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Rohtak News: 30 साल बाद होगा होली पर अद्भुत संयोग, त्रिग्रही योग में मनेगी होली
Sat, 23 Mar 2024 04:27 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 23 Mar 2024 04:27 PM IST
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बहादुरगढ़। होली पर्व पर चंद्रमा सिंह राशि में गोचर करते हुए कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। मीन राशि में सूर्य, बुध और राहुल त्रिग्रही योजग में विराजमान होंगे। देवगुरु बृहस्पति मेष और शनि, मंगल और शुक्र कुंभ राशि में विराजमान होंगे। ज्योतिष के अनुसार 30 साल बाद इस बार होली पर अद्भुत संयोग बन रहा है।
मजीद मोहल्ला निवासी ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री ने बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि से यह अति संयोग अत्यधिक महत्वपूर्ण है। होलिका दहन शाम को गोधूलि बेला के समय शुरू होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हवा की दिशा से तय होगा कि आगामी एक वर्ष तक व्यापार, कृषि, वित्त, शिक्षा और रोजगार आदि के लिए कैसा होगा। दंत कथाओं के अनुसार होलिका जलने पर जिस दिशा की ओर धुआं उठता है। उससे भविष्य का हाल बताते हैं।
होलिका दहन की रात भी महारात्रि
होलिका दहन की रात को भी दीपावली और शिवरात्रि की भांति ही महारात्रि की श्रेणी में शामिल है। काठमंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित सियाराम ने बताया कि होलिका की राख को मस्तक पर लगाने का भी विधान है। ऐसा करने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। इस रात मंत्र जाप करने से मंत्र सिद्धि प्राप्त होती है।
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होलिका दहन के उत्तर व पूर्व दिशा में मुख कर होती है पूजा
होली की पूजा करने वाले व्यक्ति को उत्तर व पूर्व दिशा में मुख करके बैठना चाहिए। ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री ने बताया कि पूजा के लिए एक लौटा जल, फूल माला, गुलरियों की माला, चावल, गुड, सूत, हल्दी, गेहूं की बाली आदि पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है। पूजा करने के उपरांत होलिका को जल का अर्घ्य देकर चारों ओर परिक्रमा लगाई जाती है। सूत लपेटा जाता है। गोबर की गुलरियों से तैयार मालाओं के बीच में एक लकड़ी रखी जाती है। इसे प्रहलाद का रूप माना जाता है। दहन से पहले इसको निकाल लिया जाता है और इसे ऐसे स्थान पर छिपा दिया जाता है। इससे प्रहलाद के रूप में इसकी सुरक्षा हो सके।
होलिका दहन के मुहूर्त
दहन मुहूर्त : रात्रि 11:13 से रात्रि 12:33 तक।
पूजन मुहूर्त : सुबह 9 से 11 बजे तक।
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मजीद मोहल्ला निवासी ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री ने बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि से यह अति संयोग अत्यधिक महत्वपूर्ण है। होलिका दहन शाम को गोधूलि बेला के समय शुरू होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हवा की दिशा से तय होगा कि आगामी एक वर्ष तक व्यापार, कृषि, वित्त, शिक्षा और रोजगार आदि के लिए कैसा होगा। दंत कथाओं के अनुसार होलिका जलने पर जिस दिशा की ओर धुआं उठता है। उससे भविष्य का हाल बताते हैं।
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होलिका दहन की रात भी महारात्रि
होलिका दहन की रात को भी दीपावली और शिवरात्रि की भांति ही महारात्रि की श्रेणी में शामिल है। काठमंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित सियाराम ने बताया कि होलिका की राख को मस्तक पर लगाने का भी विधान है। ऐसा करने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। इस रात मंत्र जाप करने से मंत्र सिद्धि प्राप्त होती है।
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होलिका दहन के उत्तर व पूर्व दिशा में मुख कर होती है पूजा
होली की पूजा करने वाले व्यक्ति को उत्तर व पूर्व दिशा में मुख करके बैठना चाहिए। ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री ने बताया कि पूजा के लिए एक लौटा जल, फूल माला, गुलरियों की माला, चावल, गुड, सूत, हल्दी, गेहूं की बाली आदि पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है। पूजा करने के उपरांत होलिका को जल का अर्घ्य देकर चारों ओर परिक्रमा लगाई जाती है। सूत लपेटा जाता है। गोबर की गुलरियों से तैयार मालाओं के बीच में एक लकड़ी रखी जाती है। इसे प्रहलाद का रूप माना जाता है। दहन से पहले इसको निकाल लिया जाता है और इसे ऐसे स्थान पर छिपा दिया जाता है। इससे प्रहलाद के रूप में इसकी सुरक्षा हो सके।
होलिका दहन के मुहूर्त
दहन मुहूर्त : रात्रि 11:13 से रात्रि 12:33 तक।
पूजन मुहूर्त : सुबह 9 से 11 बजे तक।