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शहर की बिना नक् शा पास 6 हजार बिल्डिंग होंगी नियमित
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रोहतक। शहर में बिना नक्शा पास बनी छह हजार के करीब कॉमर्शियल बिल्डिंग अब नियमित होंगी। कैबिनेट ने टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत बसी कॉलोनियों में लागू पॉलिसी को पूरे शहर में लागू कर दिया है। बिल्डिंग नियमित कराने के लिए अब 6090 रुपये प्रति वर्ग गज फीस जमा करानी होगी, जो 2016 की दरों से 50 प्रतिशत कम हैं। लोकसभा चुनाव से पहले इसे शहरी क्षेत्रों में भाजपा का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।
शहर के अंदर हुड्डा सरकार के दूसरे कार्यकाल में नगर निगम बनते ही विशेष अभियान चलाया गया था। एक दिन में निगम की टीम ने तीन दर्जन बिल्डिंग को सील कर दिया था। सोनीपत रोड, मानसरोवर पार्क, दिल्ली रोड, मॉडल टाउन व दिल्ली बाईपास तक विशेष अभियान चला था। इसमें कई असरदार लोगों की बिल्डिंग भी शामिल थी। हालांकि, एक सप्ताह में ही न केवल सील हटा दी गई, बल्कि निगम की सख्ती भी कागजों में सिमट गई। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक 2014 में करीब 1350 बिल्डिंग ऐसी पाई गई थीं, जिनके निर्माण में बिल्डिंग बाई लॉज 1992 का उल्लंघन किया गया है। अब ऐसी बिल्डिंग की संख्या छह हजार के करीब पहुंच गई है। हालांकि, निगम ने 4500 बिल्डिंग के मालिकों को नोटिस भी दिए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इसके कारण लगातार बिल्डिंग लॉ तोड़कर बनाई जा रही कामर्शियल बिल्डिंग की संख्या बढ़ती गई। इसके चलते सीएम ने शहरों में अवैध व्यवसायिक निर्माण की नियमितीकरण नीति को जून 2018 में मंजूर कर लिया था। कैबिनेट ने एक बार में बिल्डिंग नियमित करने के लिए संशोधित दरों के साथ मंजूरी अब दी है।
ये रहेंगी नगर निगम अनुसार दरें
नगर निगम गुरुग्राम क्षेत्र में नियमितीकरण की दर प्रति वर्ग गज 7662 रुपये, नगर निगम फरीदाबाद के क्षेत्र में 6896 रुपये प्रति वर्ग गज और रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला व हिसार में 6090 रुपये प्रति वर्गगज तय की गई है। प्रदेश की सभी नगर परिषदों के क्षेत्र में 5304 रुपये प्रति वर्ग गज और सभी नगर पालिकाओं में 4658 रुपये प्रति वर्ग गज दर को निर्धारित किया गया है।
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रिहायशी क्षेत्र को व्यावसायिक में बदलने की दर में 50 फीसदी की कमी
शहरी निकाय मंत्री कविता जैन ने बताया कि प्रदेश भर में स्थापित पुनर्वास कॉलोनियां मसलन मॉडल टाउन, चार मरला, आठ मरला, टाउन प्लानिंग स्कीम, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के लिए वर्ष 2016 में रिहायशी भवन को व्यावसायिक भवन में बदलाव की नीति मंजूर कर दरें निर्धारित की गई थीं। सरकार ने उनमें 50 प्रतिशत की कमी की है।
नए अवैध निर्माण पर सख्ती बरतेगा निकाय विभाग
शहरी निकाय मंत्री कविता जैन ने कहा कि एक बार नियमितीकरण की नीति को मंजूरी देने के साथ ही भविष्य में ऐसे निर्माण न हों, इसके लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग पूरी सख्ती बरतेगा। विभाग वीडियोग्राफी सर्वे भी करवाएगा ताकि भविष्य में अवैध भवनाें के निर्माण पर अंकुश लगाकर हरियाणा बिल्डिंग कोड का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही नियमितीकरण का लाभ उठाने वाले लाभार्थी दस वर्ष के अंदर अपने भवन में हरियाणा बिल्डिंग कोड के अनुरूप बदलाव भी करेंगे।
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शहर के अंदर हुड्डा सरकार के दूसरे कार्यकाल में नगर निगम बनते ही विशेष अभियान चलाया गया था। एक दिन में निगम की टीम ने तीन दर्जन बिल्डिंग को सील कर दिया था। सोनीपत रोड, मानसरोवर पार्क, दिल्ली रोड, मॉडल टाउन व दिल्ली बाईपास तक विशेष अभियान चला था। इसमें कई असरदार लोगों की बिल्डिंग भी शामिल थी। हालांकि, एक सप्ताह में ही न केवल सील हटा दी गई, बल्कि निगम की सख्ती भी कागजों में सिमट गई। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक 2014 में करीब 1350 बिल्डिंग ऐसी पाई गई थीं, जिनके निर्माण में बिल्डिंग बाई लॉज 1992 का उल्लंघन किया गया है। अब ऐसी बिल्डिंग की संख्या छह हजार के करीब पहुंच गई है। हालांकि, निगम ने 4500 बिल्डिंग के मालिकों को नोटिस भी दिए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इसके कारण लगातार बिल्डिंग लॉ तोड़कर बनाई जा रही कामर्शियल बिल्डिंग की संख्या बढ़ती गई। इसके चलते सीएम ने शहरों में अवैध व्यवसायिक निर्माण की नियमितीकरण नीति को जून 2018 में मंजूर कर लिया था। कैबिनेट ने एक बार में बिल्डिंग नियमित करने के लिए संशोधित दरों के साथ मंजूरी अब दी है।
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ये रहेंगी नगर निगम अनुसार दरें
नगर निगम गुरुग्राम क्षेत्र में नियमितीकरण की दर प्रति वर्ग गज 7662 रुपये, नगर निगम फरीदाबाद के क्षेत्र में 6896 रुपये प्रति वर्ग गज और रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला व हिसार में 6090 रुपये प्रति वर्गगज तय की गई है। प्रदेश की सभी नगर परिषदों के क्षेत्र में 5304 रुपये प्रति वर्ग गज और सभी नगर पालिकाओं में 4658 रुपये प्रति वर्ग गज दर को निर्धारित किया गया है।
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रिहायशी क्षेत्र को व्यावसायिक में बदलने की दर में 50 फीसदी की कमी
शहरी निकाय मंत्री कविता जैन ने बताया कि प्रदेश भर में स्थापित पुनर्वास कॉलोनियां मसलन मॉडल टाउन, चार मरला, आठ मरला, टाउन प्लानिंग स्कीम, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के लिए वर्ष 2016 में रिहायशी भवन को व्यावसायिक भवन में बदलाव की नीति मंजूर कर दरें निर्धारित की गई थीं। सरकार ने उनमें 50 प्रतिशत की कमी की है।
नए अवैध निर्माण पर सख्ती बरतेगा निकाय विभाग
शहरी निकाय मंत्री कविता जैन ने कहा कि एक बार नियमितीकरण की नीति को मंजूरी देने के साथ ही भविष्य में ऐसे निर्माण न हों, इसके लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग पूरी सख्ती बरतेगा। विभाग वीडियोग्राफी सर्वे भी करवाएगा ताकि भविष्य में अवैध भवनाें के निर्माण पर अंकुश लगाकर हरियाणा बिल्डिंग कोड का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही नियमितीकरण का लाभ उठाने वाले लाभार्थी दस वर्ष के अंदर अपने भवन में हरियाणा बिल्डिंग कोड के अनुरूप बदलाव भी करेंगे।