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बीएड कॉलेज छिनने के बाद एमडीयू और केयू का बिगड़ा अर्थशास्त्र, जींद यूनिवर्सिटी मालामाल 

Fri, 29 Apr 2016 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 29 Apr 2016 02:18 AM IST
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BEd college after losing MDU and KU impaired Economics , University of Jind rich
- फोटो : Demo pic
प्रदेश की तीन यूनिवर्सिटी को 524 बीएड कॉलेज छिनने के बाद बड़ा झटका लगा है। इससे एमडीयू रोहतक, कुरुक्षेत्र और सिरसा यूनिवर्सिटी का अर्थशास्त्र बिगड़ेगा, हर साल लगभग 300 करोड़ का आर्थिक नुकसान होगा। वहीं, जींद यूनिवर्सिटी मालामाल होगी। इस फैसले के बाद तीनों यूनिवर्सिटी का भविष्य भी सुरक्षित नजर नहीं आ रहा है। 
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प्रदेश में 524 बीएड कॉलेज हैं, जिसमें एमडीयू के अंतर्गत 327, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में 167 और चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी सिरसा के अंतर्गत 30 कॉलेज आते हैं। चार दिन पूर्व सरकार ने सभी बीएड कॉलेजों को जींद के चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के अधीन कर दिया। इसके लिए संबंधित यूनिवर्सिटी को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है।
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एक साथ इतने अधिक कॉलेज छिनने के बाद तीनों यूनिवर्सिटी को बड़ा झटका लगा है। हालांकि सबसे बड़ा झटका एमडीयू को ही लगा है। इन कॉलेजों से होने वाली आमदनी पर नजर डालें तो अकेले एमडीयू को वर्ष भर में लगभग 200 करोड़ रुपये की कमाई होती है। जबकि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को लगभग 80 करोड़ और सिरसा की चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी को करीब 20 करोड़ की आय होती थी। उधर, यह फैसला आने के बाद जींद यूनिवर्सिटी के अधिकारी पिछले दो दिनों से एमडीयू में पहुंचकर रिकार्ड भी मांग रहे हैं। हालांकि अभी कोई रिकार्ड नहीं दिया गया है। 
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कुछ यूं समझें नुकसान का गणित
एमडीयू से संबद्ध बीएड कॉलेजों से होने वाली आमदनी को देखें तो हर कॉलेज को वर्ष में एक बार पचास हजार रुपये संबद्धता फीस देनी होती है। इसके अलावा प्रति छात्र रजिस्ट्रेशन फीस, काउंसिलिंग फीस और अन्य मद में भी फीस ली जाती है। यूनिवर्सिटी के पास आमदनी का सबसे बड़ा जरिया कॉलेजों पर लगने वाला जुर्माना है। क्योंकि अधिकतर कॉलेज नियम का पालन नहीं कर पाते, ऐसे में वे भारी-भरकम जुर्माना राशि भरते हैं। ध्यान रहे कि कुछ दिन पहले एक कॉलेज पर 45 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

यह है प्रदेश में बीएड का हाल, 46 फीसदी सीटें खाली 
प्रदेश भर के कॉलेजों में बीएड की 60672 सीटें हैं, जिसमें मौजूदा सत्र में लगभग 32811 सीटें ही भरी हैं, यानी फिलहाल करीब 46 फीसदी सीटें खाली हैं। इतनी सीटें खाली होने के बाद भी कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी को अच्छी आमदनी होती है। हालांकि अब बीएड का क्रेज कम होता जा रहा है, इसके पीछे बड़ा कारण बीएड को दो साल का किया जाना माना जा रहा है। 

तीन यूनिवर्सिटी को होगा घाटा तो एक होगी मालामाल
जींद यूनिवर्सिटी की बात करें तो अभी वहां पर फैकल्टी से लेकर संसाधनों की बेहद कमी है, जो नियमों को भी पूरा नहीं करती। ऐसे में माना जा रहा है कि जींद यूनिवर्सिटी को विकसित करने के लिए बीएड कॉलेज उसे दिए गए हैं। 


प्रदेश सरकार के इस फैसले से यूनिवर्सिटी को भारी नुकसान होगा। यही हाल रहा तो आने वाले समय में स्टाफ की तनख्वाह भी मुश्किल होगी। हालांकि अभी तक जींद यूनिवर्सिटी को रिकार्ड सौंपने के आदेश नहीं मिले हैं। 
- प्रो. सेवा सिंह दहिया, डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल एमडीयू।
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