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मं दिरों में गूंजे भगवान भोले के जयकारे
Updated Sat, 22 Jul 2017 01:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
शिवरात्रि के मौके पर शुक्रवार को जिले के मंदिरों में भगवान शिव के जयकारे गूंजे। जहां गंगाजल लेकर आए कांवड़ियों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। वहीं अन्य श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर सुख शांति की कामना की। जलाभिषेक केे साथ ही पूरी पीतल नगरी हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठी। दिनभर दान-पुण्य का दौर भी चलता रहा। सुबह होते ही श्रद्धालु मंदिर में पहुंचने लगे। कांवड़ लेकर आए कांवड़ियें भगवान का जलाभिषेक करने को आतुर रहे। शहर के मोती चौक स्थित घंटेश्वर महादेव मंदिर, बारह पत्थर स्थित महादेव मंदिर, नई अनाज मंडी स्थित श्रीशिव मंदिर, सेक्टर एक स्थित सोलहराही भूतेश्वर महादेव मंदिर, लिया चौक स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर में खासी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने भोले को रिझाने के लिए गंगाजल के साथ बील पत्र और दूध चढ़ाए। शहर में कई जगह भंडारों का दौर भी चलता रहा। इस दौरान मंदिरों में भी भगवान शिव के जयकारे गूंजते रहे।
भगवान भोले को मनाने में ग्रामीण भी पीछे नहीं रहे। कांवड़ियों के आगे गाड़ियां चल रही थीं। कांवड़ियें भी कंधों पर कांवड़ लिए गांवों में मंदिरों की ओर आ रहे थे। मंदिरों में ग्रामीण पूरी तैयारी से इनका इंतजार कर रहे। यहां पहुंचने पर कांवड़ियों का स्वागत किया गया।
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रेवाड़ी।
शिवरात्रि के मौके पर शुक्रवार को जिले के मंदिरों में भगवान शिव के जयकारे गूंजे। जहां गंगाजल लेकर आए कांवड़ियों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। वहीं अन्य श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर सुख शांति की कामना की। जलाभिषेक केे साथ ही पूरी पीतल नगरी हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठी। दिनभर दान-पुण्य का दौर भी चलता रहा। सुबह होते ही श्रद्धालु मंदिर में पहुंचने लगे। कांवड़ लेकर आए कांवड़ियें भगवान का जलाभिषेक करने को आतुर रहे। शहर के मोती चौक स्थित घंटेश्वर महादेव मंदिर, बारह पत्थर स्थित महादेव मंदिर, नई अनाज मंडी स्थित श्रीशिव मंदिर, सेक्टर एक स्थित सोलहराही भूतेश्वर महादेव मंदिर, लिया चौक स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर में खासी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने भोले को रिझाने के लिए गंगाजल के साथ बील पत्र और दूध चढ़ाए। शहर में कई जगह भंडारों का दौर भी चलता रहा। इस दौरान मंदिरों में भी भगवान शिव के जयकारे गूंजते रहे।
भगवान भोले को मनाने में ग्रामीण भी पीछे नहीं रहे। कांवड़ियों के आगे गाड़ियां चल रही थीं। कांवड़ियें भी कंधों पर कांवड़ लिए गांवों में मंदिरों की ओर आ रहे थे। मंदिरों में ग्रामीण पूरी तैयारी से इनका इंतजार कर रहे। यहां पहुंचने पर कांवड़ियों का स्वागत किया गया।
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