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Rohtak News: छह साल बाद भी अमृत प्रोजेक्ट पूरा नहीं, एजेंसी ने मांगा 20 दिन का और समय
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नगर निगम छह साल बाद भी अमृत प्रोजेक्ट के तहत सीवर लाइन का काम पूरा नहीं कर सका है। शुक्रवार को निगम आयुक्त धर्मेंद्र ने नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग व निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ बैठक की। जनस्वास्थ्य विभाग ने सभी कमियां पूरी होने तक पूरा प्रोजेक्ट लेने से इन्कार कर दिया। निगम आयुक्त ने एजेंसी को 20 दिन में कमियां दूर करने की हिदायत दी है, ताकि प्रोजेक्ट के तहत बनी सीवर लाइन व एसटीपी नगर निगम की तरफ से जनस्वास्थ्य विभाग को सौंपी जा सकें।
साल 2015 में केंद्र सरकार ने प्रदेश में अमृत प्रोजेक्ट के तहत रोहतक शहर का चयन किया था। तीन साल की लंबी कागजी कार्रवाई के बाद 2018 में प्रोजेक्ट के तहत काम शुरू हुआ। प्रोजेक्ट को दो भागों में बांटा गया। प्रोजेक्ट के पहले भाग में शहर में सीवर सिस्टम व्यवस्थित करना था। इस पर अनुमानित लागत 155 करोड़ 21 लाख रुपये आंकी गई थी, लेकिन यह लागत बढ़कर बाद में 212.19 करोड़ से ज्यादा हो गई।
दूसरे भाग में प्रोजेक्ट के तहत 109 करोड़ की लागत से पेयजल लाइन, जलघर से लेकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने थे। दोनों प्रोजेक्ट का काम 18 माह में पूरा होना था, लेकिन सीवर लाइन का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। सीवर प्रोजेक्ट की समय सीमा चार बार बढ़ाई जा चुकी है। प्रोजेक्ट नगर निगम को पूरा करके जनस्वास्थ्य विभाग को सौंपना है। शुक्रवार को निगम आयुक्त ने अपने कार्यालय में नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग व निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ बैठक की।
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निगम आयुक्त ने एजेंसी के अधिकारियों से कहा कि सभी कार्यों की जांच करें, कोई भी सीवर हॉल लीकेज न हो, यदि कोई मैनहोल बनाया जाना है तो तुरंत बनाएं, यदि कहीं पर लेवल से संबंधित कार्य किया जाना है तो तुरंत करवाया जाए। ये कार्य दोनों विभागों के अधिकारियों की निगरानी में किए जाएं। इसके अतिरिक्त एजेंसी को यह भी आदेश किए गए कि 20 दिन के अंदर-अंदर सभी कार्य पूर्ण करवाएं। बैठक में निगम के कार्यकारी अभियंता मनदीप सिंह, सहायक अभियंता सुनील शर्मा, कनिष्ठ अभियंता नरेश कुमार, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कार्यालय से कार्यकारी अभियंता रोहित कुमार, एसडीओ प्रदीप व रोहित, कनिष्ठ अभियंता शशि वर्मा व अजय व निर्माण एजेंसी के अधिकारी भी मौजूद रहे।
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साल 2015 में केंद्र सरकार ने प्रदेश में अमृत प्रोजेक्ट के तहत रोहतक शहर का चयन किया था। तीन साल की लंबी कागजी कार्रवाई के बाद 2018 में प्रोजेक्ट के तहत काम शुरू हुआ। प्रोजेक्ट को दो भागों में बांटा गया। प्रोजेक्ट के पहले भाग में शहर में सीवर सिस्टम व्यवस्थित करना था। इस पर अनुमानित लागत 155 करोड़ 21 लाख रुपये आंकी गई थी, लेकिन यह लागत बढ़कर बाद में 212.19 करोड़ से ज्यादा हो गई।
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दूसरे भाग में प्रोजेक्ट के तहत 109 करोड़ की लागत से पेयजल लाइन, जलघर से लेकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने थे। दोनों प्रोजेक्ट का काम 18 माह में पूरा होना था, लेकिन सीवर लाइन का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। सीवर प्रोजेक्ट की समय सीमा चार बार बढ़ाई जा चुकी है। प्रोजेक्ट नगर निगम को पूरा करके जनस्वास्थ्य विभाग को सौंपना है। शुक्रवार को निगम आयुक्त ने अपने कार्यालय में नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग व निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ बैठक की।
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निगम आयुक्त ने एजेंसी के अधिकारियों से कहा कि सभी कार्यों की जांच करें, कोई भी सीवर हॉल लीकेज न हो, यदि कोई मैनहोल बनाया जाना है तो तुरंत बनाएं, यदि कहीं पर लेवल से संबंधित कार्य किया जाना है तो तुरंत करवाया जाए। ये कार्य दोनों विभागों के अधिकारियों की निगरानी में किए जाएं। इसके अतिरिक्त एजेंसी को यह भी आदेश किए गए कि 20 दिन के अंदर-अंदर सभी कार्य पूर्ण करवाएं। बैठक में निगम के कार्यकारी अभियंता मनदीप सिंह, सहायक अभियंता सुनील शर्मा, कनिष्ठ अभियंता नरेश कुमार, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कार्यालय से कार्यकारी अभियंता रोहित कुमार, एसडीओ प्रदीप व रोहित, कनिष्ठ अभियंता शशि वर्मा व अजय व निर्माण एजेंसी के अधिकारी भी मौजूद रहे।