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एसआईटी खंगालेगी निजी कंपनी के अन्य संस्थानों संबंधी कागजात
Updated Tue, 08 May 2018 02:44 AM IST
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पीजीआईएमएस गार्ड घोटाला
एसआईटी खंगालेगी निजी कंपनी के अन्य संस्थानों संबंधी कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के लाखों रुपये के गार्ड घोटाले में चल रही जांच ने एक बार फिर तेजी पकड़ ली है। इसमें गठित एसआईटी निजी सुरक्षा कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई जा रही अन्य संस्थानों के कागजातों की भी जांच कर सकती है। इस जांच में बताया जा रहा है कि कंपनी ने एक रिकॉर्डिंग दी है, यह कई लोगों के राज खोलेगी।
सूत्रों की मानें तो पीजीआईएमएस के गार्ड घोटाले को एक पक्ष दबाने के लिए प्रयासरत है तो दूसरा पक्ष इसकी जांच अंतिम तक ले जाना चाह रहे हैं। इसकी जांच पूरी होने पर संस्थान के कुछ अधिकारियों को नपना तय है। क्योंकि बगैर कई अधिकारियों की सांठगांठ के किसी निजी कंपनी द्वारा इतनी बड़े घोटाले को अंजाम देना आसान नहीं है। इस मामले में संस्थान ने अपने दो सुरक्षा अधिकारियों को पहले ही निलंबित कर रखा है।
सूत्र दावा करते हैं कि अब बात जब डॉक्टरों पर आ रही है तो इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, क्योंकि एक डॉक्टर का नाम सामने आते ही सभी एक के बाद एक अपने आप सामने आ जाएंगे। निजी कंपनी का संस्थान से टेंडर पूरा हो गया है और वह अपना कार्यालय समेट चुकी है। आरोप है कि संस्थान के कुछ अधिकारियों ने आरोप लगने के बाद भी निजी कंपनी पर मेहरबान रही और उसी से समय के बाहर कार्य दिया।
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एसआईटी खंगालेगी निजी कंपनी के अन्य संस्थानों संबंधी कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के लाखों रुपये के गार्ड घोटाले में चल रही जांच ने एक बार फिर तेजी पकड़ ली है। इसमें गठित एसआईटी निजी सुरक्षा कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई जा रही अन्य संस्थानों के कागजातों की भी जांच कर सकती है। इस जांच में बताया जा रहा है कि कंपनी ने एक रिकॉर्डिंग दी है, यह कई लोगों के राज खोलेगी।
सूत्रों की मानें तो पीजीआईएमएस के गार्ड घोटाले को एक पक्ष दबाने के लिए प्रयासरत है तो दूसरा पक्ष इसकी जांच अंतिम तक ले जाना चाह रहे हैं। इसकी जांच पूरी होने पर संस्थान के कुछ अधिकारियों को नपना तय है। क्योंकि बगैर कई अधिकारियों की सांठगांठ के किसी निजी कंपनी द्वारा इतनी बड़े घोटाले को अंजाम देना आसान नहीं है। इस मामले में संस्थान ने अपने दो सुरक्षा अधिकारियों को पहले ही निलंबित कर रखा है।
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सूत्र दावा करते हैं कि अब बात जब डॉक्टरों पर आ रही है तो इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, क्योंकि एक डॉक्टर का नाम सामने आते ही सभी एक के बाद एक अपने आप सामने आ जाएंगे। निजी कंपनी का संस्थान से टेंडर पूरा हो गया है और वह अपना कार्यालय समेट चुकी है। आरोप है कि संस्थान के कुछ अधिकारियों ने आरोप लगने के बाद भी निजी कंपनी पर मेहरबान रही और उसी से समय के बाहर कार्य दिया।
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