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पीजीआईएमएस के डॉक्टरों की हवाई यात्रा पर सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक
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रोहतक। निजी दवा कंपनियों के खर्च पर विदेश यात्रा करने वाले पीजीआईएमएस के डॉक्टरों की अब खैर नहीं है। सरकार ने डॉक्टरों की इन हवाई विदेश यात्रा पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की अंतिम तिथि तय कर दी है। सरकारी फरमान के अनुसार सभी डॉक्टरों को 2012 से 2018 तक की गई सभी हवाई यात्राओं की पूरी जानकारी सात मार्च तक हर हाल में निदेशक कार्यालय को भेजनी होगी।
निजी कंपनी के खर्च पर विदेश यात्रा करने के आरोप में संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. नित्यानंद को अपना अहम पद तक तक गंवाना पड़ा था। इसके बाद इस मुद्दे पर संस्थान के अन्य डॉक्टर जांच के घेरे में आए और एक-दूसरे की हवाई यात्राओं पर सवाल भी उठाए गए। हरियाणा सरकार के निर्देशों पर जांच के लिए सभी डॉक्टरों का हवाई यात्रा संबंधी रिकॉर्ड भी तलब किया गया, लेकिन किसी ने दिया व किसी ने नहीं दिया। कुछ डॉक्टरों ने तो यहां तक जवाब दिया कि उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। अधिकांश डॉक्टरों के इसमें संलिप्त होने के चलते प्रशासन ने स्वयं के स्तर पर इस मामले को दबाने की कोशिश की। इस पर सरकार ने फिर संज्ञान लिया और पीजीआईएमएस प्रशासन से समय निर्धारित कर इसकी पूरी डिटेल मांग ली है।
क्या है मामला
सरकारी डॉक्टर को विदेश यात्रा करने से पहले सरकार की मंजूरी लेनी होती है। इसके साथ ही उन्हें सरकार को बताना होता है कि वह कहां जा रहे हैं और उसका खर्च कौन करेगा। अकसर निजी दवा कंपनियां अपने प्रोडक्ट को बाजार में मरीजों तक पहुंचाने के लिए डॉक्टरों को प्रलोभन देती हैं। इसमें विदेश टूर भी शामिल होता है। सरकार ने ऐसे निजी कंपनी से लाभ लेने को प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन नियमों को ताक पर रख कर सरकारी डॉक्टर अपनी नौकरी दांव पर लगाते हैं।
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पासपोर्ट और बैंक अकाउंट खोल देंगे सभी राज
एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि डॉक्टरों के पासपोर्ट और बैंक अकाउंट जमा कराए जाएं तो सारी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इन दो चीजों से डॉक्टरों की सभी हवाई यात्राओं से जुडे़ राज खुल जाएंगे।
बोले अधिकारी
सभी विभागाध्यक्षों से उनकी व उनके डॉक्टरों की हवाई यात्रा संबंधी जानकारी मांगी गई है। सभी को इसके लिए अंतिम तिथि सात मार्च दी गई है।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
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निजी कंपनी के खर्च पर विदेश यात्रा करने के आरोप में संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. नित्यानंद को अपना अहम पद तक तक गंवाना पड़ा था। इसके बाद इस मुद्दे पर संस्थान के अन्य डॉक्टर जांच के घेरे में आए और एक-दूसरे की हवाई यात्राओं पर सवाल भी उठाए गए। हरियाणा सरकार के निर्देशों पर जांच के लिए सभी डॉक्टरों का हवाई यात्रा संबंधी रिकॉर्ड भी तलब किया गया, लेकिन किसी ने दिया व किसी ने नहीं दिया। कुछ डॉक्टरों ने तो यहां तक जवाब दिया कि उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। अधिकांश डॉक्टरों के इसमें संलिप्त होने के चलते प्रशासन ने स्वयं के स्तर पर इस मामले को दबाने की कोशिश की। इस पर सरकार ने फिर संज्ञान लिया और पीजीआईएमएस प्रशासन से समय निर्धारित कर इसकी पूरी डिटेल मांग ली है।
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क्या है मामला
सरकारी डॉक्टर को विदेश यात्रा करने से पहले सरकार की मंजूरी लेनी होती है। इसके साथ ही उन्हें सरकार को बताना होता है कि वह कहां जा रहे हैं और उसका खर्च कौन करेगा। अकसर निजी दवा कंपनियां अपने प्रोडक्ट को बाजार में मरीजों तक पहुंचाने के लिए डॉक्टरों को प्रलोभन देती हैं। इसमें विदेश टूर भी शामिल होता है। सरकार ने ऐसे निजी कंपनी से लाभ लेने को प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन नियमों को ताक पर रख कर सरकारी डॉक्टर अपनी नौकरी दांव पर लगाते हैं।
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पासपोर्ट और बैंक अकाउंट खोल देंगे सभी राज
एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि डॉक्टरों के पासपोर्ट और बैंक अकाउंट जमा कराए जाएं तो सारी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इन दो चीजों से डॉक्टरों की सभी हवाई यात्राओं से जुडे़ राज खुल जाएंगे।
बोले अधिकारी
सभी विभागाध्यक्षों से उनकी व उनके डॉक्टरों की हवाई यात्रा संबंधी जानकारी मांगी गई है। सभी को इसके लिए अंतिम तिथि सात मार्च दी गई है।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस