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हरी सब्जियों के दाम उछले, टमाटर तीन गुना महंगा
Updated Wed, 05 Jul 2017 01:11 AM IST
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हरी सब्जियों के दाम उछले, टमाटर तीन गुना महंगा
चरखी दादरी।
पिछले दिनों लगातार हुई बारिश से सब्जियों के दामों में काफी उछाल आया है। बारिश की वजह से सब्जी की फसलें खराब होने पर इनकी कीमतें पिछले सप्ताह की तुलना में काफी बढ़ी हैं। इसलिए इन दिनों हरी सब्जियों के दाम करीब डेढ़ गुने और टमाटर के दाम तीन गुने हो गए हैं।
जिले के कई गांवों के किसान भी सब्जी की खेती करते हैं लेकिन इस सब्जी से पूरे जिले की जरूरत पूरी नहीं हो पाती। इसलिए अधिकतर सब्जियां महेंद्रगढ़ क्षेत्र से पहुंचती है। दूसरे जिले से आने के कारण हरी सब्जियां महंगी हो गई हैं। वहीं जिले की एकमात्र नई सब्जी मंडी से सभी गांवों के छोटे दुकानदारों का सीधा जुड़ाव है। टमाटर की फसल पर बारिश का ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ा है। हालांकि क्षेत्र की अरावली की पहाड़ियों के आसपास स्थित गांवों में टमाटर की अच्छी खेती होती है लेकिन इन भागों में पहाड़ों पर क्रेशर आदि चलने से दिनभर धूल से प्रदूषण बढ़ जाने पर अक्सर यह टमाटर की खेती प्रदूषण की भेंट चढ़ती रही है। किसान समय- समय पर इस समस्या से प्रशासन को भी अवगत कराते रहते हैं।
बीते सप्ताह = इस सप्ताह
टिंडा= 25 40 प्रति किलो
टमाटर- 20 60
घीया - 5 15
पेठा- 5 10
फली= 20 30
शिमला-25 40
तोरी- 10 15
हरी मिर्च=20 40
प्याज- 07 14
करेला- 10 22
भिंडी- 15 25
बाक्स:
शहरवासी सुरेंद्र का कहना है कि बारिश से पहले सब्जी के दाम ठीक थे अब अचानक सब्जी के भाव बढ़ गए। टमाटर रसोईघर से गायब हो गया है। हरी सब्जी के रेट ज्यादा बढ़े हैं।
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-राकेश कुमार का कहना है कि हरी सब्जी के दाम नहीं बढने चाहिए। हरी सब्जी सेहत के लिए सबसे ज्यादा गुणकारी होती है। टमाटर के दाम अचानक बढ़ जाने पर सब्जी का स्वाद बिगड़ने लगा है। प्याज के दामों में अचानक उछाल आया है।
=कटार सिंह का कहना है कि सब्जी के दाम ज्यादा नहीं बढ़ने चाहिए। हालांकि सब्जी को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है लेकिन फिर भी इसके दाम बढ़ना चिंता का विषय है।
--सुनील कुमार का कहना है कि हरी व पत्तेदार सब्जियों के रेट ज्यादा बढ़े हैं जबकि यह सब्जियां सस्ती होनी चाहिए। टमाटर व हरी मिर्च महंगे होने से सब्जी का स्वाद बिगड़ने लगा है। अधिकतर लोगों के रसोईघर से टमाटर गायब होने लगा है।
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चरखी दादरी।
पिछले दिनों लगातार हुई बारिश से सब्जियों के दामों में काफी उछाल आया है। बारिश की वजह से सब्जी की फसलें खराब होने पर इनकी कीमतें पिछले सप्ताह की तुलना में काफी बढ़ी हैं। इसलिए इन दिनों हरी सब्जियों के दाम करीब डेढ़ गुने और टमाटर के दाम तीन गुने हो गए हैं।
जिले के कई गांवों के किसान भी सब्जी की खेती करते हैं लेकिन इस सब्जी से पूरे जिले की जरूरत पूरी नहीं हो पाती। इसलिए अधिकतर सब्जियां महेंद्रगढ़ क्षेत्र से पहुंचती है। दूसरे जिले से आने के कारण हरी सब्जियां महंगी हो गई हैं। वहीं जिले की एकमात्र नई सब्जी मंडी से सभी गांवों के छोटे दुकानदारों का सीधा जुड़ाव है। टमाटर की फसल पर बारिश का ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ा है। हालांकि क्षेत्र की अरावली की पहाड़ियों के आसपास स्थित गांवों में टमाटर की अच्छी खेती होती है लेकिन इन भागों में पहाड़ों पर क्रेशर आदि चलने से दिनभर धूल से प्रदूषण बढ़ जाने पर अक्सर यह टमाटर की खेती प्रदूषण की भेंट चढ़ती रही है। किसान समय- समय पर इस समस्या से प्रशासन को भी अवगत कराते रहते हैं।
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बीते सप्ताह = इस सप्ताह
टिंडा= 25 40 प्रति किलो
टमाटर- 20 60
घीया - 5 15
पेठा- 5 10
फली= 20 30
शिमला-25 40
तोरी- 10 15
हरी मिर्च=20 40
प्याज- 07 14
करेला- 10 22
भिंडी- 15 25
बाक्स:
शहरवासी सुरेंद्र का कहना है कि बारिश से पहले सब्जी के दाम ठीक थे अब अचानक सब्जी के भाव बढ़ गए। टमाटर रसोईघर से गायब हो गया है। हरी सब्जी के रेट ज्यादा बढ़े हैं।
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-राकेश कुमार का कहना है कि हरी सब्जी के दाम नहीं बढने चाहिए। हरी सब्जी सेहत के लिए सबसे ज्यादा गुणकारी होती है। टमाटर के दाम अचानक बढ़ जाने पर सब्जी का स्वाद बिगड़ने लगा है। प्याज के दामों में अचानक उछाल आया है।
=कटार सिंह का कहना है कि सब्जी के दाम ज्यादा नहीं बढ़ने चाहिए। हालांकि सब्जी को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है लेकिन फिर भी इसके दाम बढ़ना चिंता का विषय है।
--सुनील कुमार का कहना है कि हरी व पत्तेदार सब्जियों के रेट ज्यादा बढ़े हैं जबकि यह सब्जियां सस्ती होनी चाहिए। टमाटर व हरी मिर्च महंगे होने से सब्जी का स्वाद बिगड़ने लगा है। अधिकतर लोगों के रसोईघर से टमाटर गायब होने लगा है।