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रामपाल के अनुयायियों ने मनाया काला दिवस
Updated Sun, 19 Nov 2017 03:38 AM IST
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रामपाल के समर्थकों ने जुलूस निकालकर मनाया काला दिवस
- 18 नवंबर 2014 को बरवाला आश्रम में पुलिस व समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद हुई थी रामपाल की गिरफ्तारी
- समर्थकों ने नारेबाजी कर केस वापस लेने और सीबीआई जांच की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
देशद्रोह व हत्या के आरोप में हिसार जेल में बंद रामपाल के समर्थकों ने फिर ताकत दिखाई है। शनिवार को हजारों की संख्या में मानसरोवर पार्क में इकट्ठा होकर 18 नवंबर को समर्थकों ने काला दिवस के रूप में मनाया।
उन्होंने मानसरोवर पार्क से लेकर लघु सचिवालय तक जुलूस निकाला। इसके बाद सीटीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। बता दें कि 18 नवंबर 2014 को पुलिस ने बरवाला स्थित आश्रम से रामपाल को गिरफ्तार किया था। इस दौरान हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी जबकि कुछ पुलिसकर्मी व समर्थक घायल हो गये थे।
रामपाल के समर्थक शनिवार सुबह से ही मानसरोवर पार्क में इकट्ठा होना शुरू हो गये थे। इनमें काफी संख्या में महिलाएं व बुजुर्ग शामिल थे। पार्क में समर्थकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। समर्थकों ने रामपाल के खिलाफ दर्ज सारे केस वापस लेने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग की। करीब दो घंटे तक पार्क में बैठने के बाद समर्थकों ने हाथों में झंडे और रामपाल की बेगुनाही के बैनर लेकर लघु सचिवालय तक जुलूस निकाला। समर्थक ज्यादा होने के कारण भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। जुलूस के दौरान समर्थक प्रदेश सरकार हिंसा का आरोप लगाकर नारेबाजी कर रहे थे। फिर समर्थकों ने सीटीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। समर्थकों ने जेल में बंद रामपाल व उनके समर्थकों को रिहा करने, सारे केस वापस लेने, मामले की सीबीआई जांच कराने सहित अन्य मांग की है। ज्ञापन देने के बाद समर्थक वापस चले गये।
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समर्थक बोले - रामपाल के भी आश्रम खुलें
विरोध प्रदर्शन कर रहे समर्थकों ने रामपाल के सारे आश्रम खोलने की मांग की। एक समर्थक राजीव गौड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के सारे डेरे खोल दिये हैं। जबकि रामपाल के सभी आश्रमों पर पुलिस का पहरा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार राम रहीम के डेरे खोल सकती है तो रामपाल के आश्रम क्यों नहीं। आश्रम नहीं खुलने के कारण अनुयायी सत्संग भी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, असम निवासी समर्थक लावनिया का कहना है कि पुलिस ने रामपाल के खिलाफ सारे झूठे केस दर्ज किये हैं। दो मामलों में रामपाल बरी भी हो गये हैं। यदि सच्चाई का पता लगाना है तो रामपाल को जेल से बाहर लाकर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
समर्थकों ने किया राष्ट्रीय समाज सेवा समिति का गठन
रामपाल के समर्थकों ने फिर एक समिति बनाई है। इसका नाम राष्ट्रीय समाज सेवा समिति है। समिति के सदस्योें की ओर से रामपाल के विचारों का प्रचार किया जाएगा। साथ ही बरवाला कांड के बारे में बताया जाएगा। रामपाल की गिरफ्तारी के समय भी एक ऐसी ही समिति बनी हुई थी। उसके सदस्य रामपाल की सुरक्षा व्यवस्था को देखते थे। बाद में समिति के सदस्यों और पुलिस के बीच हिंसा हुई थी।
डेढ़ घंटे तक जाम में फंसे शहरवासी, केस दर्ज
जुलूस के दौरान मानसरोवर पार्क से सोनीपत स्टैंड तक सड़क पर रामपाल के समर्थकों की भीड़ लग गई। इस कारण रोड पर वाहनों की कतार लग गई। करीब डेढ़ घंटे तक शहरवासियों को जाम में फंसा रहना पड़ा। जैसे तैसे करके पुलिस ने समर्थकों को समझाया और रोड से हटाया। रोड जाम करने को लेकर सिविल लाइन थाने में रामपाल के समर्थकों पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में सुंडाना निवासी समुंद्र सिंह ढाका, जींद बाइपास निवासी अमन कुमार, बहादुरगढ़ निवासी नरेश डागर, राजेश प्रधान, हांसी निवासी सुरेंद्र दास, दिल्ली निवासी रामप्रकाश और धर्मखेड़ी निवासी सुरेंद्र को नामजद किया है। पुलिस का कहना है कि यह सभी लोग रामपाल के संगठन के मुख्य सदस्य है। इन्हीं के नेतृत्व में बिना अनुमति के समर्थकों ने जुलूस निकालकर नारेबाजी की। घंटों तक सड़क पर पर जाम लगाया।
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- 18 नवंबर 2014 को बरवाला आश्रम में पुलिस व समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद हुई थी रामपाल की गिरफ्तारी
- समर्थकों ने नारेबाजी कर केस वापस लेने और सीबीआई जांच की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
देशद्रोह व हत्या के आरोप में हिसार जेल में बंद रामपाल के समर्थकों ने फिर ताकत दिखाई है। शनिवार को हजारों की संख्या में मानसरोवर पार्क में इकट्ठा होकर 18 नवंबर को समर्थकों ने काला दिवस के रूप में मनाया।
उन्होंने मानसरोवर पार्क से लेकर लघु सचिवालय तक जुलूस निकाला। इसके बाद सीटीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। बता दें कि 18 नवंबर 2014 को पुलिस ने बरवाला स्थित आश्रम से रामपाल को गिरफ्तार किया था। इस दौरान हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी जबकि कुछ पुलिसकर्मी व समर्थक घायल हो गये थे।
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रामपाल के समर्थक शनिवार सुबह से ही मानसरोवर पार्क में इकट्ठा होना शुरू हो गये थे। इनमें काफी संख्या में महिलाएं व बुजुर्ग शामिल थे। पार्क में समर्थकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। समर्थकों ने रामपाल के खिलाफ दर्ज सारे केस वापस लेने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग की। करीब दो घंटे तक पार्क में बैठने के बाद समर्थकों ने हाथों में झंडे और रामपाल की बेगुनाही के बैनर लेकर लघु सचिवालय तक जुलूस निकाला। समर्थक ज्यादा होने के कारण भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। जुलूस के दौरान समर्थक प्रदेश सरकार हिंसा का आरोप लगाकर नारेबाजी कर रहे थे। फिर समर्थकों ने सीटीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। समर्थकों ने जेल में बंद रामपाल व उनके समर्थकों को रिहा करने, सारे केस वापस लेने, मामले की सीबीआई जांच कराने सहित अन्य मांग की है। ज्ञापन देने के बाद समर्थक वापस चले गये।
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समर्थक बोले - रामपाल के भी आश्रम खुलें
विरोध प्रदर्शन कर रहे समर्थकों ने रामपाल के सारे आश्रम खोलने की मांग की। एक समर्थक राजीव गौड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के सारे डेरे खोल दिये हैं। जबकि रामपाल के सभी आश्रमों पर पुलिस का पहरा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार राम रहीम के डेरे खोल सकती है तो रामपाल के आश्रम क्यों नहीं। आश्रम नहीं खुलने के कारण अनुयायी सत्संग भी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, असम निवासी समर्थक लावनिया का कहना है कि पुलिस ने रामपाल के खिलाफ सारे झूठे केस दर्ज किये हैं। दो मामलों में रामपाल बरी भी हो गये हैं। यदि सच्चाई का पता लगाना है तो रामपाल को जेल से बाहर लाकर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
समर्थकों ने किया राष्ट्रीय समाज सेवा समिति का गठन
रामपाल के समर्थकों ने फिर एक समिति बनाई है। इसका नाम राष्ट्रीय समाज सेवा समिति है। समिति के सदस्योें की ओर से रामपाल के विचारों का प्रचार किया जाएगा। साथ ही बरवाला कांड के बारे में बताया जाएगा। रामपाल की गिरफ्तारी के समय भी एक ऐसी ही समिति बनी हुई थी। उसके सदस्य रामपाल की सुरक्षा व्यवस्था को देखते थे। बाद में समिति के सदस्यों और पुलिस के बीच हिंसा हुई थी।
डेढ़ घंटे तक जाम में फंसे शहरवासी, केस दर्ज
जुलूस के दौरान मानसरोवर पार्क से सोनीपत स्टैंड तक सड़क पर रामपाल के समर्थकों की भीड़ लग गई। इस कारण रोड पर वाहनों की कतार लग गई। करीब डेढ़ घंटे तक शहरवासियों को जाम में फंसा रहना पड़ा। जैसे तैसे करके पुलिस ने समर्थकों को समझाया और रोड से हटाया। रोड जाम करने को लेकर सिविल लाइन थाने में रामपाल के समर्थकों पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में सुंडाना निवासी समुंद्र सिंह ढाका, जींद बाइपास निवासी अमन कुमार, बहादुरगढ़ निवासी नरेश डागर, राजेश प्रधान, हांसी निवासी सुरेंद्र दास, दिल्ली निवासी रामप्रकाश और धर्मखेड़ी निवासी सुरेंद्र को नामजद किया है। पुलिस का कहना है कि यह सभी लोग रामपाल के संगठन के मुख्य सदस्य है। इन्हीं के नेतृत्व में बिना अनुमति के समर्थकों ने जुलूस निकालकर नारेबाजी की। घंटों तक सड़क पर पर जाम लगाया।