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एमडीयू में एसी की बैठक
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विकास सैनी
रोहतक। एमडीयू कैंपस में अब पढ़ाई नए अंदाज में होगी। विद्यार्थी नियमों से परे एक से ज्यादा विषय पढ़ सकेंगे। इसके लिए कैंपस में नए सत्र से फैकल्टी आफ इंटर डिसिप्लीनरी स्टडी शुरू की जाएगी। इसमें पीएचडी विद्यार्थी एक से ज्यादा विषय पढ़ कर उनके एक्सपर्ट बन सकेंगे। अब तक विद्यार्थी अलग-अलग एक ही विषय का अध्ययन कर रहे हैं। यह फैसला सोमवार को एमडीयू की एसी (शैक्षणिक परिषद) की बैठक में लिया गया। अब यह एजेंडा अगली कार्रवाई के लिए ईसी (कार्यकारी परिषद) की बैठक में रखा जाएगा। प्रदेश में इस तरह का कदम उठाने वाला यह पहला विवि होगा। इस तरह की व्यवस्था प्रदेश के बाहर आसपास जामिया मिलिया इस्लामिया विवि में है।
विवि की 12वीं फैकल्टी होगी विकसित
एमडीयू में वर्तमान समय में 11 फैकल्टी हैं। इनमें सोशल साइंस, लाइफ साइंस, मैथ शामिल है। इन फैकल्टी के कुल 38 विभाग हैं। फैकल्टी आफ इंटर डिसिप्लीनरी स्टडी विवि की 12वीं फैकल्टी होगी। इसमें जीओ इंफोर्मेटिक्स, डिजास्टर, फिजिक्स, एनवायरमेंट साइंस, भूगोल व अन्य विषय होंगे। पीजी या पीएचडी करने वाले विद्यार्थी यहां एक से ज्यादा विषय पढ़ेंगे।
क्यों पड़ी नई फैकल्टी शुरू करने की जरूरत
अब तक शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी डिसिप्लीनरी तरीके से यानी एक दायरे में रह कर एक ही सीमित विषय का अध्ययन करते रहे हैं। इस कारण विद्यार्थियों को भी एक ही तरह की जानकारी होती है। जबकि नए दौर में एक विषय काफी नहीं है। कई विषय ऐसे हैं, जिसमें दूसरे विषय की भी जरूरत पड़ती है। जीओ इंफोर्मेटिक्स इसका बड़ा उदाहरण है। इस विषय में भूगोल, फिजिक्स, एनवायरमेंट साइंस की जानकारी होना भी जरूरी है।
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प्रो. यशपाल कमेटी के तहत शुरू होगी फैकल्टी
यूजीसी ने प्रो. यशपाल के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की थी। कमेटी को नए दौर के कोर्सों को लेकर रिपोर्ट देनी थी। प्रो. यशपाल कमेटी ने वर्ष 2009 में अपनी रिपोर्ट दी। इसमें कहा गया है कि हर विषय व इसका शिक्षक अलग होता है। ऐसे में दूसरे विषय के साथ सामंजस्य नहीं बनता है। विद्यार्थी भी एक ही विषय में एक्सपर्ट बनता है। अब दो से तीन विभागों के मिलकर रिसर्च करने की जरूरत है। इसमें पीएचडी भी शामिल है। इसलिए नए टीचिंग प्रोग्राम की जरूरत है। इसी के तहत यह नई फैकल्टी शुरू की जा रही है।
सीटों से ज्यादा दाखिला देने वाले कालेजों पर होगी कार्रवाई
निर्धारित सीटों से ज्यादा दाखिला देने वाले कालेजों पर एमडीयू प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। इसी कड़ी में सोमवार को एसी की बैठक में एमकेजेके समेत चार कालेजों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई। इनमें एक कालेज होडल का है। बैठक में कालेजों पर पैनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
अब 5000 रुपये ज्यादा मिलेगी स्कॉलरशिप
एमडीयू में पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को अब पांच हजार रुपये स्कॉलरशिप ज्यादा मिलेगी। इसके लिए एसी की बैठक में यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप ओर्डिनेंस में संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रथम व द्वितीय वर्ष के लिए नौ हजार से 14 हजार रुपये व तृतीय वर्ष के दस हजार से 15 हजार रुपये स्कॉलरशिप करने का फैसला लिया गया है। यह वृद्धि करीब 50 प्रतिशत है। विवि हर वर्ष 40 स्कॉलरशिप देता है। इसके अलावा 15 स्कॉलरशिप एससी विद्यार्थियों के लिए हैं।
वीसी व रजिस्ट्रार की पहली एसी बैठक
एमडीयू के वीसी प्रो. राजबीर सिंह व रजिस्ट्रार डॉ. गुलशन तेनजा सोमवार को अपनी पहली एसी की बैठक में शामिल हुए। उनकी नियुक्ति के बाद पहली बार यह बैठक हुई। यह बैठक आईएचटीएम के सभागार में दोपहर ढाई बजे के बाद शुरू हुई।
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रोहतक। एमडीयू कैंपस में अब पढ़ाई नए अंदाज में होगी। विद्यार्थी नियमों से परे एक से ज्यादा विषय पढ़ सकेंगे। इसके लिए कैंपस में नए सत्र से फैकल्टी आफ इंटर डिसिप्लीनरी स्टडी शुरू की जाएगी। इसमें पीएचडी विद्यार्थी एक से ज्यादा विषय पढ़ कर उनके एक्सपर्ट बन सकेंगे। अब तक विद्यार्थी अलग-अलग एक ही विषय का अध्ययन कर रहे हैं। यह फैसला सोमवार को एमडीयू की एसी (शैक्षणिक परिषद) की बैठक में लिया गया। अब यह एजेंडा अगली कार्रवाई के लिए ईसी (कार्यकारी परिषद) की बैठक में रखा जाएगा। प्रदेश में इस तरह का कदम उठाने वाला यह पहला विवि होगा। इस तरह की व्यवस्था प्रदेश के बाहर आसपास जामिया मिलिया इस्लामिया विवि में है।
विवि की 12वीं फैकल्टी होगी विकसित
एमडीयू में वर्तमान समय में 11 फैकल्टी हैं। इनमें सोशल साइंस, लाइफ साइंस, मैथ शामिल है। इन फैकल्टी के कुल 38 विभाग हैं। फैकल्टी आफ इंटर डिसिप्लीनरी स्टडी विवि की 12वीं फैकल्टी होगी। इसमें जीओ इंफोर्मेटिक्स, डिजास्टर, फिजिक्स, एनवायरमेंट साइंस, भूगोल व अन्य विषय होंगे। पीजी या पीएचडी करने वाले विद्यार्थी यहां एक से ज्यादा विषय पढ़ेंगे।
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क्यों पड़ी नई फैकल्टी शुरू करने की जरूरत
अब तक शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी डिसिप्लीनरी तरीके से यानी एक दायरे में रह कर एक ही सीमित विषय का अध्ययन करते रहे हैं। इस कारण विद्यार्थियों को भी एक ही तरह की जानकारी होती है। जबकि नए दौर में एक विषय काफी नहीं है। कई विषय ऐसे हैं, जिसमें दूसरे विषय की भी जरूरत पड़ती है। जीओ इंफोर्मेटिक्स इसका बड़ा उदाहरण है। इस विषय में भूगोल, फिजिक्स, एनवायरमेंट साइंस की जानकारी होना भी जरूरी है।
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प्रो. यशपाल कमेटी के तहत शुरू होगी फैकल्टी
यूजीसी ने प्रो. यशपाल के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की थी। कमेटी को नए दौर के कोर्सों को लेकर रिपोर्ट देनी थी। प्रो. यशपाल कमेटी ने वर्ष 2009 में अपनी रिपोर्ट दी। इसमें कहा गया है कि हर विषय व इसका शिक्षक अलग होता है। ऐसे में दूसरे विषय के साथ सामंजस्य नहीं बनता है। विद्यार्थी भी एक ही विषय में एक्सपर्ट बनता है। अब दो से तीन विभागों के मिलकर रिसर्च करने की जरूरत है। इसमें पीएचडी भी शामिल है। इसलिए नए टीचिंग प्रोग्राम की जरूरत है। इसी के तहत यह नई फैकल्टी शुरू की जा रही है।
सीटों से ज्यादा दाखिला देने वाले कालेजों पर होगी कार्रवाई
निर्धारित सीटों से ज्यादा दाखिला देने वाले कालेजों पर एमडीयू प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। इसी कड़ी में सोमवार को एसी की बैठक में एमकेजेके समेत चार कालेजों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई। इनमें एक कालेज होडल का है। बैठक में कालेजों पर पैनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
अब 5000 रुपये ज्यादा मिलेगी स्कॉलरशिप
एमडीयू में पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को अब पांच हजार रुपये स्कॉलरशिप ज्यादा मिलेगी। इसके लिए एसी की बैठक में यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप ओर्डिनेंस में संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रथम व द्वितीय वर्ष के लिए नौ हजार से 14 हजार रुपये व तृतीय वर्ष के दस हजार से 15 हजार रुपये स्कॉलरशिप करने का फैसला लिया गया है। यह वृद्धि करीब 50 प्रतिशत है। विवि हर वर्ष 40 स्कॉलरशिप देता है। इसके अलावा 15 स्कॉलरशिप एससी विद्यार्थियों के लिए हैं।
वीसी व रजिस्ट्रार की पहली एसी बैठक
एमडीयू के वीसी प्रो. राजबीर सिंह व रजिस्ट्रार डॉ. गुलशन तेनजा सोमवार को अपनी पहली एसी की बैठक में शामिल हुए। उनकी नियुक्ति के बाद पहली बार यह बैठक हुई। यह बैठक आईएचटीएम के सभागार में दोपहर ढाई बजे के बाद शुरू हुई।