डॉ. रमेश वर्मा बताते हैं कि कोरोना वायरस अधिकांश नाक-मुंह से शरीर में प्रवेश करता है और फेफड़ों तक पहुंचता है। बच्चों में यह वायरस चिपक नहीं पाता। बड़ों में चिपक जाता है और शरीर को नुकसान पहुंचाता है। यह रक्तवाहिकाओं में मिल कर शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचाता है। बच्चों में तो यह वायरस नुकसान नहीं पहुंचा पाता लेकिन बच्चों के जरिए दूसरों को संक्रमित कर सकता है। 

नौ साल तक की उम्र के बच्चे में यह वायरस समस्या नहीं करता। इसके बाद 18 साल तक के बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इसके चलते वायरस का इन पर अधिक असर नहीं होता, लेकिन यह भी संक्रमण को फैला सकते हैं। हालांकि बीमार रहने वाले बच्चों व किशोरों में इसके गंभीर परिणाम आने का खतरा बना रहता है। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस 12 साल के आयु तक के बच्चे को कोवैक्सीन की रिसर्च में वैक्सीन की डोज दे चुका है। लेकिन उपलब्ध होने वाली वैक्सीन फिलहाल 18 व उससे अधिक आयु वर्ग को दी जाएगी। 


करीब 23 हजार वॉलंटियरों को लगाई जा चुकी वैक्सीन
कोवैक्सीन की रिसर्च के तीसरे चरण में 25800 वॉलंटियरों को यह वैक्सीन दी जानी थी। अभी तक करीब 23 हजार वॉलंटियरों को यह वैक्सीन दी जा चुकी है। बात पीजीआईएमएस की करें तो यहां 438 को तीसरे फेज के ट्रायल में शामिल किया जा चुका है।

अभी कोरोना की वैक्सीन 18 साल व इससे अधिक आयु वालों के लिए आई है। पहले यह वैक्सीन हेल्थ वर्करों फिर बुजुर्गों, बीमारों व फ्रंटलाइन हेल्थ वर्करों को दी जाएगी। बच्चों व किशोरों के लिए अभी सावधानी की जरूरत है। दोनों के टीकाकरण के लिए और रिसर्च होगी। इस समय तक बच्चों व किशोरों को सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है कि सभी में अपने आप इम्यूनिटी बने या टीकाकरण से इम्यूनिटी बनाई जाए। फिलहाल टीकाकरण का उद्देश्य संक्रमण से बचाना है, यह टीका कितने समय सुरक्षित रखेगा इस पर रिसर्च जारी है। - डॉ. ध्रुव चौधरी, सीनियर प्रोफेसर पीसीसीएम व प्रदेश प्रमुख नोडल अधिकारी कोविड एवं कोवैक्सीन रिसर्च के को इन्वेस्टिगेटर, पीजीआईएमएस

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed