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कोरोना से पीजीआई में रुके मरीजों के ऑपरेशन
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पीजीआईएमएस की सीआरएस ओपीडी ।
- फोटो : RohtakCity
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के ऑपरेशन थियेटर कोरोना के संक्रमणकाल के चलते सिमट गए हैं। यहां महज आपात सर्जरी ही की जा रही है। इसके चलते छह माह से एक साल की वेटिंग लिस्ट मरीजों की और बढ़ गई है। शनिवार को संस्थान के धनवंतरी अपेक्स ट्रॉमा सेंटर को कोविड अस्पताल में बदल दिया गया है।
संस्थान में सर्जरी, ऑर्थो, गाइनी, आई, ईएनटी विभाग के रोजाना लगभग 100 से 125 आपरेशन होते थे। इसके अलावा यूरोलॉजी, कार्डिक सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी, पीड्स सर्जरी आदि विभागों की सप्ताह में दो दिन ऑपरेशन थियेटर होते हैं। इन विभागों के प्रतिदिन 30 के करीब ऑपरेशन होते हैं। इसके अलावा आपातकालीन विभाग में भी रोजाना 30 से 40 के आसपास सर्जरी होती है। फिलहाल संस्थान ने कोविड अस्पताल के चलते इलेक्टिव सर्जरी को रोक दिया है और अब सिर्फ आपात सर्जरी ही की जा रही है। इसके चलते मरीजों को समस्या हो रही है और आगे भी सर्जरी शुरू होने की उम्मीद कम ही है।
सर्जरी के लिए मांगे जा रहे सुरक्षा उपकरण व मरीजों की जांच रिपोर्ट
सूत्रों की माने तो संस्थान में सर्जन सर्जरी करने को तैयार हैं, लेकिन वह कोविड- 19 की संपूर्ण सुरक्षा किट और ऑपरेशन वाले मरीज की कोविड- 19 की जांच रिपोर्ट मांग रहे हैं। सर्जनस का कहना है कि एक मरीज के ऑपरेशन में दस के करीब डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ शामिल होता है। यदि सभी पीपीई किट पहन कर काम करते हैं तो खर्च अधिक होगा। यदि मरीज की पहले ही अन्य जांचों की तरह कोविड की जांच करवा दी जाए तो उसे सामान्य मरीज की तरह ऑपरेट किया जा सकेगा।
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चिकित्सा अधीक्षक को दी गई है जिम्मेदारी
कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक को जिम्मेदारी दी है कि वह दिल्ली, चंडीगढ़ आदि अस्पतालों में बनी गाइडलाइन पर अध्ययन कर संस्थान की रणनीति तय करें। अब चिकित्सा अधीक्षक की जांच रिपोर्ट पर तय होगा कि संस्थान में ऑपरेशन शुरू होंगे या नहीं। क्योंकि पीजीआईएमएस रोहतक में प्रदेश के अलावा राजस्थान, दिल्ली, पश्चिमी उत्तरप्रदेश तक के मरीज उपचार के लिए आते हैं। फिलहाल ये सभी मरीज दिल्ली जाने को मजबूर हैं, लेकिन वहां कोविड के संक्रमण का खतरा बना रहता है।
बोले अधिकारी
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार संस्थान में इलेक्टिव सर्जरी नहीं की जा रही हैं। जो आपात स्थिति वाले मरीज हैं, उनकी सर्जरी कर रहे हैं। इसके अलावा एमएस की ओर से फाइल भेजी गई हैं, इस पर निर्णय होने के बाद ही आगे कुछ कहा जा सकेगा। इलेक्टिव सर्जरी को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।
-डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआईएमएस
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संस्थान में सर्जरी, ऑर्थो, गाइनी, आई, ईएनटी विभाग के रोजाना लगभग 100 से 125 आपरेशन होते थे। इसके अलावा यूरोलॉजी, कार्डिक सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी, पीड्स सर्जरी आदि विभागों की सप्ताह में दो दिन ऑपरेशन थियेटर होते हैं। इन विभागों के प्रतिदिन 30 के करीब ऑपरेशन होते हैं। इसके अलावा आपातकालीन विभाग में भी रोजाना 30 से 40 के आसपास सर्जरी होती है। फिलहाल संस्थान ने कोविड अस्पताल के चलते इलेक्टिव सर्जरी को रोक दिया है और अब सिर्फ आपात सर्जरी ही की जा रही है। इसके चलते मरीजों को समस्या हो रही है और आगे भी सर्जरी शुरू होने की उम्मीद कम ही है।
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सर्जरी के लिए मांगे जा रहे सुरक्षा उपकरण व मरीजों की जांच रिपोर्ट
सूत्रों की माने तो संस्थान में सर्जन सर्जरी करने को तैयार हैं, लेकिन वह कोविड- 19 की संपूर्ण सुरक्षा किट और ऑपरेशन वाले मरीज की कोविड- 19 की जांच रिपोर्ट मांग रहे हैं। सर्जनस का कहना है कि एक मरीज के ऑपरेशन में दस के करीब डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ शामिल होता है। यदि सभी पीपीई किट पहन कर काम करते हैं तो खर्च अधिक होगा। यदि मरीज की पहले ही अन्य जांचों की तरह कोविड की जांच करवा दी जाए तो उसे सामान्य मरीज की तरह ऑपरेट किया जा सकेगा।
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चिकित्सा अधीक्षक को दी गई है जिम्मेदारी
कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक को जिम्मेदारी दी है कि वह दिल्ली, चंडीगढ़ आदि अस्पतालों में बनी गाइडलाइन पर अध्ययन कर संस्थान की रणनीति तय करें। अब चिकित्सा अधीक्षक की जांच रिपोर्ट पर तय होगा कि संस्थान में ऑपरेशन शुरू होंगे या नहीं। क्योंकि पीजीआईएमएस रोहतक में प्रदेश के अलावा राजस्थान, दिल्ली, पश्चिमी उत्तरप्रदेश तक के मरीज उपचार के लिए आते हैं। फिलहाल ये सभी मरीज दिल्ली जाने को मजबूर हैं, लेकिन वहां कोविड के संक्रमण का खतरा बना रहता है।
बोले अधिकारी
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार संस्थान में इलेक्टिव सर्जरी नहीं की जा रही हैं। जो आपात स्थिति वाले मरीज हैं, उनकी सर्जरी कर रहे हैं। इसके अलावा एमएस की ओर से फाइल भेजी गई हैं, इस पर निर्णय होने के बाद ही आगे कुछ कहा जा सकेगा। इलेक्टिव सर्जरी को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।
-डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआईएमएस