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मानसून में देरी से नहरें सूखीं, धान की रोपाई के लिए किसान परेशान
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मानसून नहीं आने से झज्जर, चरखी दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल, रेवाड़ी, हांसी, सोनीपत, जींद, रोहतक (जेएलएन नहर को छोड़कर) आदि जिलों की नहरें सूख गईं हैं। इससे किसानों को धान की रोपाई करने में परेशानी हो रही है। उधर, रोहतक के जेएलएन नहर में यमुना के खूबड़ू हेड से पेयजल आपूर्ति लायक 1200 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि शरारती तत्व नहर को तोड़कर पानी अपने खेतों में न ले जाएं, इसके लिए बीएसबी की पेट्रोलिंग कराई जा रही है। विभाग ने मानसून के आने तक किसानों से सिंचाई का दूसरा विकल्प अपनाने की अपील की है।
सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि हरियाणा में जून के प्रथम सप्ताह तक भले ही बारिश न हो, लेकिन पंजाब और हिमाचल में लगभग बारिश हो जाती है। इससे यमुना नदी और भाखड़ा नांगल बांध का जलस्तर बढ़ जाता है। इससे जेएलएन, बीएसबी के साथ छोटी नहरों में पानी छोड़ दिया जाता है ताकि किसान धान की रोपाई कर सकें। इस बार मानसून नहीं आने से पानी का संकट पैदा हो गया है। इसकी वजह से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। उधर, जेएलएन में पेयजल आपूर्ति के लिए ही पानी आ रहा है।
किसान नहीं कर पा रहे रोपाई
सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना है कि मानसून नहीं आने से यमुना का जलस्तर कम होने से नहरों में पानी नहीं आ रहा। इससे रोहतक, झज्जर, चरखी दादरी, भिवानी, महेंदरगढ़, नारनौल, रेवाड़ी, बहादुरगढ़, सोनीपत के किसान रोपाई नहीं कर पा रहे।
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मानसून आने तक सिंचाई का दूसरा विकल्प अपनाएं किसान
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब तक मानसून नहीं आ रहा है, तब तक किसान सिंचाई का दूसरा विकल्प अपनाएं अथवा कुछ समय के लिए रोपाई का कार्य रोक दें। मानसून आने के बाद नहरों में पानी आना शुरू हो जाएगा।
नहरों में पानी आना हुआ बंद
मानसून नहीं आने से यमुना नदी का जलस्तर गिर गया है। नदी के खूबडू़ हेड से नहरों में 2400 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है। जेएलएन नहर में सिर्फ पेयजल आपूर्ति के लिए ही पानी आ रहा है, जबकि अन्य नहरें सूखी हुईं हैं।
10 जुलाई के बाद मानसून आने की संभावना
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रामनिवास का कहना है कि 10 जुलाई के बाद मानसून आने की संभावना है। यदि 10 जुलाई तक मानसून नहीं आया तो गंभीर पेयजल संकट के पैदा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
मानसून नहीं आने से यमुना नदी का जलस्तर कम हो गया है। यमुना के खूबड़ूू हेड से जेएलएन नहर में पेयजल आपूर्ति के लिए सिर्फ 1200 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। झज्जर, दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल, रेवाड़ी, रोहतक, बहादुरगढ़ सोनीपत की नहरें सूखीं पड़ीं हैं। इससे किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। नहरों की पेट्रोलिंग करवाई जा रही है ताकि शरारती तत्व पानी खेतों में न काट लें। किसानों को चाहिए कि मानसून के आने तक कोई दूसरा विकल्प अपनाएं।
-रामनिवास, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
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सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि हरियाणा में जून के प्रथम सप्ताह तक भले ही बारिश न हो, लेकिन पंजाब और हिमाचल में लगभग बारिश हो जाती है। इससे यमुना नदी और भाखड़ा नांगल बांध का जलस्तर बढ़ जाता है। इससे जेएलएन, बीएसबी के साथ छोटी नहरों में पानी छोड़ दिया जाता है ताकि किसान धान की रोपाई कर सकें। इस बार मानसून नहीं आने से पानी का संकट पैदा हो गया है। इसकी वजह से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। उधर, जेएलएन में पेयजल आपूर्ति के लिए ही पानी आ रहा है।
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किसान नहीं कर पा रहे रोपाई
सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना है कि मानसून नहीं आने से यमुना का जलस्तर कम होने से नहरों में पानी नहीं आ रहा। इससे रोहतक, झज्जर, चरखी दादरी, भिवानी, महेंदरगढ़, नारनौल, रेवाड़ी, बहादुरगढ़, सोनीपत के किसान रोपाई नहीं कर पा रहे।
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मानसून आने तक सिंचाई का दूसरा विकल्प अपनाएं किसान
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब तक मानसून नहीं आ रहा है, तब तक किसान सिंचाई का दूसरा विकल्प अपनाएं अथवा कुछ समय के लिए रोपाई का कार्य रोक दें। मानसून आने के बाद नहरों में पानी आना शुरू हो जाएगा।
नहरों में पानी आना हुआ बंद
मानसून नहीं आने से यमुना नदी का जलस्तर गिर गया है। नदी के खूबडू़ हेड से नहरों में 2400 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है। जेएलएन नहर में सिर्फ पेयजल आपूर्ति के लिए ही पानी आ रहा है, जबकि अन्य नहरें सूखी हुईं हैं।
10 जुलाई के बाद मानसून आने की संभावना
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रामनिवास का कहना है कि 10 जुलाई के बाद मानसून आने की संभावना है। यदि 10 जुलाई तक मानसून नहीं आया तो गंभीर पेयजल संकट के पैदा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
मानसून नहीं आने से यमुना नदी का जलस्तर कम हो गया है। यमुना के खूबड़ूू हेड से जेएलएन नहर में पेयजल आपूर्ति के लिए सिर्फ 1200 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। झज्जर, दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल, रेवाड़ी, रोहतक, बहादुरगढ़ सोनीपत की नहरें सूखीं पड़ीं हैं। इससे किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। नहरों की पेट्रोलिंग करवाई जा रही है ताकि शरारती तत्व पानी खेतों में न काट लें। किसानों को चाहिए कि मानसून के आने तक कोई दूसरा विकल्प अपनाएं।
-रामनिवास, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग