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नमाज अदा कर एक-दूसरे को दी बधाई
Updated Mon, 26 Jun 2017 11:55 PM IST
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नमाज अदा कर एक-दूसरे को दी बधाई
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल/मंडी अटेली। जिले में ईद का पर्व सोमवार को श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। इस मौके पर मुस्लिम समाज से लोगों ने एक दूसरे को गले लगकर ईद की बधाई दी। नारनौल के शनि मंदिर के पास स्थित जामा मस्जिद व अटेली में सोमवार को ईद की नमाज अता की गई।
बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने स्थानीय मस्जिद में नमाज अता कर अल्लाह से मुराद मांगी। मस्जिद में मीठी खीर का दावत दी गई। लोगों ने एक दूसरे को गले मिल कर ईद की मुबारकबाद दी। मस्जिद के मौलवी शाबिर हुुसैन ने सुबह 9 बजे मस्जिद में नमाजियों के साथ नमाज पढ़ी। मौलवी ने अपने संदेश में कहा कि यह त्यौहार आपस में बैर भाव को दूर कर प्रेम-भाईचारे से रहना सिखाता है। इंसान द्वारा अपने बुरे कर्मों का पश्चाताप कर उन्हें छोड़ कर इंसानियत के रास्ते पर चलने का मौका होता है। रमजान के दौरान रोजा रखने के बाद ईद के दिन नमाज अता करने से अल्लाह व्यक्ति के गुनाहों का माफ कर देता है। क्षेत्र के गांव बौचड़िया, कुंजपुरा, कांटी, गुजरवास, भोजावास, खुंदरोठ, राता आदि गांवों के अलावा अटेली कस्बे में दूर-दराज के रहने वाले इस्लाम धर्म के मानने वालों ने मस्जिद में नमाज पढ़ी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल/मंडी अटेली। जिले में ईद का पर्व सोमवार को श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। इस मौके पर मुस्लिम समाज से लोगों ने एक दूसरे को गले लगकर ईद की बधाई दी। नारनौल के शनि मंदिर के पास स्थित जामा मस्जिद व अटेली में सोमवार को ईद की नमाज अता की गई।
बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने स्थानीय मस्जिद में नमाज अता कर अल्लाह से मुराद मांगी। मस्जिद में मीठी खीर का दावत दी गई। लोगों ने एक दूसरे को गले मिल कर ईद की मुबारकबाद दी। मस्जिद के मौलवी शाबिर हुुसैन ने सुबह 9 बजे मस्जिद में नमाजियों के साथ नमाज पढ़ी। मौलवी ने अपने संदेश में कहा कि यह त्यौहार आपस में बैर भाव को दूर कर प्रेम-भाईचारे से रहना सिखाता है। इंसान द्वारा अपने बुरे कर्मों का पश्चाताप कर उन्हें छोड़ कर इंसानियत के रास्ते पर चलने का मौका होता है। रमजान के दौरान रोजा रखने के बाद ईद के दिन नमाज अता करने से अल्लाह व्यक्ति के गुनाहों का माफ कर देता है। क्षेत्र के गांव बौचड़िया, कुंजपुरा, कांटी, गुजरवास, भोजावास, खुंदरोठ, राता आदि गांवों के अलावा अटेली कस्बे में दूर-दराज के रहने वाले इस्लाम धर्म के मानने वालों ने मस्जिद में नमाज पढ़ी।
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