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68 हजार से अधिक रुपये खर्च करने के बाद भी राहत नहीं

Sun, 20 May 2018 02:52 AM IST
Updated Sun, 20 May 2018 02:52 AM IST
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68 हजार से अधिक रुपये खर्च करने के बाद भी राहत नहीं
फोटो सहित एसएनजे 9
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पीजीआईएमएस में अपने मरीज की फाइल व बिल दिखाता तीमारदार।


बेटी की मौत ने मां को दिया सदमा तो पिता उपचार के बोझ तले दबा
- 68 हजार रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं मिली राहत

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री नि:शुल्क उपचार योजना क्या है, शायद ही बताने वाला कोई हो। यहां आने वाले मरीज इस योजना को लगभग भूल चूके हैं, यही नहीं यहां के डॉक्टर और स्टाफ भी इस योजना को भूल गये हैं। क्योंकि जननी सुरक्षा योजना के तहत महिला मरीज को सारा उपचार निशुल्क मिलना चाहिए, लेकिन संस्थान में एक मरीज के उपचार के दौरान 68 हजार रुपये से अधिक खर्च हो गये हैं। पीड़िता जहां अपनी बेटी की मौत को नहीं भूल पा रही है, वहीं आर्थिक रूप से लाचार पिता उपचार के बोझ तले दब गया है। यदि मरीज सही हो जाता तो शायद वह दर्द को भूल गया होता, लेकिन उपचार न होने पर मरीज को निजी अस्पताल ले जाना पड़ा और डॉक्टरों ने मरीज की फाइल पर लामा लिख कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
महेंद्रगढ़ के बवाना निवासी रामजीलाल ने बताया कि वह अपनी पत्नी प्रियंका को लेकर रोहतक पीजीआईमएएस में 19 अप्रैल को रोहतक लाये थे। उसका बीपी हाई था और एक-दो बार दौरा आ गया था। वार्ड दो में उसकी पत्नी को मृत बेटी पैदा हुई। इसके बाद 20 अप्रैल को मरीज को धनवंतरी अपैक्स ट्रामा सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया। यहां मरीज को लगभग 27 दिन रखा गया। इसके बाद मरीज को फिर वार्ड दो में भेज दिया गया। पहले डॉक्टर बता रहे थे कि मरीज को दिमाग की बीमारी है तो अब वार्ड दो में क्यों शिफ्ट कर रहे हैं। स्थिति यह थी कि उसकी पत्नी को बेड सोल हो गये थे। मजबूरी में वह अपनी पत्नी को लेकर जाने पर मजबूर हैं। शनिवार को वह अपनी पत्नी को लेकर वापस रेवाड़ी चला गया और एक निजी अस्पताल में दाखिल कर दिया। यहां जाते ही डॉक्टरों ने मरीज के गले से बलगम साफ कर दिया और अब वह राहत महसूस कर रही है। पीड़ित ने बताया कि वह इतने बड़े अस्पताल में आया था कि उसकी पत्नी ठीक हो जाएगी, लेकिन यहां तो सब कुछ उल्टा ही था। पत्नी ने मरी बेटी को जन्म दिया, इसका दुख व नहीं झेल पाई। ऊपर से हर रोज डॉक्टर दवाईयों की पर्चियां बनाकर उसे थमा देते थे, वह 28 दिन में 68 हजार रुपये से अधिक की दवायें खरीद चुका है। हैरानी की बात है कि उससे दस्ताने, कॉटन और पट्टियां तक मंगाई गई।
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जननी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत मिलना चाहिए निशुल्क उपचार
प्रदेश में जननी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू है, इसके तहत जच्चा को निशुल्क उपचार मिलना चाहिए। इसके अलावा मुख्यमंत्री निशुल्क उपचार योजना के तहत संस्थान में निशुल्क उपचार मिलना चाहिए। लेकिन दोनों ही योजनाओं को संस्थान के अधिकारी पलीता लगा रहे हैं।
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क्या है लामा
पीजीआईएमएस में किसी मरीज के उपचार के बीच में जाने पर डॉक्टर उसकी फाइल पर लामा लिख देते हैं। लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस लिख कर डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं कि मरीज अपनी मर्जी से गया है। जबकि मरीज को इसके बारे में पता भी नहीं होता।


बोले अधिकारी
हमारे पास किसी मरीज की शिकायत नहीं आई है। यदि मरीज को कोई समस्या होती है तो उसे संबंधित अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। इस मामले में संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात कर जांच करवाई जाएगी।
- डॉ. वरूण अरोड़ा, प्रभारी, जनसंपर्क विभाग, पीजीआइएमएस
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