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बेटी का मुकाबला देखने आस्ट्रेलिया पहुंचे महावीर फौगाट, नहीं मिल पाई मैच की टिकट
Updated Fri, 13 Apr 2018 01:24 AM IST
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बेटी का मुकाबला देखने आस्ट्रेलिया पहुंचे महावीर फौगाट, नहीं मिल पाई मैच की टिकट
चरखी दादरी।
गोल्ड कोस्ट शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला पहलवान बबीता फौगाट ने भले ही सिल्वर मेडल हासिल कर लिया, लेकिन उनके पिता द्रोणाचार्य अवार्डी महावीर फौगाट भारतीय दल की लापरवाही से मैच नहीं देख पाए। बेटी का मैच देखने आस्ट्रेलिया पहुंचे महावीर फौगाट को टिकट के लिए बाहर खड़े होकर ही इंतजार करना पड़ा। इस चूक पर बबीता फौगाट ने अपनी नाराजगी जाहिर भी की। बबीता फौगाट ने बताया कि मैच की पहली रात वह अपने माता-पिता के टिकट के लिए दल प्रमुख से लेकर हर सदस्य तक गुहार लगाती रही लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
बबीता फौगाट ने कहा कि पिता से जानकारी मिलने के बाद जब उसने आस्ट्रेलियाई टीम से दो पास देने की बात कही तो उसके पिता अंदर आ पाए। बबीता फौगाट ने बताया कि उसने आईओए से लेकर दल प्रमुख से भी रात दस बजे तक गुहार लगाई जबकि मैच से पहले उसे इंतजार की जरूरत थी। वहीं, महावीर फौगाट ने कहा कि जिस समय बबीता बाउट लड़ रही थी उस समय वो बाहर इंतजार कर रहे थे। महावीर फौगाट का कहना है कि वो बबीता के शुरुआती तीन मैच नहीं देख पाए और केवल फाइनल मैच ही देख पाए। यह भी आस्ट्रेलिया टीम की मदद से ही संभव हो पाया। बबीता फौगाट के भाई राहुल फौगाट ने बताया कि दल प्रमुख विक्रम दिसौदिया से जब इस संबंध में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि पहलवानों के लिए जो टिकट उन्हें मिले थे वो कोच राजीव तोमर को सौंपे थे और इन्हें बांटने की जिम्मेवारी उन्हीं की थी।
विनेश के मैच के लिए टिकट करवाएं मुहैया: महावीर फौगाट
अमर उजाला से बातचीत में द्रोणाचार्य अवार्डी महावीर फौगाट ने भी बताया कि भले ही वो बबीता की सभी बाउट न देख पाए हो लेकिन वो अपनी दूसरी बेटी विनेश फौगाट की बाउट देखने के इच्छुक है। वो विनेश को गोल्ड मेडल जीतते देखना चाहते हैं और इसलिए उन्हें कम से कम 14 अप्रैल को होने वाले मैच के टिकट तो मुहैया करवाए जाएं।
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चरखी दादरी।
गोल्ड कोस्ट शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला पहलवान बबीता फौगाट ने भले ही सिल्वर मेडल हासिल कर लिया, लेकिन उनके पिता द्रोणाचार्य अवार्डी महावीर फौगाट भारतीय दल की लापरवाही से मैच नहीं देख पाए। बेटी का मैच देखने आस्ट्रेलिया पहुंचे महावीर फौगाट को टिकट के लिए बाहर खड़े होकर ही इंतजार करना पड़ा। इस चूक पर बबीता फौगाट ने अपनी नाराजगी जाहिर भी की। बबीता फौगाट ने बताया कि मैच की पहली रात वह अपने माता-पिता के टिकट के लिए दल प्रमुख से लेकर हर सदस्य तक गुहार लगाती रही लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
बबीता फौगाट ने कहा कि पिता से जानकारी मिलने के बाद जब उसने आस्ट्रेलियाई टीम से दो पास देने की बात कही तो उसके पिता अंदर आ पाए। बबीता फौगाट ने बताया कि उसने आईओए से लेकर दल प्रमुख से भी रात दस बजे तक गुहार लगाई जबकि मैच से पहले उसे इंतजार की जरूरत थी। वहीं, महावीर फौगाट ने कहा कि जिस समय बबीता बाउट लड़ रही थी उस समय वो बाहर इंतजार कर रहे थे। महावीर फौगाट का कहना है कि वो बबीता के शुरुआती तीन मैच नहीं देख पाए और केवल फाइनल मैच ही देख पाए। यह भी आस्ट्रेलिया टीम की मदद से ही संभव हो पाया। बबीता फौगाट के भाई राहुल फौगाट ने बताया कि दल प्रमुख विक्रम दिसौदिया से जब इस संबंध में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि पहलवानों के लिए जो टिकट उन्हें मिले थे वो कोच राजीव तोमर को सौंपे थे और इन्हें बांटने की जिम्मेवारी उन्हीं की थी।
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विनेश के मैच के लिए टिकट करवाएं मुहैया: महावीर फौगाट
अमर उजाला से बातचीत में द्रोणाचार्य अवार्डी महावीर फौगाट ने भी बताया कि भले ही वो बबीता की सभी बाउट न देख पाए हो लेकिन वो अपनी दूसरी बेटी विनेश फौगाट की बाउट देखने के इच्छुक है। वो विनेश को गोल्ड मेडल जीतते देखना चाहते हैं और इसलिए उन्हें कम से कम 14 अप्रैल को होने वाले मैच के टिकट तो मुहैया करवाए जाएं।
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