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एआई शिक्षा क्षेत्र में तेजी से ला रहा बदलाव : प्रो. श्रीराम
Wed, 05 Aug 2026 07:42 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 05 Aug 2026 07:42 PM IST
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13-एमडीयू में एफडीपी के दौरान डॉ. श्री राम पांडे को स्मृति चिन्ह देते प्रो. मुनीश गर्ग व अन्य।
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर ने कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस विभाग व डीएवी शताब्दी कॉलेज, फरीदाबाद के सहयोग से बुधवार को फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत चार तकनीकी सत्र आयोजित किए।
इन सत्रों में शिक्षण, शोध और अकादमिक लेखन में एआई के प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। पहले सत्र में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. श्रीराम पांडे ने कहा कि एआई शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रहा है। इसे शिक्षक का विकल्प नहीं बल्कि सहयोगी तकनीक के रूप में अपनाना चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों से आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त एआई टूल्स का चयन करने का आह्वान किया। दूसरे सत्र में प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
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तीसरे सत्र में भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. एमएन होडा ने कहा कि शोध और अकादमिक लेखन में एआई उपयोगी सहायक साबित हो सकता है। उन्होंने साहित्य समीक्षा, शोध लेखन और संदर्भ सामग्री के विश्लेषण में एआई टूल्स के प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक तरीके भी बताए।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. मुनीश गर्ग ने बताया कि इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्देश्य शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के परिवर्तनकारी उपयोग से परिचित कराना और उन्हें नवीन तकनीकों के अनुरूप अपस्किल और अपग्रेड करना है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में देश के 22 राज्यों से 250 से अधिक शिक्षक उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर ने कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस विभाग व डीएवी शताब्दी कॉलेज, फरीदाबाद के सहयोग से बुधवार को फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत चार तकनीकी सत्र आयोजित किए।
इन सत्रों में शिक्षण, शोध और अकादमिक लेखन में एआई के प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। पहले सत्र में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. श्रीराम पांडे ने कहा कि एआई शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रहा है। इसे शिक्षक का विकल्प नहीं बल्कि सहयोगी तकनीक के रूप में अपनाना चाहिए।
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उन्होंने शिक्षकों से आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त एआई टूल्स का चयन करने का आह्वान किया। दूसरे सत्र में प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
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तीसरे सत्र में भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. एमएन होडा ने कहा कि शोध और अकादमिक लेखन में एआई उपयोगी सहायक साबित हो सकता है। उन्होंने साहित्य समीक्षा, शोध लेखन और संदर्भ सामग्री के विश्लेषण में एआई टूल्स के प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक तरीके भी बताए।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. मुनीश गर्ग ने बताया कि इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्देश्य शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के परिवर्तनकारी उपयोग से परिचित कराना और उन्हें नवीन तकनीकों के अनुरूप अपस्किल और अपग्रेड करना है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में देश के 22 राज्यों से 250 से अधिक शिक्षक उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।