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दावा ऑन कॉल डॉक्टर की ड्यूटी का, हकीकत में ओपीडी के बाद नहीं होती मरीजों की जांच
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जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ओपीडी समय के बाद आने वाले गंभीर मरीज राम या पीजीआईएमएस भरोसे हैं। क्योंकि ओपीडी के समय पर आने वाले मरीज को संबंधित विभाग के डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है, जबकि बाद में आने वाले मरीजों को दर्द की दवा दे कर घर भेज दिया जाता है। अधिक गंभीर मरीज को यहां से पीजीआईएमएस रेफर कर दिया जाता है या अधिकांश मरीजों को तो कागजों में रेफर भी नहीं किया जाता।
पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग व धनवंतरी अपैक्स ट्रामा सेंटर का सबसे अधिक लाभ जिला अस्पताल का आपातकालीन विभाग उठा रहा है। यहां के आपातकालीन विभाग में पीजीआईएमएस की तुलना में अधिकांश समय शांति रहती है। यहां झगड़े, सेक्सुअल असाल्ट जैसे केसों की एमएलआर काटना ओर उनकी जांच तक ही की जाती है। यहां मरीजों के उपचार के नाम पर उनकी मरहम पट्टी करने के अलावा दर्द निवारक दवा ही दी जाती है।
फार्मेसी विभाग खुला न होने के चलते यहां आने वाले मरीजों को सिर्फ एक समय की ही दवा मिल पाती है। यदि किसी मरीज को एक्स-रे, ब्लड जांच (सीएच को छोड़ कर) या किसी एक्सपर्ट की जरूरत होती है तो उसे अगले दिन ओपीडी शुरू होेने का इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल बंद होने के बाद अगले दिन सुबह तक अधिकांश मरीजों की जांच करने कोई एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं आता। आपातकालीन विभाग में बैठा डॉक्टर चाहे एमबीबीएस है या किसी विभाग से एमडी वहीं सभी मरीजों की जांच करता है और दवा देकर घर भेजता है। सूत्रों के अुनसार दावा किया जाता है कि यहां आने वाले मरीजों को डॉक्टर ऑन रिकार्ड रेफर करने से भी बचते हैं।
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ऑपरेशन के एक माह बाद भी नहीं गया आंखों का दर्द, पेन किलर व एंटी बायोटिक दे भेजा घर
65 वर्षीय खजानी के साथ आए उनके बेटे सुनील व बहु मंजू ने बताया कि 14 दिसंबर को उनकी माता का जिला अस्पताल में आंखों का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के चार दिन बाद ही मरीज की आंखों में दर्द बढ़ गया। अस्पताल आने पर डॉक्टर दवा लिख कर घर भेज देते हैं। बुधवार को जब आंख में दर्द बढ़ा तो वह जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में आए। यहां आंख का डॉक्टर तो मिला नहीं, जो डॉक्टर मिला उसने दवा लिख कर घर जाने को कहा है। डॉक्टर का कहना है कि वह अगले दिन ओपीडी में आंखों की जांच कराएं। यहां मौके पर तैनात डॉक्टर आंखों के डॉक्टर को न बुलाया और न इस संबंध में कोई बात कही।
जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में हर समय डॉक्टर उपलब्ध होता है। इसके अलावा अन्य सीनियर डॉक्टरों की आन काल ड्यूटी होती है, इन्हें मरीज के आने के हिसाब से मौके पर बुलाया जाता है। यदि किसी डॉक्टर या स्टाफ को काल पर बुलाया जाता है और वह नहीं आता तो गंभीर बात है। लेकिन इस संबंध में मेरे पास किसी मरीज की कोई शिकायत नहीं आई है। यदि किसी मरीज को समस्या है तो वह शिकायत करें, संबंधित स्टाफ व डॉक्टर पर कार्रवाई जरूर होगी।
- डॉ. रमेश चंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग व धनवंतरी अपैक्स ट्रामा सेंटर का सबसे अधिक लाभ जिला अस्पताल का आपातकालीन विभाग उठा रहा है। यहां के आपातकालीन विभाग में पीजीआईएमएस की तुलना में अधिकांश समय शांति रहती है। यहां झगड़े, सेक्सुअल असाल्ट जैसे केसों की एमएलआर काटना ओर उनकी जांच तक ही की जाती है। यहां मरीजों के उपचार के नाम पर उनकी मरहम पट्टी करने के अलावा दर्द निवारक दवा ही दी जाती है।
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फार्मेसी विभाग खुला न होने के चलते यहां आने वाले मरीजों को सिर्फ एक समय की ही दवा मिल पाती है। यदि किसी मरीज को एक्स-रे, ब्लड जांच (सीएच को छोड़ कर) या किसी एक्सपर्ट की जरूरत होती है तो उसे अगले दिन ओपीडी शुरू होेने का इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल बंद होने के बाद अगले दिन सुबह तक अधिकांश मरीजों की जांच करने कोई एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं आता। आपातकालीन विभाग में बैठा डॉक्टर चाहे एमबीबीएस है या किसी विभाग से एमडी वहीं सभी मरीजों की जांच करता है और दवा देकर घर भेजता है। सूत्रों के अुनसार दावा किया जाता है कि यहां आने वाले मरीजों को डॉक्टर ऑन रिकार्ड रेफर करने से भी बचते हैं।
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ऑपरेशन के एक माह बाद भी नहीं गया आंखों का दर्द, पेन किलर व एंटी बायोटिक दे भेजा घर
65 वर्षीय खजानी के साथ आए उनके बेटे सुनील व बहु मंजू ने बताया कि 14 दिसंबर को उनकी माता का जिला अस्पताल में आंखों का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के चार दिन बाद ही मरीज की आंखों में दर्द बढ़ गया। अस्पताल आने पर डॉक्टर दवा लिख कर घर भेज देते हैं। बुधवार को जब आंख में दर्द बढ़ा तो वह जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में आए। यहां आंख का डॉक्टर तो मिला नहीं, जो डॉक्टर मिला उसने दवा लिख कर घर जाने को कहा है। डॉक्टर का कहना है कि वह अगले दिन ओपीडी में आंखों की जांच कराएं। यहां मौके पर तैनात डॉक्टर आंखों के डॉक्टर को न बुलाया और न इस संबंध में कोई बात कही।
जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में हर समय डॉक्टर उपलब्ध होता है। इसके अलावा अन्य सीनियर डॉक्टरों की आन काल ड्यूटी होती है, इन्हें मरीज के आने के हिसाब से मौके पर बुलाया जाता है। यदि किसी डॉक्टर या स्टाफ को काल पर बुलाया जाता है और वह नहीं आता तो गंभीर बात है। लेकिन इस संबंध में मेरे पास किसी मरीज की कोई शिकायत नहीं आई है। यदि किसी मरीज को समस्या है तो वह शिकायत करें, संबंधित स्टाफ व डॉक्टर पर कार्रवाई जरूर होगी।
- डॉ. रमेश चंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल