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Rohtak News: मेहनत की सीढ़ी चढ़कर आत्मनिर्भर बनीं अनीता
Mon, 01 Dec 2025 01:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 01 Dec 2025 01:42 AM IST
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42 मशीन से कपड़े पर बुटीक कला करती अनीता। संवाद
- फोटो : संवाद
रोहतक। मेहनत की सीढ़ी चढ़ कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। इसकी बानगी शहर के सैनीवास मोहल्ला निवासी अनीता ने पेश की है। दस साल पहले अनीता ने बुटीक कला को सफलता का पायदान बनाया और अब वे खुद के संसाधनों से 8000 रुपये प्रतिमाह आमदनी कर रही हैं।
वे दूसरी महिलाओं को भी बुटीक कला के प्रति प्रेरित कर रही हैं। आठवीं कक्षा तक पढ़ी अनीता बताती हैं कि वे फुलमदे स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। 2015 में वे इस स्वयं सहायता समूह से जुड़ी। वे बुटीक के जरिए हर रोज बेहतर कार्य करने का प्रयास कर रही हैं।
करीब 11 साल पहले उन्होंने परिवार की महिलाओं से ही बुटीक कला सीखी और फिर उसे ही अपना स्वरोजगार बना लिया। शुरुआत में उन्होंने हाथ ही मशीन से सिलाई की। उसके बाद उन्होंने मेहनत की और करीब दो साल पहले उन्होंने बड़ी मशीन खरीदी। अब उनको कामकाज बढ़ता चला गया। वे तीन से चार दूसरी महिलाओं को भी बुटीक कला सिखाई हैं। उनका कहना है कि स्वरोजगार का जज्बा हो तो रास्ते खुद ब खुद बन जाते हैं।
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वे दूसरी महिलाओं को भी बुटीक कला के प्रति प्रेरित कर रही हैं। आठवीं कक्षा तक पढ़ी अनीता बताती हैं कि वे फुलमदे स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। 2015 में वे इस स्वयं सहायता समूह से जुड़ी। वे बुटीक के जरिए हर रोज बेहतर कार्य करने का प्रयास कर रही हैं।
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करीब 11 साल पहले उन्होंने परिवार की महिलाओं से ही बुटीक कला सीखी और फिर उसे ही अपना स्वरोजगार बना लिया। शुरुआत में उन्होंने हाथ ही मशीन से सिलाई की। उसके बाद उन्होंने मेहनत की और करीब दो साल पहले उन्होंने बड़ी मशीन खरीदी। अब उनको कामकाज बढ़ता चला गया। वे तीन से चार दूसरी महिलाओं को भी बुटीक कला सिखाई हैं। उनका कहना है कि स्वरोजगार का जज्बा हो तो रास्ते खुद ब खुद बन जाते हैं।
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