{"_id":"61ccb7eebcb77750a47d8ed8","slug":"apart-from-delhi-samples-will-also-be-sent-to-mdu-for-identification-of-omicron-variant-rohtak-news-rtk634260229","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओमिक्रॉन वैरिएंट की पहचान के लिए दिल्ली के अलावा एमडीयू भी भेजे जाएंगे सैंपल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओमिक्रॉन वैरिएंट की पहचान के लिए दिल्ली के अलावा एमडीयू भी भेजे जाएंगे सैंपल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संजय कुमार
रोहतक। ओमिक्रॉन की पहचान के लिए मरीजों का सैंपल अब दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीगेटिव बायोलॉजी लैब (आईजीआईबी) भेजने के साथ एमडीयू की आर्यभट्ट सेंट्रल इंस्ट्रृमेंटेशन लेबोरेटरी (सीआईएल) में भेजा जाएगा। यहां दो से तीन दिन में सैंपल से कोरोना के नए वैरिएंट का पता लगाया जा सकेगा। यह व्यवस्था ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट की जल्द पहचान कर संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने व मरीज का उपचार करने के लिए की गई है। इसके साथ ही जिले के सैंपलों को अधिक समय रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना पडे़गा।
पीजीआईएमएस रोहतक में जिले के अलावा एनसीआर व प्रदेश भर से कोरोना के गंभीर मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में पीजीआईएमएस में विभिन्न वैरिएंट के मरीजों के होने की आशंका बनी रहती है। अभी तक संस्थान मरीजों के सैंपल दिल्ली भेज रहा था। लेकिन अब मरीजों के सैंपल जांच के लिए एमडीयू की सीआईएल लैब भी भेजे जाएंगे। एमडीयू में जांच के लिए किट का इंतजार है, यहां सिक्वेंसर आ गया है जो जीनोम सिक्वेंसिंग करेगा। इसमें डीएनए ले कर मैच किया जाएगा और आसानी से वायरस के नए वैरिएंट का पता चल पाएगा। लैब में डीएनए के चार सिक्वेंस एडेनिन (ए), थाइमिन (टी), ग्वानिन (जी) और साइटोसिन (सी) का पता लगाया जा सकता है। संस्थान के पास मौजूद संसाधन में 48 से 55 सैंपल की एक साथ जांच की जा सकती है।
एमडीयू से पास आउट रिसर्च स्कॉलर कर रहे पीजीआईएमएस में जांच
एमडीयू से पास आउट रिसर्च स्कॉलर पीजीआईएमएस की वायरोलॉजी लैब में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच भी कर रहे हैं। अब यह जिम्मेदारी संस्थान के रिसर्च स्कालरों के अलावा विभाग के सीनियरों पर होगी। पहले भी एमडीयू जांचों में पीजीआईएमएस की मदद करता आ रहा है।
विज्ञापन
सीआईएल लैब को चाहिए एक बार में 50 के करीब सैंपल
एमडीयू की सीआईएल लैब को चालू करने के लिए एक बार में 50 के करीब सैंपल चाहिए। क्योंकि सिस्टम को शुरू करने में एक बार में जो खर्च आता है वह कम या अधिक नहीं हो सकता। इसमें लैब चाहे एक सैंपल की जांच करे या 50 की। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के लिए आवश्यक होगा कि वह प्रदेश के अन्य जिलों के सैंपल भी एमडीयू भिजवाएं ताकि रिजेंट (केमिकल) की बर्बादी न हो।
एमडीयू की सीआईएल लैब वायरस के किसी भी वैरिएंट की पहचान करने में सक्षम है। यहां पर जीन सिक्वेंसर उपलब्ध है, रिजेंट किट के आने का इंतजार है। अभी तय होना है कि जांच के लिए पीजीआईएमएस सहयोग करेगा या हमें अपने स्तर पर करना है।
- डॉ. जय प्रकाश यादव, डीन फैकेल्टी ऑफ लाइफ साइंस
विज्ञापन
रोहतक। ओमिक्रॉन की पहचान के लिए मरीजों का सैंपल अब दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीगेटिव बायोलॉजी लैब (आईजीआईबी) भेजने के साथ एमडीयू की आर्यभट्ट सेंट्रल इंस्ट्रृमेंटेशन लेबोरेटरी (सीआईएल) में भेजा जाएगा। यहां दो से तीन दिन में सैंपल से कोरोना के नए वैरिएंट का पता लगाया जा सकेगा। यह व्यवस्था ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट की जल्द पहचान कर संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने व मरीज का उपचार करने के लिए की गई है। इसके साथ ही जिले के सैंपलों को अधिक समय रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना पडे़गा।
पीजीआईएमएस रोहतक में जिले के अलावा एनसीआर व प्रदेश भर से कोरोना के गंभीर मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में पीजीआईएमएस में विभिन्न वैरिएंट के मरीजों के होने की आशंका बनी रहती है। अभी तक संस्थान मरीजों के सैंपल दिल्ली भेज रहा था। लेकिन अब मरीजों के सैंपल जांच के लिए एमडीयू की सीआईएल लैब भी भेजे जाएंगे। एमडीयू में जांच के लिए किट का इंतजार है, यहां सिक्वेंसर आ गया है जो जीनोम सिक्वेंसिंग करेगा। इसमें डीएनए ले कर मैच किया जाएगा और आसानी से वायरस के नए वैरिएंट का पता चल पाएगा। लैब में डीएनए के चार सिक्वेंस एडेनिन (ए), थाइमिन (टी), ग्वानिन (जी) और साइटोसिन (सी) का पता लगाया जा सकता है। संस्थान के पास मौजूद संसाधन में 48 से 55 सैंपल की एक साथ जांच की जा सकती है।
विज्ञापन
एमडीयू से पास आउट रिसर्च स्कॉलर कर रहे पीजीआईएमएस में जांच
एमडीयू से पास आउट रिसर्च स्कॉलर पीजीआईएमएस की वायरोलॉजी लैब में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच भी कर रहे हैं। अब यह जिम्मेदारी संस्थान के रिसर्च स्कालरों के अलावा विभाग के सीनियरों पर होगी। पहले भी एमडीयू जांचों में पीजीआईएमएस की मदद करता आ रहा है।
विज्ञापन
सीआईएल लैब को चाहिए एक बार में 50 के करीब सैंपल
एमडीयू की सीआईएल लैब को चालू करने के लिए एक बार में 50 के करीब सैंपल चाहिए। क्योंकि सिस्टम को शुरू करने में एक बार में जो खर्च आता है वह कम या अधिक नहीं हो सकता। इसमें लैब चाहे एक सैंपल की जांच करे या 50 की। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के लिए आवश्यक होगा कि वह प्रदेश के अन्य जिलों के सैंपल भी एमडीयू भिजवाएं ताकि रिजेंट (केमिकल) की बर्बादी न हो।
एमडीयू की सीआईएल लैब वायरस के किसी भी वैरिएंट की पहचान करने में सक्षम है। यहां पर जीन सिक्वेंसर उपलब्ध है, रिजेंट किट के आने का इंतजार है। अभी तय होना है कि जांच के लिए पीजीआईएमएस सहयोग करेगा या हमें अपने स्तर पर करना है।
- डॉ. जय प्रकाश यादव, डीन फैकेल्टी ऑफ लाइफ साइंस