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Rohtak News: इलाज के लिए आयुष्मान कार्डधारकों ने किया पीजीआई का रुख
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रोहतक। त्वचा रोग से पीड़ित राकेश कुमार सोमवार को करीब डेढ़ घंटे तक इलाज के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा। कहीं इलाज न मिलने पर आयुष्मान कार्डधारक सिविल अस्पताल पहुंचा। यहां ओपीडी कार्ड बनवा कर चिकित्सक से मिला। इलाज मिलने पर उसे राहत पहुंची। यह अकेला ऐसा नहीं था, बल्कि और भी मरीज थे, जो निजी अस्पताल में निशुल्क इलाज न मिलने पर या तो सिविल अस्पताल पहुंचे या पीजीआई गए। अमर उजाला ने ऐसे मरीजों से बातचीत की तो उन्होंने निजी अस्पताल में इलाज नह मिलने का दर्द सुनाया।
पेट में काफी समय से दिक्कत है। कई जगह इलाज कराया मगर, राहत नहीं मिली। आयुष्मान कार्ड के तहत निशुल्क इलाज होता है। इसलिए बड़े निजी अस्पताल में इलाज के लिए रोहतक आया हूं। यहां कई अस्पतालों में गया। कहीं कार्ड काम नहीं करता तो कहीं डॉक्टर ने कार्ड पर इलाज से मना कर दिया। इसलिए पीजीआई आया हूं। यहां अपनी बारी का इंतजार है।
सुरेश, झज्जर।
सिर में कई दिनों से तकलीफ है। दर्द से हालत खराब होने के कारण कई डॉक्टरों को दिखाया। कहीं से भी आराम नहीं मिला। आयुष्मान कार्ड से निजी अस्पताल में इलाज की उम्मीद में राेहतक आया। यहां न कार्ड चला न इलाज मिला। निजी अस्पताल में डेढ़ घंटे इंतजार के बाद पीजीआई जा रहा हूं। ओपीडी में भी काफी भीड़ है। पता नहीं कब नंबर आएगा।
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राजकुमार, गोहाना।
मांगें पूरी नहीं होने तक जारी रहेगा विरोध
आईएमए अपनी मांगों को लेकर अडिग है। सरकार आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल संचालकों को उनका बकाए रुपये जारी करे। साथ ही नए राहतपूर्ण प्रावधान करे। ये मांगें पूरी न होने तक विरोध जारी रहेगा। फिलहाल एसोसिएशन इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है। मरीजों को कुछ दिक्कत होगी, मगर वे सरकारी संस्थाओं में जा सकते हैं। बगैर कार्ड स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं। पैनल वाले अस्पताल कार्ड से इलाज नहीं करेंगे। एसोसिएशन के सभी सदस्य साथ हैं।
डॉ. रविंद्र हुड्डा, अध्यक्ष, आईएमए।
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पेट में काफी समय से दिक्कत है। कई जगह इलाज कराया मगर, राहत नहीं मिली। आयुष्मान कार्ड के तहत निशुल्क इलाज होता है। इसलिए बड़े निजी अस्पताल में इलाज के लिए रोहतक आया हूं। यहां कई अस्पतालों में गया। कहीं कार्ड काम नहीं करता तो कहीं डॉक्टर ने कार्ड पर इलाज से मना कर दिया। इसलिए पीजीआई आया हूं। यहां अपनी बारी का इंतजार है।
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सुरेश, झज्जर।
सिर में कई दिनों से तकलीफ है। दर्द से हालत खराब होने के कारण कई डॉक्टरों को दिखाया। कहीं से भी आराम नहीं मिला। आयुष्मान कार्ड से निजी अस्पताल में इलाज की उम्मीद में राेहतक आया। यहां न कार्ड चला न इलाज मिला। निजी अस्पताल में डेढ़ घंटे इंतजार के बाद पीजीआई जा रहा हूं। ओपीडी में भी काफी भीड़ है। पता नहीं कब नंबर आएगा।
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राजकुमार, गोहाना।
मांगें पूरी नहीं होने तक जारी रहेगा विरोध
आईएमए अपनी मांगों को लेकर अडिग है। सरकार आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल संचालकों को उनका बकाए रुपये जारी करे। साथ ही नए राहतपूर्ण प्रावधान करे। ये मांगें पूरी न होने तक विरोध जारी रहेगा। फिलहाल एसोसिएशन इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है। मरीजों को कुछ दिक्कत होगी, मगर वे सरकारी संस्थाओं में जा सकते हैं। बगैर कार्ड स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं। पैनल वाले अस्पताल कार्ड से इलाज नहीं करेंगे। एसोसिएशन के सभी सदस्य साथ हैं।
डॉ. रविंद्र हुड्डा, अध्यक्ष, आईएमए।