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Rohtak News: भैणी भैरों में 200 एकड़ में अब भी भरा पानी, किसान मजबूरन करने लगे मछली पालन
Wed, 07 Jan 2026 01:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 07 Jan 2026 01:23 AM IST
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महम। गांव भैणी भैरों की 200 एकड़ जमीन पर अब भी पानी भरा हुआ है। इसकी वजह से गेहूं की बिजाई नहीं हो पाई है। गेहूं की बिजाई नहीं कर पाने की वजह से इन जमीनों पर किसान अब मछली पालन करने के लिए विवश हैं।
पूर्व सरपंच रोहतास पहलवान, डॉ. सुनील रांगी, धर्मबीर, राजा, कृष्ण, जगबीर, विक्की ने बताया कि बारिश के बाद खेतों में जलभराव बना हुआ है। बारिश के पानी की निकासी नहीं हो सकी है। परिणाम यह हुआ कि अभी तक भी खेतों में दो से तीन फीट पानी भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि गांव की लगभग 200 एकड़ जमीन पर पानी भरा हुआ है।
पानी की निकासी का कार्य अब भी जारी है। आठ मोटर अब भी पानी की निकासी में लगी हुई हैं। गेहूं की पछेती किस्म की बुवाई दिसंबर लास्ट तक हो सकती है। पानी अधिक होने के कारण बुवाई नहीं हो सकी। खेतों में भरे पानी में जंगली मछलियों की भरमार है। किसानों का कहना है कि खेतों में दूर-दूर से मछलियां खाने वाले पक्षी अपना डेरा जमा लिए हैं।
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मछलियां ज्यादा होने की स्थिति में किसानों ने अब मछली पालन शुरू कर दिया है। किसानों ने बताया कि मछली निकालने वाले आने लगे हैं। प्रति एकड़ किसानों को पैसे भी दे रहे हैं। उन्होेंने बताया कि जलभराव के कारण न तो धान की फसल हो सकी और न ही गेहूं की बिजाई हुई। मजबूर होकर अब मछली पालन शुरू कर दिए हैं।
जिस किसान के खेत में ज्यादा मछली हैं उनको मछली पकड़ने वाला प्रति एकड़ 8 हजार रुपये दे रहे हैं। किसानों की मांग है कि खेतों में भरे पानी को निकालने के लिए स्थायी समाधान करें ताकि वे फसल की बिजाई कर सकें।
फोटो 01 भैणी भैरों के खेतों में जलभराव की स्थिति। संवाद
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पूर्व सरपंच रोहतास पहलवान, डॉ. सुनील रांगी, धर्मबीर, राजा, कृष्ण, जगबीर, विक्की ने बताया कि बारिश के बाद खेतों में जलभराव बना हुआ है। बारिश के पानी की निकासी नहीं हो सकी है। परिणाम यह हुआ कि अभी तक भी खेतों में दो से तीन फीट पानी भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि गांव की लगभग 200 एकड़ जमीन पर पानी भरा हुआ है।
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पानी की निकासी का कार्य अब भी जारी है। आठ मोटर अब भी पानी की निकासी में लगी हुई हैं। गेहूं की पछेती किस्म की बुवाई दिसंबर लास्ट तक हो सकती है। पानी अधिक होने के कारण बुवाई नहीं हो सकी। खेतों में भरे पानी में जंगली मछलियों की भरमार है। किसानों का कहना है कि खेतों में दूर-दूर से मछलियां खाने वाले पक्षी अपना डेरा जमा लिए हैं।
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मछलियां ज्यादा होने की स्थिति में किसानों ने अब मछली पालन शुरू कर दिया है। किसानों ने बताया कि मछली निकालने वाले आने लगे हैं। प्रति एकड़ किसानों को पैसे भी दे रहे हैं। उन्होेंने बताया कि जलभराव के कारण न तो धान की फसल हो सकी और न ही गेहूं की बिजाई हुई। मजबूर होकर अब मछली पालन शुरू कर दिए हैं।
जिस किसान के खेत में ज्यादा मछली हैं उनको मछली पकड़ने वाला प्रति एकड़ 8 हजार रुपये दे रहे हैं। किसानों की मांग है कि खेतों में भरे पानी को निकालने के लिए स्थायी समाधान करें ताकि वे फसल की बिजाई कर सकें।
फोटो 01 भैणी भैरों के खेतों में जलभराव की स्थिति। संवाद