फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   जाट शिक्षण संस् था प्राचार्य

जाट शिक्षण संस् था प्राचार्य

Fri, 16 Mar 2018 03:16 AM IST
Updated Fri, 16 Mar 2018 03:16 AM IST
विज्ञापन
जाट शिक्षण संस्
था प्राचार्य
फोटो समेत
विज्ञापन


जाट शिक्षण संस्था के सदस्यों ने प्राचार्य की नियमित नियुक्ति को लेकर प्रशासक पर लगाए गंभीर आरोप
नियमों के खिलाफ दिया प्राचार्य भर्ती का विज्ञापन, चहेते को नियुक्ति देने की तैयारी
संस्था में हो रहे रही घालमेल पर समाज के लोगों ने उठाई आवाज
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
जाट शिक्षण संस्था में प्राचार्य की नियमित नियुक्ति नियमों के विरुद्ध किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले ने संस्था के प्रशासक की भूमिका को भी सवालों के कटघरे में ला खड़ा किया है। संस्था चुनाव की लगी आचार संहिता कोर्ट केस के चलते अब भी लागू है। इसके बावजूद प्रशासन ने अपने स्तर पर विज्ञापन जारी कर प्राचार्य पद की भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इससे नाराज संस्था के सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए प्रशासक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर संस्था में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्राचार्य की नियुक्ति में घालमेल का अंदेशा
संस्था सदस्यों का आरोप है कि प्रशासक कॉलेज प्राचार्य के पद पर अपने चहेते को लाना चाहते हैं। इसीलिए नियमों के विरुद्ध विज्ञापन जारी किया गया है। छिपा कर जारी किए गए विज्ञापन के कारण कॉलेज का ही योग्य स्टाफ इस पद के लिए आवेदन से वंचित रह गया। प्रदेश भर से तो इस पद के लिए अनेक आवेदन आने थे। जबकि महज पांच ही आवेदन आए हैं। इनमें से एक हिसार से है। यह प्रशासक का नजदीकी है। आवेदन फीस पांच सौ रुपये वसूली गई। यह भी अंतिम तिथि निकलने के बाद जमा कराई गई। जबकि निमयानुसार उसी दिन फीस जमा करानी होती है। ऐसे में घालमेल से इनकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन

विज्ञापन जारी नहीं कर सकता प्रशासक
संस्था के निमयानुसार कोई प्रशासक किसी तरह का विज्ञापन जारी नहीं कर सकता। यह अधिकार डीडी पावर रखने वाले अधिकारी को है। यह जिम्मेदारी संस्था ने कॉलेज प्राचार्य को सौंपी है। प्राचार्य का नाम ही विज्ञापन के नीचे प्रकाशित होता है। जबकि प्राचार्य पद के लिए जारी विज्ञापन में प्रशासक का नाम छपा है। यह नियमों के विरुद्ध है। यही नहीं विज्ञापन में कई खामियां हैं। यह भी नियमों के तहत पूरी नहीं दी गई है। विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता नहीं दी गई है। जबकि उम्मीदवारों को इस बारे में स्पष्ट रूप से बताना होता है। विज्ञापन में आवेदन जमा कराने की अंतिम तिथि भी स्पष्ट नहीं है। कोर्ट में चुनाव पर स्टे के बावजूद भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

3 वर्षों से तैनात है प्रशासन, 3 महीने में सामने आए भ्रष्टाचार के दो मामले
संस्था में पिछले तीन वर्षों से प्रशासक नियुक्ति है। उनकी देखरेख में भ्रष्टाचार चरम पर है। पिछले तीन महीनों में संस्था के दो संस्थानों में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले उजागर हो चुके हैं। इसकी शिकायत प्रशासक से की जा चुकी है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संस्था में 40 हजार रुपये के चाय के बिल बने हैं। भ्रष्टाचार के और भी कई मामले हैं। दूसरी शिकायत छात्रों ने सीआर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ में हो रही धांधली के बारे में प्रशासक से की थी। इस शिकायत में संस्था के स्टाफ पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रोल नंबर देने व नकल के नाम पर लाखों रुपये की उगाही करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में भी लीपापोती की गई है।
----
दोबारा जारी हो विज्ञापन
संस्था के आजीवन सदस्य डॉ. प्रेम हुड्डा ने कहा कि सरकार संस्था में दी जाने वाली नौकरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मुहैया कराए। जाट कॉलेज के प्राचार्य पद को लेकर उभरे विवाद में मुख्यमंत्री खुद संज्ञान लेते मामले की जांच कराएं व विज्ञापन दोबारा जारी किया जाए। ऐसा नहीं होने पर संस्था के आजीवन सदस्य आंदोलन का रास्ता अपनायेंगे। संस्था में कोई भी नियुक्ति गलत तरीके से नहीं होने देंगे।
--
प्रशासक बेहतरी के लिए उठाएं कदम
जाट शिक्षण संस्था के सदस्य विनोद हुड्डा ने कहा कि संस्थाओं में शिक्षकों को तनख्वाह नहीं मिल रही है। इसके लिए प्रशासक को जल्द व बेहतर कदम उठाने चाहिए। सरकार दूसरी संस्थाओं की तर्ज पर एक प्रशासनिक भवन तैयार करवाए। इससे संस्थाओं का सारा प्रशासनिक व वित्तीय प्रबंधन एक जगह से हो सकेगा। इसका फायदा अध्यापकों व छात्रों को मिलेगा। इन मुद्दों को लेकर पत्रकारवार्ता करनी पड़ी। इसमें निर्मला, प्रमोद, डॉ. नरेश नांदल, वीरेंद्र दलाल, अत्तर सिंह भी मौजूद रहे।

परिवारवाद, सरकारवाद व भ्रष्टाचार में घिरी जाट शिक्षण संस्था : नांदल
अधिवक्ता व बसपा जिला संयोजक चंचल नांदल ने कहा कि जाट शिक्षण संस्थाओं की ओर से संचालित ऑल इंडिया जाट हीरोज मेमोरियल कॉलेज के प्राचार्य पद की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन संवैधानिक रूप से गलत है। इस पद के लिए उपयुक्त लोग आवेदन से वंचित रहे हैं। जाट शिक्षण संस्थाएं परिवारवाद में घिरी हैं। पूर्व प्रधानों व सचिवों ने अपने परिवार, रिश्तेदार व नजदीकियों को पिछले दरवाजे से नौकरियां दी। किसी ने अपनी पुत्रवधु तो किसी ने बेटा-बेटी को नौकरी पर लगाया। प्रशासक ने भी जाट कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति के लिए नियमों को ताक पर रखा है। प्रशासक के कार्यकाल में दो संस्थानों में भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं।



वर्जन :
संस्था में प्राचार्य नियुक्ति को लेकर राष्ट्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया है। प्रशासन को विज्ञापन देने का अधिकार है। भर्ती प्रक्रिया के लिए पूरा प्रोसीजर फालो किया गया है। आरोप कोई भी लगा सकता है। हमने पूरी कार्रवाई लीगल की है।
-अरविंद मलहान, एसडीएम एवं प्रशासक, जाट शिक्षण संस्था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed