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Rohtak News: डीएलसी सुपवा में बेकेट के कालजयी नाटक वेटिंग फॉर गोडोट का हुआ मंचन
Fri, 23 May 2025 12:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 23 May 2025 12:44 AM IST
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22सीटीके26-डीएलसी सुपवा में नाटक में अभिनय करते छात्र। स्रोत:सुपवा
रोहतक। डीएलसी सुपवा (दादा लखमी चांद स्टेट युनिवर्सिटी ऑफ़ परफोर्मिंग और विसुअल आर्ट्स) के फिल्म व टेलीविजन संकाय के अभिनय विभाग ने वीरवार को आयरिश नाटककार सैमुअल बेकेट के कालजयी नाटक ''वेटिंग फॉर गोडोट'' का मंचन हुआ।
विश्वविद्यालय के मिनी ऑडिटोरियम में हुआ यह पहला प्रदर्शन दर्शकों के लिए एक गहन अनुभव रहा, इसमें छात्रों के उत्कृष्ट अभिनय को भरपूर सराहना मिली। इस नाटक के आगामी प्रदर्शन 23 और 24 मई को शाम 4:30 बजे होंगे।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की पूर्व छात्रा डॉ. सविता रानी की ओर से निर्देशित इस प्रस्तुति में डीएलसी सुपवा के छठे सेमेस्टर के चार विद्यार्थियों ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। व्लादिमीर और एस्ट्रागन जैसे पात्रों के माध्यम से यह नाटक मानव अस्तित्व की निरर्थकता, समय की अस्थिरता और जीवन के अर्थ की तलाश जैसे गहन दार्शनिक विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।
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कुलपति प्रो. प्रकाश ने सभी छात्रों व शिक्षकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति न केवल कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती है, बल्कि गहरे दार्शनिक विचारों से भी परिपूर्ण है, जो छात्रों और संकाय की निरंतर विकसित होती गुणवत्ता का प्रमाण है।
कार्यक्रम समन्वयक और अभिनय विभाग के सहायक प्रोफेसर दुष्यंत ने इस अवसर को छात्रों के लिए एक दुर्लभ अनुभव बताया, जहां उन्हें अस्तित्व, समय और पहचान जैसे प्रश्नों पर बौद्धिक यात्रा करने का अवसर मिला। कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक ने भी विश्वविद्यालय की रचनात्मक और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दोहराया।
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विश्वविद्यालय के मिनी ऑडिटोरियम में हुआ यह पहला प्रदर्शन दर्शकों के लिए एक गहन अनुभव रहा, इसमें छात्रों के उत्कृष्ट अभिनय को भरपूर सराहना मिली। इस नाटक के आगामी प्रदर्शन 23 और 24 मई को शाम 4:30 बजे होंगे।
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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की पूर्व छात्रा डॉ. सविता रानी की ओर से निर्देशित इस प्रस्तुति में डीएलसी सुपवा के छठे सेमेस्टर के चार विद्यार्थियों ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। व्लादिमीर और एस्ट्रागन जैसे पात्रों के माध्यम से यह नाटक मानव अस्तित्व की निरर्थकता, समय की अस्थिरता और जीवन के अर्थ की तलाश जैसे गहन दार्शनिक विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।
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कुलपति प्रो. प्रकाश ने सभी छात्रों व शिक्षकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति न केवल कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती है, बल्कि गहरे दार्शनिक विचारों से भी परिपूर्ण है, जो छात्रों और संकाय की निरंतर विकसित होती गुणवत्ता का प्रमाण है।
कार्यक्रम समन्वयक और अभिनय विभाग के सहायक प्रोफेसर दुष्यंत ने इस अवसर को छात्रों के लिए एक दुर्लभ अनुभव बताया, जहां उन्हें अस्तित्व, समय और पहचान जैसे प्रश्नों पर बौद्धिक यात्रा करने का अवसर मिला। कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक ने भी विश्वविद्यालय की रचनात्मक और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दोहराया।