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Rohtak News: आस्था का जोहड़ बना गाद का गड्ढा, चंदीगढ़ तक गुहार फिर भी समाधान नहीं

Sat, 31 Oct 2026 02:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2026 02:54 AM IST
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A pond of faith has turned into a silt-filled pit; pleas have reached as far as Chandigarh, yet there is still no solution.

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रोहित राठौर
रोहतक। कलानौर ब्लॉक के आंवल का पीलिया वाला तालाब (जोहड़) में कभी पीलिया ठीक होने की आस लेकर दूर-दराज से लोग पहुंचते थे जहां हर शनिवार मेले जैसा नजारा रहता था। ग्रामीण तालाब को अपनी आस्था का प्रतीक मानते हैं आज वही तालाब प्रशासन की अनदेखी से बदहाल है। शिकायतों और गुहार के बाद भी न तो अमृत सरोवर योजना के तहत संभाला गया न कोई विशेष प्रस्ताव बनाया गया। 35 साल से खुदाई और सफाई की बाट जोह रहे तालाब गंदगी और गाद से अटा पड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार, पीलिया वाला तालाब करीब 81 कनाल 13 मरले (करीब 10 एकड़) में फैला हुआ है। शनिवार को यहां मेले जैसा माहौल होता था लेकिन चारों ओर गंदगी और तालाब में भरी गाद के कारण अब लोग इस्तेमाल से परहेज करने लगे हैं। अन्य जगहों से आने वाले लोग भी गंदा पानी देखकर ही लौट जाते हैं।
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तालाब की आखिरी बार खोदाई 1991 में हुई थी। इसके बाद से कोई सफाई नहीं हुई। इसको लेकर 10 बार से अधिक लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। यहां तक कि चंडीगढ़ मुख्यालय में भी शिकायत की गई लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अमृत योजना में शामिल करने के लिए भी कई बार गुहार लगाई गई। सरपंच सुंदर बताते हैं कि उनके कार्यकाल के चार साल पूरे होने वाले हैं। वह 4 से 5 बार शिकायत दे चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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वर्जन
तालाब की खोदाई व सफाई का कार्य पंचायतों की ओर से स्वयं भी फंड के लिए अनुसार किया जाता है। आंवल गांव के तालाब का मामला संज्ञान में नहीं था। इसका जल्द की प्रस्ताव भेजकर खोदाई व सफाई का कार्य करवाया जाएगा।
- नवीन गोयत, कार्यकारी अभियंता, पंचायत विभाग।

फोटो : 03
जिस तालाब में लोग नहाने के लिए पहुंचते थे उसकी हालत खराब होना आस्था पर ठेस है। तालाब के अंदर काफी मात्रा में गाद है। चारों ओर कचरा पड़ा है। इसकी गाद निकलवाने के लिए प्रशासन कई बार मांग की जा चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकला।

- सुंदर, सरपंच, आंवल
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फोटो : 04
दूसरे गांवों में अमृत सरोवर के तहत तालाबों को संवारा गया लेकिन हमारे गांव के तालाब को छोड़ दिया गया। पिछले कार्यकाल में भी थोड़ी बहुत सफाई की उम्मीद थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। पहले शनिवार को भीड़ होती थी अब सिमटती जा रही है।
- नरेश कुमार, ग्रामीण एवं पूर्व पंचायत सदस्य।
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