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ऑटो चालकों की मनमानी पड़ रही लोगों पर भारी
Updated Sun, 16 Jul 2017 12:35 AM IST
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ऑटो चालकों की मनमानी पड़ रही लोगों पर भारी
नारनौल। शहर में आटो चालकों की मनमानी लोगों पर भारी पड़ रही है। बेतरतीब खड़े हो रहे आटो से आम जन को परेशानी हो रही है। शहर में आटो चालकों के लिए न तो कई नियम हैं और न ही कोई कानून। यही कारण है कि इनके रूटों के बारे में भी सही अंदाजा लोग नहीं लगा सकते। छोटे से शहर में आटो चालकों की तीन साल पूर्व तीन-तीन यूनियन बनी जो रजिस्टर्ड नहीं हो पाई। कोई यूनियन नहीं होने के कारण आटो चालकों का चलने का कोई स्थान व समय भी निर्धारित नहीं है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा करीब दो साल पूर्व बनाए गए आटो चालकों के नियम भी अब धराशायी हो गए हैं। आटो चालकों के पास शहर में आटो चलाने का कोई भी लाइसेंस भी नहीं है। इसकी वजह से कई आटो चालक भी परेशान हैं तथा उन्होंने शहर में यूनियन बनाने की मांग भी की है।
शहर में सरपट बिना कानून के भय से दौड़ रहे आटो लोगों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। इन आटो पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन भी बेबस दिखाई दे रहा है। हालात यह है कि आटो चालक शहर के सबसे व्यस्ततम महावीर चौक पर भी अपना कब्जा जमा चुके हैं। महावीर चौक ही नहीं ये आटो चालक नागरिक अस्पताल, ब्वाय व गर्ल कालेज के सामने बेतरतीब खड़े रहते हैं। जिसके कारण इन आटों से अक्सर जाम की स्थिति भी बनने लगी है।
कहीं बैठो देने होंगे दस रुपये
सवारी चाहे एक किलोमीटर का सफर तय करे या 50 मीटर का आटो चालक उससे 10 रुपये वसूलते हैं। लोगों का कहना है कि पहले आटो चालक दूरी के अनुसार दो, पांच, आठ व दस रुपये लेते थे लेकिन अब चाहे छोटी दूरी हो या बड़ी सबसे दस रुपए वसूल कर रहे हैं।
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पांच साल पूर्व थे केवल 15 आटो अब 300
करीब पांच साल पूर्व शहर में मुश्किल से दस या 15 ही आटो थे। आटो की बजाय यहां सिटी सेवा के टैंपो की संख्या ज्यादा थी। लेकिन पांच सालों में सिटी सेवा के टैंपो गायब हो गए। वहीं उनका स्थान आटो चालकों ने ले लिया। यह भी कहा जाता है कि आटो चालकों की दादागिरी के चलते ही सिटी सेवा के टैंपो बंद हो गए। अब शहर में करीब 300 के करीब आटो सरपट सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
यहां होती है ज्यादा परेशानी
शहर का मुख्य चौक महावीर चौक है। यहां से आटो रेलवे स्टेशन, नई मंडी व सिविल अस्पताल की ओर जाते हैं। जिसके कारण महावीर चौक से रेलवे लाइन की ओर जाने वाले पूरे रास्ते पर आटो चालक अपना कब्जा जमा लेते हैं। इससे इस मार्ग पर लगभग जाम की स्थिति हमेशा ही बनी रहती है। वहीं आते समय भी ये मुख्य बाजार के पास रुक जाते हैं। जिससे मुख्य बाजार में जाने वालों को बहुत परेशानी होती है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल के गेट के सामने, ब्वायज कालेज व गर्ल कालेज तथा रेलवे स्टेशन पर भी आटो चालकों से काफी परेशानी होती है।
नियम हुए धराशायी
अगस्त 2015 में यातायात प्रभारी रही वीणा राणा ने आटो चालकों की बैठक लेकर उनके चलने का स्थान निर्धारित किया था। इसके लिए बकायदा आटो पर रूट का नाम भी लिखा था तथा एक यूनियन भी बनाई थी। लेकिन एक साल में पूरी व्यवस्था फिर से चौपट हो गई। शहर में सबसे ज्यादा तीन जगहों पर सवारियों का ज्यादा आवागमन रहता है। इसके लिए निर्धारित कोड बनाए गए थे, मगर अब ऐसा नहीं हो रहा है।
ये बनाए गए थे कोड
पहला : बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन रूट पर चलने वाले आटो के शीशे पर ‘एस’ यानी और आटो संख्या लिखा गया था। मतलब जिस आटो के शीशे पर आपको ‘एस’ अंकित दिखे, समझो वह ऑटो बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन के बीच चलेगा। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।
दूसरा : जिस आटो के शीशे पर ‘सी’ लिखा हो। उसका मतलब होगा सिटी यानी शहर के अंदरूनी हिस्से में जाने वाला आटो था। यह आटो बस स्टैंड से महावीर चौक, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, पुलिस लाइन, अग्रसेन चौक, लोहा मंडी, सामान्य अस्पताल, किला रोड, महता चौक, नेताजी सुभाषचंद बोस स्टेडियम, निजामपुर रोड-नांगल चौधरी रोड टी-प्वाइंट (सैनी धर्म कांटा), निजामपुर रोड, कोरियावास मोड़, कुलताजपुर मोड़, हैफेड, बाल भवन होते हुए हीरो होंडा चौक से महावीर चौक पहुंचते हैं। उसके बाद बस स्टैंड पर वापस पहुंचते थे।
तीसरा: जिस आटो के शीशे पर ‘एन’ शब्द लिखा हो उसका मतलब होगा वह आटो बस स्टैंड से नांगतिहाड़ी जाता था। यह आटो बस स्टैंड से महावीर चौक होते हुए महेंद्रगढ़ रोड स्थित ऑफिसर कालोनी के सामने कुछ पल रुकने के बाद यह पंचायत भवन, बिजली घर, हुडा सेक्टर, शास्त्रीनगर, नूनी-शेखपुरा मोड़, सरस्वती स्कूल, जिला जेल, हाउसिंग बोर्ड, रामनगर, गणेश कालोनी, नसीबपुर, निवाजनगर मोड होते हुए सीधे महेंद्रगढ़ रोड से नांगतिहाड़ी ऑटो पहुंचते थे।
शहर में आटो चालकों की मनमर्जी के कारण काफी परेशानी होती है। ये मन चाहे वहीं अपना ऑटो खड़ा कर देते हैं। -भूपेश कुमार
ऑटो चालकों ने अपना किराया निर्धारित किया हुआ है। वहीं ये बड़ी तेज गति से आटो को चलाते हैं। शहर में आटो की संख्या अचानक बढ़ जाने से ट्रैफिक जाम जैसी भी समस्या हो गई है। -दीपक कुमार
शहर में सैकड़ों आटो दौड़ रहे हैं। इन पर किसी प्रकार का लगाम नहीं लगाया जा रहा। नियम तोड़ने वाले आटो चालकों पर कार्रवाई होनी चाहिए। -गौरव
ऑटो चालक अस्पताल, ब्वाय कालेज व गर्ल कालेज के बाहर बेतरतीब खड़े रहते हैं। जिसके कारण काफी परेशानी होती है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। -नवीन कुमार
समय-समय पर आटो चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। महावीर चौक के पास आटो चालकों को खड़ा नहीं होने दिया जाता।
वहीं इनके चालान भी किए जा रहे हैं। शनिवार को भी चार आटो चालकों के चालान किए गए।-
-सत्यनारायण, ट्रैफिक एसएचओ, नारनौल
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नारनौल। शहर में आटो चालकों की मनमानी लोगों पर भारी पड़ रही है। बेतरतीब खड़े हो रहे आटो से आम जन को परेशानी हो रही है। शहर में आटो चालकों के लिए न तो कई नियम हैं और न ही कोई कानून। यही कारण है कि इनके रूटों के बारे में भी सही अंदाजा लोग नहीं लगा सकते। छोटे से शहर में आटो चालकों की तीन साल पूर्व तीन-तीन यूनियन बनी जो रजिस्टर्ड नहीं हो पाई। कोई यूनियन नहीं होने के कारण आटो चालकों का चलने का कोई स्थान व समय भी निर्धारित नहीं है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा करीब दो साल पूर्व बनाए गए आटो चालकों के नियम भी अब धराशायी हो गए हैं। आटो चालकों के पास शहर में आटो चलाने का कोई भी लाइसेंस भी नहीं है। इसकी वजह से कई आटो चालक भी परेशान हैं तथा उन्होंने शहर में यूनियन बनाने की मांग भी की है।
शहर में सरपट बिना कानून के भय से दौड़ रहे आटो लोगों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। इन आटो पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन भी बेबस दिखाई दे रहा है। हालात यह है कि आटो चालक शहर के सबसे व्यस्ततम महावीर चौक पर भी अपना कब्जा जमा चुके हैं। महावीर चौक ही नहीं ये आटो चालक नागरिक अस्पताल, ब्वाय व गर्ल कालेज के सामने बेतरतीब खड़े रहते हैं। जिसके कारण इन आटों से अक्सर जाम की स्थिति भी बनने लगी है।
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सवारी चाहे एक किलोमीटर का सफर तय करे या 50 मीटर का आटो चालक उससे 10 रुपये वसूलते हैं। लोगों का कहना है कि पहले आटो चालक दूरी के अनुसार दो, पांच, आठ व दस रुपये लेते थे लेकिन अब चाहे छोटी दूरी हो या बड़ी सबसे दस रुपए वसूल कर रहे हैं।
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पांच साल पूर्व थे केवल 15 आटो अब 300
करीब पांच साल पूर्व शहर में मुश्किल से दस या 15 ही आटो थे। आटो की बजाय यहां सिटी सेवा के टैंपो की संख्या ज्यादा थी। लेकिन पांच सालों में सिटी सेवा के टैंपो गायब हो गए। वहीं उनका स्थान आटो चालकों ने ले लिया। यह भी कहा जाता है कि आटो चालकों की दादागिरी के चलते ही सिटी सेवा के टैंपो बंद हो गए। अब शहर में करीब 300 के करीब आटो सरपट सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
यहां होती है ज्यादा परेशानी
शहर का मुख्य चौक महावीर चौक है। यहां से आटो रेलवे स्टेशन, नई मंडी व सिविल अस्पताल की ओर जाते हैं। जिसके कारण महावीर चौक से रेलवे लाइन की ओर जाने वाले पूरे रास्ते पर आटो चालक अपना कब्जा जमा लेते हैं। इससे इस मार्ग पर लगभग जाम की स्थिति हमेशा ही बनी रहती है। वहीं आते समय भी ये मुख्य बाजार के पास रुक जाते हैं। जिससे मुख्य बाजार में जाने वालों को बहुत परेशानी होती है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल के गेट के सामने, ब्वायज कालेज व गर्ल कालेज तथा रेलवे स्टेशन पर भी आटो चालकों से काफी परेशानी होती है।
नियम हुए धराशायी
अगस्त 2015 में यातायात प्रभारी रही वीणा राणा ने आटो चालकों की बैठक लेकर उनके चलने का स्थान निर्धारित किया था। इसके लिए बकायदा आटो पर रूट का नाम भी लिखा था तथा एक यूनियन भी बनाई थी। लेकिन एक साल में पूरी व्यवस्था फिर से चौपट हो गई। शहर में सबसे ज्यादा तीन जगहों पर सवारियों का ज्यादा आवागमन रहता है। इसके लिए निर्धारित कोड बनाए गए थे, मगर अब ऐसा नहीं हो रहा है।
ये बनाए गए थे कोड
पहला : बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन रूट पर चलने वाले आटो के शीशे पर ‘एस’ यानी और आटो संख्या लिखा गया था। मतलब जिस आटो के शीशे पर आपको ‘एस’ अंकित दिखे, समझो वह ऑटो बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन के बीच चलेगा। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।
दूसरा : जिस आटो के शीशे पर ‘सी’ लिखा हो। उसका मतलब होगा सिटी यानी शहर के अंदरूनी हिस्से में जाने वाला आटो था। यह आटो बस स्टैंड से महावीर चौक, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, पुलिस लाइन, अग्रसेन चौक, लोहा मंडी, सामान्य अस्पताल, किला रोड, महता चौक, नेताजी सुभाषचंद बोस स्टेडियम, निजामपुर रोड-नांगल चौधरी रोड टी-प्वाइंट (सैनी धर्म कांटा), निजामपुर रोड, कोरियावास मोड़, कुलताजपुर मोड़, हैफेड, बाल भवन होते हुए हीरो होंडा चौक से महावीर चौक पहुंचते हैं। उसके बाद बस स्टैंड पर वापस पहुंचते थे।
तीसरा: जिस आटो के शीशे पर ‘एन’ शब्द लिखा हो उसका मतलब होगा वह आटो बस स्टैंड से नांगतिहाड़ी जाता था। यह आटो बस स्टैंड से महावीर चौक होते हुए महेंद्रगढ़ रोड स्थित ऑफिसर कालोनी के सामने कुछ पल रुकने के बाद यह पंचायत भवन, बिजली घर, हुडा सेक्टर, शास्त्रीनगर, नूनी-शेखपुरा मोड़, सरस्वती स्कूल, जिला जेल, हाउसिंग बोर्ड, रामनगर, गणेश कालोनी, नसीबपुर, निवाजनगर मोड होते हुए सीधे महेंद्रगढ़ रोड से नांगतिहाड़ी ऑटो पहुंचते थे।
शहर में आटो चालकों की मनमर्जी के कारण काफी परेशानी होती है। ये मन चाहे वहीं अपना ऑटो खड़ा कर देते हैं। -भूपेश कुमार
ऑटो चालकों ने अपना किराया निर्धारित किया हुआ है। वहीं ये बड़ी तेज गति से आटो को चलाते हैं। शहर में आटो की संख्या अचानक बढ़ जाने से ट्रैफिक जाम जैसी भी समस्या हो गई है। -दीपक कुमार
शहर में सैकड़ों आटो दौड़ रहे हैं। इन पर किसी प्रकार का लगाम नहीं लगाया जा रहा। नियम तोड़ने वाले आटो चालकों पर कार्रवाई होनी चाहिए। -गौरव
ऑटो चालक अस्पताल, ब्वाय कालेज व गर्ल कालेज के बाहर बेतरतीब खड़े रहते हैं। जिसके कारण काफी परेशानी होती है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। -नवीन कुमार
समय-समय पर आटो चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। महावीर चौक के पास आटो चालकों को खड़ा नहीं होने दिया जाता।
वहीं इनके चालान भी किए जा रहे हैं। शनिवार को भी चार आटो चालकों के चालान किए गए।-
-सत्यनारायण, ट्रैफिक एसएचओ, नारनौल