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Rohtak News: 72 घंटे में भुगतान का दावा, अब भी 58.79 करोड़ बकाया

Wed, 24 Apr 2024 12:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Wed, 24 Apr 2024 12:19 AM IST
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Claim of payment in 72 hours, still Rs 58.79 crore outstanding
झज्जर। सरकार ने 72 घंटे में किसानों की फसल खरीद के भुगतान का दावा किया है लेकिन 15-15 दिन बीतने के बाद भी किसानों के खाते में राशि नहीं पहुंच पा रही। किसानों को कुल 232.65 करोड़ रुपये सरसों का भुगतान किया जाना था लेकिन अब तक 173.86 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। करीब 59 करोड़ का भुगतान अभी बकाया है। हरियाणा स्टेट वेयर कारपोरेशन को 65.67 करोड़ का भुगतान करना है, जिसमें से अब तक 37.49 करोड़ का भुगतान हुआ है और 28.18 करोड़ रुपये बकाया है।
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इस कारण किसानों को आर्थिक रुप से परेशानी हो रही है। घरेलू खर्च चलाने में भी दिक्कत हो रही है।इन दिनों बच्चों की फीस और प्रवेश का काम चल रहा है उसके लिए भी रुपयों की जरूरत है लेकिन भुगतान न मिलने से उन्हें परेशानी हो रही है। हैफेड ने कुल 166.98 करोड़ रुपये का भुगतान करना है, जिसमें से 136.37 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। इसके अलवा 30.61 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। गेहूं की बात करे तो फूड एंड सप्लाई ने 93.71 करोड़ का भुगतान करना है, जिसमें से 28.05 करोड़, एचएसडब्लूसी ने 27.56 में से 5.95 और हैफेड ने 46.12 में से 12.78 करोड़ का भुगतान अभी किया है। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी फसल का समय पर भुगतान करें।
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इसलिए हो रही देरी
मंडियों से गेहूं व सरसों का उठान नहीं हो पा रहा है। उठान न होने के कारण सरसों व गेहूं गोदाम तक नहीं पहुंच पा रही है। जो गाड़ियां गोदाम तक पहुंच रही हैं, वह भी तीन से चार दिन में खाली हो पा रही हैं। ऐसे में किसान अपनी फसल तो समय पर बेच रहा है, लेकिन भुगतान होने में देरी हो रही है।
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बदले मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता
पश्चिमी विक्षोभ के चलते मंगलवार शाम को अचानक मौसम में बदलाव हुआ है। शाम को लगभग आधे घंटे तक तेज आंधी चली और आसमान में काले बादल छा गए। ऐसा लगा कि अभी तेज बरसात होगी। गनीमत रही कि बरसात या बूंदाबांदी नहीं हुई। इससे किसानों व आढ़तियों ने राहत की सांस ली। मंडियों में लाखों क्विंटल गेहूं व सरसों पड़ी है। यदि बरसात होती तो भीगने की पूरी आशंका थी, हालांकि मौसम बदलाव के चलते मंडी में पड़ी फसल को तिरपाल से ढक दिया गया।
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