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Rohtak News: अनदेखी के चलते अमृत वन बना नासूर, अब टू से उम्मीद
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संजय कुमार
रोहतक। शहर के जलघर एक के तहत आने वाली तकरीबन ढाई लाख की आबादी के लिए अमृत वन प्रोजेक्ट नासूर बन गया है। अब अमृत योजना टू का इंतजार है ताकि अधूरा प्रोजेक्ट पूरा हो सके।
जन स्वास्थ्य एंव अभियांत्रिकी विभाग ने बोहर जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) व भालौठ सब ब्रांच (बीएसबी) नहर से सोनीपत स्टैंड जल घर एक तक पानी लाने के लिए 2.28 करोड़ का टेंडर जारी किया। इसमें पाइपलाइन बिछानी थी। लेकिन सात साल बाद भी यह अधूरा प्रोजेक्ट अधिकारियों की अनदेखी को दर्शा रहा है। विभाग ने अंबाला के ठेकेदार को इस प्रोजेक्ट में क्लास टू व क्लास थ्री लगा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है। जबकि हकीकत है कि अव्यवस्था के चलते जलघर के टैंकों तक पूरा पानी नहीं पहुंच पाता और जनता परेशान होती है।
शहरी आबादी की पेयजल जरूरतों का पूरा करने के लिए विभाग ने लगभग सात साल पहले अनूठा प्रोजेक्ट तैयार किया। खुले रजवाहे को पाइप लाइन में बदल दिया और यह नहीं सोचा की नहरी पानी में आने वाली गंदगी कहां साफ होगी। प्रोजेक्ट के तहत आधी लाइन बिछा दी गई और आधी लाइन नहीं बिछाई गई। जबकि ठेकेदार ने सारी पाइपलाइन मंगा ली थी। इसमें तकनीकी कमियों के चलते काम को रोका गया। कभी पाइपलाइन में जमा हो रही गंदगी काम रुकने का बहाना बना तो कभी नहर का अधिक दिन बंद न किया जाना रहा। हालांकि सवाल उठाया गया कि जब आधी पाइप लाइन बिछा दी गई तो पूरी बिछाने में क्या आपत्ति है। आपसी खींचतान व अव्यवस्थाओं के चलते प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया।
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विभाग के अभियंता सवाल उठा रहे थे कि पाइपलाइन में एक ही जगह सिल्ट कैचर (मिट्टी रोकने का यंत्र) लगाया जा रहा है, जबकि यह 500-500 मीटर की दूरी पर होना चाहिए। अव्वल तो यह डिजाइन ही गलत बनाया गया था। एक सेवानिवृत उपमंडल अभियंता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट का विरोध किया था, लेकिन इसे थोपा गया। नहरी पानी को कवर पाइप लाइन से लाने में अधिक ध्यान देने, सफाई करने की जरूरत है। नहर में अकसर सिल्ट अधिक होती है, पाइप में इसे साफ करना आसान नहीं होता। वहीं ठेकेदार की आधी पाइपलाइन इधर-उधर रखने में टूट चुकी हैं। अब इन्हें किसी काम में नहीं लिया जा सकता।
आधे शहर की आबादी की प्यास बुझाता है जलघर एक
1931 में बना जल घर एक शहर की लगभग आधी आबादी की प्यास बुझाता है। इसकी क्षमता 27.24 एमएलडी है। शीला बाईपास चौक होते हुए जेएलएन कैनाल फीडर से सोनीपत रोड स्थित जलघर एक के लिए पेयजल आपूर्ति होती है। करीब चार किलोमीटर की लंबाई वाला यह रजवाहा आज भी आधा खुला है और आधा ईंटों से पक्का बना है। रजवाहा खुला होने के कारण लोग इसमें कपड़े धोते हैं। स्नान करने के साथ यह पशुओं का तालाब भी बना है।
रेक्टेंगल होना चाहिए था प्रोजेक्ट
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रोजेक्ट रेक्टेंगल होना चाहिए था। इसमें तीन-तीन फुट पर स्लैब डालनी थी। इससे सफाई करना आसान होता। पाइप लाइन बिछाने से बजट खर्च हुआ और समस्या का समाधान भी नहीं हुआ। कवर रजवाहे की सफाई के लिए जगह-जगह जगह होनी चाहिए।
नहर से जलघर तक पेयजल आपूर्ति के लिए रजवाहा का कार्य अभी अधूरा है। इस प्रोजेक्ट को अमृत टू में पूरा किया जाएगा। फिलहाल इसके ठेकेदार पर क्लास टू व थ्री के तहत कार्रवाई की गई है।
- राजेश कुमार, उप मंडल अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
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रोहतक। शहर के जलघर एक के तहत आने वाली तकरीबन ढाई लाख की आबादी के लिए अमृत वन प्रोजेक्ट नासूर बन गया है। अब अमृत योजना टू का इंतजार है ताकि अधूरा प्रोजेक्ट पूरा हो सके।
जन स्वास्थ्य एंव अभियांत्रिकी विभाग ने बोहर जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) व भालौठ सब ब्रांच (बीएसबी) नहर से सोनीपत स्टैंड जल घर एक तक पानी लाने के लिए 2.28 करोड़ का टेंडर जारी किया। इसमें पाइपलाइन बिछानी थी। लेकिन सात साल बाद भी यह अधूरा प्रोजेक्ट अधिकारियों की अनदेखी को दर्शा रहा है। विभाग ने अंबाला के ठेकेदार को इस प्रोजेक्ट में क्लास टू व क्लास थ्री लगा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है। जबकि हकीकत है कि अव्यवस्था के चलते जलघर के टैंकों तक पूरा पानी नहीं पहुंच पाता और जनता परेशान होती है।
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शहरी आबादी की पेयजल जरूरतों का पूरा करने के लिए विभाग ने लगभग सात साल पहले अनूठा प्रोजेक्ट तैयार किया। खुले रजवाहे को पाइप लाइन में बदल दिया और यह नहीं सोचा की नहरी पानी में आने वाली गंदगी कहां साफ होगी। प्रोजेक्ट के तहत आधी लाइन बिछा दी गई और आधी लाइन नहीं बिछाई गई। जबकि ठेकेदार ने सारी पाइपलाइन मंगा ली थी। इसमें तकनीकी कमियों के चलते काम को रोका गया। कभी पाइपलाइन में जमा हो रही गंदगी काम रुकने का बहाना बना तो कभी नहर का अधिक दिन बंद न किया जाना रहा। हालांकि सवाल उठाया गया कि जब आधी पाइप लाइन बिछा दी गई तो पूरी बिछाने में क्या आपत्ति है। आपसी खींचतान व अव्यवस्थाओं के चलते प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया।
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विभाग के अभियंता सवाल उठा रहे थे कि पाइपलाइन में एक ही जगह सिल्ट कैचर (मिट्टी रोकने का यंत्र) लगाया जा रहा है, जबकि यह 500-500 मीटर की दूरी पर होना चाहिए। अव्वल तो यह डिजाइन ही गलत बनाया गया था। एक सेवानिवृत उपमंडल अभियंता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट का विरोध किया था, लेकिन इसे थोपा गया। नहरी पानी को कवर पाइप लाइन से लाने में अधिक ध्यान देने, सफाई करने की जरूरत है। नहर में अकसर सिल्ट अधिक होती है, पाइप में इसे साफ करना आसान नहीं होता। वहीं ठेकेदार की आधी पाइपलाइन इधर-उधर रखने में टूट चुकी हैं। अब इन्हें किसी काम में नहीं लिया जा सकता।
आधे शहर की आबादी की प्यास बुझाता है जलघर एक
1931 में बना जल घर एक शहर की लगभग आधी आबादी की प्यास बुझाता है। इसकी क्षमता 27.24 एमएलडी है। शीला बाईपास चौक होते हुए जेएलएन कैनाल फीडर से सोनीपत रोड स्थित जलघर एक के लिए पेयजल आपूर्ति होती है। करीब चार किलोमीटर की लंबाई वाला यह रजवाहा आज भी आधा खुला है और आधा ईंटों से पक्का बना है। रजवाहा खुला होने के कारण लोग इसमें कपड़े धोते हैं। स्नान करने के साथ यह पशुओं का तालाब भी बना है।
रेक्टेंगल होना चाहिए था प्रोजेक्ट
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रोजेक्ट रेक्टेंगल होना चाहिए था। इसमें तीन-तीन फुट पर स्लैब डालनी थी। इससे सफाई करना आसान होता। पाइप लाइन बिछाने से बजट खर्च हुआ और समस्या का समाधान भी नहीं हुआ। कवर रजवाहे की सफाई के लिए जगह-जगह जगह होनी चाहिए।
नहर से जलघर तक पेयजल आपूर्ति के लिए रजवाहा का कार्य अभी अधूरा है। इस प्रोजेक्ट को अमृत टू में पूरा किया जाएगा। फिलहाल इसके ठेकेदार पर क्लास टू व थ्री के तहत कार्रवाई की गई है।
- राजेश कुमार, उप मंडल अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग