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क्लीनिकल के अलावा बेसिक व प्री-क्लीनिक वाले भी देखेंगे मरीज

Sat, 17 Jul 2021 01:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jul 2021 01:51 AM IST
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Apart from clinical, patients with basic and pre-clinic will also see
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टरों को कॉमन कैडर में किए जाने का मामला अभी सुलझा भी नहीं है कि पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉक्टर एक नए विवाद में उलझ गए हैं। चंडीगढ़ से प्रशासनिक अधिकारियों ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस के समानांतर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में तैनात बेसिक व प्री-क्लीनिक से संबंधित विभाग के डॉक्टरों को भी क्लीनिकल विभाग के डॉक्टरों की तरह मरीजों का उपचार करने को कहा है। इसके लिए डीएमईआर ने हेल्थ विवि रोहतक से डॉक्टरों का रोस्टर मांगा है।
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पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉक्टरों की डिटेल मांगी है और इसमें सभी का ड्यूटी रोस्टर मांगा गया है। डीएमईआर ने संस्थान से डॉक्टरों का रोस्टर मांगा है कि उनकी ड्यूटी कहां लगाई गई है और वह किन-किन विभागों से रहे हैं। हवाला दिया गया है कि जब सीएचसी, पीएचसी व जिला अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर मरीजों की जांच कर सकते हैं तो मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न विभागों के सीनियर डॉक्टर मरीजों का उपचार क्यों नहीं कर सकते। मेडिकल कॉलेजों में सर्जरी, ऑर्थो, मेडिसिन विभाग की तरह कई विभाग हैं जोकि सीधा मरीज का उपचार करते हैं। जबकि बेसिक में एनाटमी, फिजियोलॉजी, बॉयो कैमिस्ट्री जैसे विभाग हैं, जो क्लीनिकल काम नहीं करते हैं। ऐसे ही प्री क्लीनिकल में पैथोलॉजी, माइक्रो बॉयोलॉजी, फोरेंसिक मेडिसिन विभाग भी हैं जहां मरीजों की सीधा जांच नहीं होती। इसी को आधार बना कर प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि सभी डॉक्टरों की मरीजों को क्लीनिकल उपचार देने में आगे आना चाहिए। गौरतलब है कि नूंह मेवात में इस नियम का विरोध चल रहा है और पीजीआईएमएस में इसके घोषित होने का इंतजार किया जा रहा है।
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अब तक प्रशासनिक अधिकारी नहीं छेड़ते थे मेडिकल कॉलेज
प्रशासनिक अधिकारी अब तक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को स्वयं के स्तर पर नहीं छेड़ते थे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों की यहां पालना होती थी। अब प्रशासनिक अधिकारी मेडिकल कॉलेजों में नया नियम लागू करने जा रहे हैं। जबकि हेल्थ विवि से संबंधित फैसले लेने का अधिकार एग्जीक्यूटिव व शैक्षणिक काउंसिल की बैठक व राज्यपाल की सहमति का होना आवश्यक है। गौरतलब है कि अब यहां के मामलों में सीधा डीएमईआर हस्तक्षेप कर रहा है। डीएमईआर के पास सिर्फ हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस के तहत डॉक्टरों से संबंधित नियम बनाने की शक्ति है। अब तक चंडीगढ़ से जारी होने वाला पत्र जिला सिविल सर्जनों को भेजा जाता था। लेकिन अब यह पीजीआईएमएस व मेडिकल कॉलेजों को भी जारी हो रहा है।
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संस्थान में अभी ग्रीष्मावकाश चल रहा है। स्टाफ अभी छुट्टी पर हैं। जैसे ही सभी आएंगे मंथन करके अगली कार्रवाई तय की जाएगी। हेल्थ विश्वविद्यालय के नियम ईसी में बनते हैं और राज्यपाल से पास होते हैं।
- डॉ. आरबी जैन, प्रधान, हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन, पीजीआईएमएस
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