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Rohtak News: मिट्टी के बर्तनों में पकाएं भोजन, तेल अधिक लगेगा न तेजाब बनेगा
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रवि संबरवाल
रोहतक। बाबा मस्तनाथ मठ में लगे सालाना मेले में लोगों को मिट्टी के बने बर्तन खूब भा रहे हैं। इन बर्तनों की खासियत है कि इनमें तैयार भोजन स्वादिष्ट तो होता ही है, कम तेल में बन जाता है। यह भोजन करने से शरीर में तेजाब (एसिड) भी नहीं बनता है। वहीं प्रोटीन, मिनरल्स भी खत्म नहीं होते हैं। मिट्टी के बर्तनों मे तैयार भोजन शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम करता है।
मेले में मिट्टी के बर्तनों की दुकान लगाने वाले सेक्टर-7 राजीव नगर निवासी 55 वर्षीय मुकेश बताते हैं कि उनके पूर्वज मिट्टी के बर्तन बनाते थे, अब वे इसे परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास मिट्टी के विभिन्न तरह के आकर्षक बर्तन उपलब्ध हैं। इनमें कुकर, हांडी, तवा, पतीला, चाय का कप, पानी की बोतल आदि प्रमुख हैं। मुकेश बताते हैं कि मिट्टी के बर्तनों में तैयार भोजन में पोषक तत्व नष्ट नहीं होते हैं, एसिड नहीं बनता और हड्डियां भी मजबूत होती हैं। सबसे बड़ी बात मिट्टी के बर्तन ईको फ्रेंडली होते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ-
मिट्टी में कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और आयरन जैसे तत्व मौजूद होते हैं। मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने से ये सभी तत्व खाने में अपने आप शामिल हो जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक हैं। वहीं खाने में कैलोरी, प्रोटीन, मिनरल्स आदि वैसे के वैसे मौजूद रहते हैं, जबकि प्लास्टिक या स्टील के बर्तन में खाना बनाने से ये तत्व कम हो जाते हैं। इससे पोषक तत्व की मात्रा भी घट जाती है। साथ ही कई तरह के केमिकल भी निकलते हैं, जो किडनी, लिवर को प्रभावित करते हैं। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से तेल कम लगता है और एसिड भी नहीं बनता है। बैड कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है।
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-डॉ. रमेश वर्मा, प्रोफेसर, पीजीआईएमएस, रोहतक
.............
मिट्टी के बर्तनों के दाम
कुकर : 600-700 रुपये
हांडी: 300 रुपये
हुक्की 100 रुपये
पतीला : 300 रुपये
बोतल: 100 रुपये
कप: 150 रुपये
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रोहतक। बाबा मस्तनाथ मठ में लगे सालाना मेले में लोगों को मिट्टी के बने बर्तन खूब भा रहे हैं। इन बर्तनों की खासियत है कि इनमें तैयार भोजन स्वादिष्ट तो होता ही है, कम तेल में बन जाता है। यह भोजन करने से शरीर में तेजाब (एसिड) भी नहीं बनता है। वहीं प्रोटीन, मिनरल्स भी खत्म नहीं होते हैं। मिट्टी के बर्तनों मे तैयार भोजन शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम करता है।
मेले में मिट्टी के बर्तनों की दुकान लगाने वाले सेक्टर-7 राजीव नगर निवासी 55 वर्षीय मुकेश बताते हैं कि उनके पूर्वज मिट्टी के बर्तन बनाते थे, अब वे इसे परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास मिट्टी के विभिन्न तरह के आकर्षक बर्तन उपलब्ध हैं। इनमें कुकर, हांडी, तवा, पतीला, चाय का कप, पानी की बोतल आदि प्रमुख हैं। मुकेश बताते हैं कि मिट्टी के बर्तनों में तैयार भोजन में पोषक तत्व नष्ट नहीं होते हैं, एसिड नहीं बनता और हड्डियां भी मजबूत होती हैं। सबसे बड़ी बात मिट्टी के बर्तन ईको फ्रेंडली होते हैं।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ-
मिट्टी में कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और आयरन जैसे तत्व मौजूद होते हैं। मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने से ये सभी तत्व खाने में अपने आप शामिल हो जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक हैं। वहीं खाने में कैलोरी, प्रोटीन, मिनरल्स आदि वैसे के वैसे मौजूद रहते हैं, जबकि प्लास्टिक या स्टील के बर्तन में खाना बनाने से ये तत्व कम हो जाते हैं। इससे पोषक तत्व की मात्रा भी घट जाती है। साथ ही कई तरह के केमिकल भी निकलते हैं, जो किडनी, लिवर को प्रभावित करते हैं। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से तेल कम लगता है और एसिड भी नहीं बनता है। बैड कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है।
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-डॉ. रमेश वर्मा, प्रोफेसर, पीजीआईएमएस, रोहतक
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मिट्टी के बर्तनों के दाम
कुकर : 600-700 रुपये
हांडी: 300 रुपये
हुक्की 100 रुपये
पतीला : 300 रुपये
बोतल: 100 रुपये
कप: 150 रुपये