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चातुर्मास समारोह का हिंदू धार्मिक संस्कृति में बड़ा महत्व: राम झूलन
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गांव सीहा में चल रहे दिव्य अमृतमय चातुर्मास समारोह के दौरान उपस्थित महिला श्रद्धालु। स्त्रोत:
डहीना। गांव सीहा स्थित बाबा रामस्वरूप दास महाराज दादू पंथी आश्रम में चल रहे दिव्य अमृतमय चातुर्मास समारोह के 35वें दिन संतों और ब्राह्मणों को प्रसादी पंगत कराई गई। आश्रम परिसर में संतों और ब्राह्मणों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की भी मौजूदगी रही।
स्वामी लक्ष्मी नारायण पीठ जयपुर के महंत एवं कथा वाचक राम झूलन दास महाराज ने चातुर्मास के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चातुर्मास धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन चार महीनों में संत और भक्त एक स्थान पर रहकर भक्ति, व्रत और साधना के माध्यम से आत्मचिंतन करते हैं। संत धार्मिक कथाओं और भजन वाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एवं ज्ञान का संदेश देते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से चातुर्मास के दौरान अपनाए गए भक्ति और जीव हिंसा से बचने जैसे नियमों का जीवन में अनुसरण करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि आश्रम के पूर्व महंत बाबा भगवान दास और बाबा प्रेमदास महाराज भी चातुर्मास का आयोजन करते रहे हैं। उनके मार्गदर्शन से प्रेरित होकर आश्रम के महंत नरोत्तम दास, बाबा धर्मदास और दीपदास के नेतृत्व में समारोह आयोजित किया जा रहा है।
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स्वामी लक्ष्मी नारायण पीठ जयपुर के महंत एवं कथा वाचक राम झूलन दास महाराज ने चातुर्मास के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चातुर्मास धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन चार महीनों में संत और भक्त एक स्थान पर रहकर भक्ति, व्रत और साधना के माध्यम से आत्मचिंतन करते हैं। संत धार्मिक कथाओं और भजन वाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एवं ज्ञान का संदेश देते हैं।
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उन्होंने श्रद्धालुओं से चातुर्मास के दौरान अपनाए गए भक्ति और जीव हिंसा से बचने जैसे नियमों का जीवन में अनुसरण करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि आश्रम के पूर्व महंत बाबा भगवान दास और बाबा प्रेमदास महाराज भी चातुर्मास का आयोजन करते रहे हैं। उनके मार्गदर्शन से प्रेरित होकर आश्रम के महंत नरोत्तम दास, बाबा धर्मदास और दीपदास के नेतृत्व में समारोह आयोजित किया जा रहा है।
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